अखिल राज्य ऑनलाइन काव्य संगोष्ठी “परवाज” संपन्न

जनपद जालौन से चयनित हुए शिक्षक राज कुमार शर्मा
उरई(जालौन): बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों द्वारा ऑनलाइन काव्य संगोष्ठी परवाज के लाइव कार्यक्रम का आयोजन गत २८ जून को डॉक्टर सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह निदेशक बेसिक एससीइरटी उत्तर प्रदेश के मुख्या आतिथ्य में एवं श्री अब्दुल मुबीन सहायक निर्देशक बेसिक शिक्षा लखनऊ के कुशल निर्देशन में संपन्न हुई। जिसमे प्रदेश भर के शिक्षक साहित्य साधको ऑनलाइन कविता पाठ द्वारा परवाज की पहली श्रंखला का प्रारम्भ किय। जिसमे प्रदेश भर से चयनित ३० कवियों ने काव्य की रसधारा बहाई। इसी क्रम में जालौन जनपद के उरई निवासी शिक्षक राज कुमार शर्मा ‘राज’ का चयन किया गया। उन्होंने प्रकृति का सजीव चित्रण करती हुई अपनी रचना ‘प्रकृति सुंदरी’ का पाठ किया। ” बात एक साँझ की है जो न बिसराई जाये सिहरात पवन चलत बदरा छाए कारे है।” यूट्यूब और फेसबुक पर चल रहे लाइव प्रसारण के दौरान भ्रांतिमान के अनूठे प्रभाव से सजी कविता को काफी सरहाया गया।
कार्यक्रम अपने निर्धारित समय पर ठीक १२ बजे सहायक निर्देशक श्री अब्दुल मुबीन द्वारा संयोजको के परिचय तथा कार्यक्रम की परिकल्पना से परिचय कराते हुए प्रारम्भ किया। तत्पश्चात निर्देशक श्री सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह का उद्बोधन हुआ। निर्देशक ने कविता लेखन की ब्रिकीयों पे बात की। उन्होंने कहा की कविता लेखन की सबसे परिष्कृत विधा है। कविता के पुनर पाठ में नवीन अर्थ ध्वनित होते है। यह कविता की सार्थकता है। उन्होंने आगे कहा की छोटे बच्चों के लिए कविता लिखना बेहद मुश्किल कार्य है। बच्चों के भाव भूमि पर उनके वातावरण और शब्द भंडार के मुताबिक सृजन बेहद कठिन कार्य है। उन्होंने सभी कवियों को बच्चो के लिए अधिक से अधिक लिखने का सुझाव दिया।
ढाई घंटे के कार्यक्रम में प्रियंका त्रिपाठी ‘तरंग’ द्वारा माँ वाणी की वंदना के उपरांत प्रदेश भर के विभिन्न जनपदों के साहित्य साधको ने काव्य की रसधारा को प्रवाहित किया। जिसमे इटावा से ज्योति अग्निहोत्री ‘नित्या’ ने मातृभूमि का वंदन करते हुए अपनी रचना ‘ऐ मातृभूमि’ का पाठ किया। देवरिया से उमाशंकर दिवेदी ने ‘पढ़ने में कुछ मेहनत करलो ‘, कन्नौज से पूनम पांडेय ने ‘सृजन करो एक नयी’, देवरिया से रामबली गुप्ता ने ‘जलना जब स्वीकार करोगे’, बहराइच से मधुलिका चौधरी ने ‘सरकारी स्कूलों में पढ़ाना’, गौतम बुद्ध नगर से विकास राय ‘देहलीज़ को ना’, गोरखपुर से निशा राय ‘पुरवैया से केहदो’ , सहारनपुर से अरशद अली ‘ऐ वतन’, बरैली से दीप्ति सक्सेना ने ‘जैसी करनी वैसी भरनी’ , श्रावस्ती से कनकलता ने ‘वजूद उसका’ , सहारनपुर से कुमारी आशिया आते हुए देखा है कभी , सीतापुर से शाकिर अली ने ‘कहीं ज़मीन तो कहीं आसमान ‘, अयोध्या से अनजानी कुमार त्रिपाठी ने ‘मेरे एक मित्र’, खीरी से ज्ञान प्रकाश अवस्थी ‘ 90 प्रतिशत वाक्य’ उन्नाओ से स्नेहिल पांडेय ने ‘सश्य श्यामलाम माता’ , सोनभद्र से राधेश्याम पाल ने ‘ आइये बैठिये मशवरा कीजिये’ , लखनऊ से क्षमा दुबे ने ‘माँ मेरे प्यार की मूरत’ , हापुड़ से ऋतू श्रीवास्तव ने ‘प्रकृति के मनमीत ‘ , कानपूर से ओमप्रकाक्ष , लुछमौ से आदिल मंसूरी, सीतापुर से खुश्तर रेहमान तथा विश्वनाथ आदि ने कविता पाठ किया।
कार्यक्रम का सञ्चालन डॉक्टर रेनू देवी , जनार्दन पांडेय ‘नाचीज़’ , अखिलेश चंद्र पांडेय ‘अखिल’ , आदिल मसूरी , दीनबंधु त्रिपाठी तथा मृदुला त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम में तकनिकी सहायता शिवम् सिंह और मंसूर अहमद द्वारा की गयी।
कार्यक्रम का सीधा प्रसारण यूट्यूब और फेसबुक पे किया गया जिसे देशभर के बौहत सरे लोगो द्वारा देखा गया।