अंग्रेजी शराब की तस्करी का बड़ा धंधेबाज

“सफेद सफारी जिसमे लिखा है आगे ‘काली’, पीछे ‘काली’ इसमे बैठकर धंधे का संचालन करता है ‘कुख्यात काली’ “
झाँसी से जालौन तक शराब की खुले आम तस्करी का है बेताज बादशाह
हरयाणा की सस्ती बोतलों पर महँगे ब्रांड के रैपर लगाकर हो रहे करोड़ों के बारे न्यारे
आबकारी और पुलिस विभाग के संरक्षण में चल रहा है पूरा खेल
जनपद जालौन का निवासी है ‘काली’
उरई: अंग्रेजी शराब की कई दुकानों के सरकारी ठेके बेनामी रूप से लेकर काली ने झाँसी से लेकर उरई सहित दूर दूर तक अपना बड़ा और संगठित नेटवर्क खड़ा कर रखा है और वो शराब की तस्करी का बड़ा धंधेबाज है।
अपने ठेके चलवाते चलवाते काली के दिमाग में एक काला धंधा इस कदर जम गया कि वो हरयाणा और अन्य क्षेत्रों से अंग्रेजी शराब की सस्ती और घटिया क्वालिटी की बोतलें खरीदकर लाने लगा। और उनके रैपर हटाकर बोतलों पर महँगे ब्रांड के रैपर लगाकर पहले अपनी ही दुकानों से बिकवाने लगा। इससे पहले ही उसने तस्करी करके दूर दूर से शराब लाने और उसे अपनी दुकानों पर बिकवाने के अवैध कार्य को पूर्ण तया सुरक्षित बनाने के लिए अपने कार्य क्षेत्र में न सिर्फ आबकारी विभाग के करता धर्ताओं को खरीद लिया। बल्कि इस धंधे के सबसे बड़े अड़ंगे पुलिस की भी मन की मुराद पूरी करने लगा। सरकारी लोगों पर अंधाधुंध पैसा लुटाने के फार्मूले से काली का धंधा दिन दूना और रात चौगुना विस्तार पा गया।
अब तो काली का घटिया माल बढ़िया रैपर में पैक होकर अन्य अंग्रेजी शराब की दुकानों पर भी जाने लगा। काले धंधे में हुई अप्रत्याशित वृद्धि से झाँसी में एक सरकारी विभाग के सीमित आय वाले मुलाजिम का यह नशीला खेल अब इस कदर फल फूल रहा है कि बीते लॉक डाउन काल मे जब सबकुछ बंद था और शराबी शराब की तलब से तड़प रहे थे। तब काली ने अपने ठिये बदलकर करोड़ों कमा डाले।
आबकारी विभाग झाँसी से जालौन तक काली के काले कारनामे पूरी तरह से जानता है। मगर काली द्वारा फेंका जाने वाला सुनहरा धन उन्हें दारू के इस अवैध धंधे में काली का सहयोग खुले दिल से करवाने का काम करता है। पुलिस की बात करें तो काली के कार्य क्षेत्र की थाना पुलिस काली की न सिर्फ सहभागी बनी हुई है। बल्कि जनपद के कोंच आदि क्षेत्रों में तो काली की खातिरदारी थानों में मेहमान की तरह की जाती है। क्योंकि काली जहां बंधा महीना देता है। वहीं उसे जो कोई भी वर्दी धरि आते जाते टकरा जाता है तत्काल उसकी मुट्ठी गर्म कर देता है। इस कारण से काली को देखते ही वर्दी वालों के चेहरों पर मुस्कान आ जाती है। एक छोटे सरकारी कर्मचारी से उठकर दारू के दो नम्बर के धंधे की बदौलत अब शराब के काले धंधे का खिलाड़ी बन चुका काली झाँसी में करोड़ों की हैसियत बना चुका है। और सफेद कलर की टाटा सफारी से चलकर अपने धंधे का संरक्षण करता है। उसकी गाड़ी को दूर से ही देखकर पहचाना जा सकता है क्योंकि उसकी सफेद सफारी में आगे और पीछे काली लिखा हुआ है।
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