अपना भोकाल बचाने के लिये भू माफिया गिरोह के सरगना अब पुलिस और प्रशासन को भी अपनी मण्डली मे बैठकर दे रही है चुनौती

पीड़ितों को है कठोर कार्रवाई का इंतजार

प्रशासन और पुलिस द्वारा तमाम आपराधिक कारनामे उजागर हो जाने और बच्चे बच्चे की जुबान पर आ जाने के बाबजूद अब तक पुलिस और प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम न उठाए जाने से भू माफिया का बिगड़ रहा है दिमाग

महिला भू माफिया भी पुलिस को दिखा रही है ठेंगा

भू माफिया से पीड़ित शरीफ लोगों मे संशय की स्थिति

सीएम योगी के भू माफिया अभियान को धता बताकर खुश हो रहे हैं भू माफिया सरगना और उनका गिरोह

उरई(जालौन)। उरई शहर के कुख्यात भू माफिया गिरोह का तो मानो दिमाग खराब हो गया हो। क्योंकि तमाम आपराधिक मामले उजागर हो जाने के बाद जहां इन सरगनाओं के विरूद्व पहले से ही 30 से अधिक एफआईआर पंजीकृत हो चुकी है और बुजुर्ग भू माफिया एक मुदकमे मे वारंट पर चल रहा है। मगर इस सब के बाबजूद उनके अवैध धन का कमाल देखिए कि जो गाज काफी पहले पुलिस प्रशासन को उनके उपर गिरा देनी चाहिये थी। वह अभी तक नही गिर सकी है। जिसके चलते भू माफिया सरगनाओं को भले अंदर से पुलिस का भय सता रहा हो। मगर उपर वे अपने भोकाल को बनाए रखने के लिये पुलिस सहित प्रशासन को भी अंदर वाले कमरे मे बैठ कर पैग और लैग के बीच चुनौती देने मे लगे है और उनका गिरोह शिखंडियों की तरह अपने बोस लोगों की हां मे हां मिलाकर फिलहाल तो अवैध धन से मौज मस्ती कर जश्न मना रहे है।

यहां यह उल्लेखनीय है कि शहर के सबसे कुख्यात और हंसते हंसते अपराधों केा अंजाम देने वाले खानदानी भू माफिया जिनके घर की महिला भी फर्जी रजिस्ट्री करके भू माफियाओं मे गिनी जाने लगी है। वे सभी अवैध दौलत के दम पर न सिर्फ ऐश कर रहे है। बल्कि दंग फंद से हासिल दूसरों की हड़पी हुयी और सरकार की खाली पड़ी जमीनों का बंदर बांट करके अपने को असली माफिया साबित करने के इरादे से जहां पुलिस और प्रशासन को चुनौती दे रहे है। वहीं हम किसी से नही डरते, के ऐलान के साथ दो दो नई लग्जरी कारों मे मय गिरोह सहित बैठ कर शहर के रोज कई राउण्ड लगाते है। ताकि इनसे डरने वाले वो पीड़ित लोग सिर न उठा सकें। जिनकी जमीन जायदाद पर इन्होने अवैध कब्जा कर रखा है।

गौरतलब है कि पुलिस और प्रशासन उपर के निर्देशों पर भू माफियाओं के विरूद्व जो कड़ा अभियान जनपद मे चलाने वाले है। उसमे ढुल मुल प्रशासनिक मशीनरी के कारण विलंब पर विलंब होता जा रहा है। भू माफियाओं के खिलाफ जैसी फुर्ती और चुस्ती अन्य जनपदों मे देखने को मिली। वो उरई मे अब तक स्थापित नही हो पा रही है। हालांकि पुलिस अधीक्षक का बार बार यही कहना है कि किसी भी भू माफिया को वे कतई नही बख्शेगें और यह सबसे सक्रिय मां, बाप और बेटों का खानदानी भू माफिया गिरोह पुलिस और प्रशासन के टारगेट मे सबसे उपर वाली पायदान पर अपना स्थान बना चुका है। क्योंकि इन्होने इतने सारे आपराधिक कारनामों को अंजाम दिया है कि पुलिस उनकी अब तक पूरी लिस्ट भी नही बना पायी है और जो मामले इन्होने पुराने प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के बल पर दवा दिये और जो नाम मात्र के पैसे देकर निपटा दिये तथा लिखा पढ़ी मे समझौता कर लिया। उनकी फहरिस्त तो अलग है।

बताया जाता है कि इस भू माफिया गिरोह की रणनीति यह रहती है कि वे पहले से ही शहर के निकट कुछ खेत खरीदे हुये है या एग्रीमेंट टू सेल कराकर टैक्स चोरी करते हुए वास्तविक भू माफिया से ही प्लाटों की रजिस्ट्री करा देते है। खेत का थोक मे जितना दाम तय होता है वह किस्तों मे खेत मालिक को लास्ट तक उसे परेशान करने के उपरान्त ही चुकाते है और उसके खेत को उसी से रजिस्टी करवा करवा कर फुटकर प्लाटो मे काफी उंचे दामों पर बेच देते हैै। जिसके कारण न सिर्फ सरकार को रजिस्ट्री शुल्क का चूना लगता है वहीं इन्हें इनकम टैक्स, कैपिटल गेन टैक्स भी नही देना पड़ता। दूसरों की जमीनें हड़प लेने और सरकार का टैक्स चोरी कर लेने के कारण ये भू माफिया सरगना खानदान काफी मोटी पंूजी बना चुका है। मगर इसी के साथ मोटा होता गया इनका आपराधिक इतिहास। अब तेज तर्रार एसपी जिसका एक एक पन्ना छटवा कर इनकी क्रिमनल हिस्ट्री तैयार करवाकर गिरोह को सूचीवद्व करने की कवायद मे लगे है। मगर पुलिस के इनके प्रति हमेशा से रहे उदारवादी रवैये के कारण इनके द्वारा घटित अपराधों के मामले पहले से तो संकलित थे नही। इस कारण अब पूरे गिरोह के विरूद्व दर्ज एफआईआर उसके बाद उनमे क्या कार्रवाई हुयी तथा वो कौन कौन से अपराध है जिनकी एफआईआर इन्होने अपने तत्कालीन पुलिस अधिकारियों जो इनके अवैध धंधे के पार्टनर भी रहें है। उनसे मिलकर दर्ज ही नही होने दी। यह समूचा विवरण ही गैगस्टर और एनएसए का आधार बनेगा। उसी के बल पर ये सरगना अपने गिरोह के साथ सींकचों के पीछे पहुंचाए जाएंगे। कार्रवाई ऐसी होगी कि लंबे समय तक ही जेल से बाहर न निकल सकें। इनके अवैध कारनामों मे भागीदार बुजुर्ग भू माफिया की पत्नी भी है। उनके लिये भी पुलिस गंभीरता से रणनीति तैयार कर रही है। मगर फिलहाल दलित वृद्वा एवं उसकी दो बालिग बेटियों के अपहरण एवं वृद्वा से वसीयत करा लेने की एकाएक उछले प्रकरण से जहां इनकी सिटटी पिटटी गुम हो गयी थी और इन्हें सपने मे भी जेल दिखायी देने लगी थी। मगर उसकी विवेचना और कार्रवाई मंथर गति से चलने और अब तक इनके उपर हाथ न डाले जाने तथा न ही पीड़िता का 164 का बयान करानए जाने के फलस्वरूप इनका भय पुलिस के प्रति कुछ घट गया है। इसी कारण ये अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भू माफियाओ के दुश्मन बन कर जो एक से एक बड़े धुरंधरों के उपर टूट रहे है। उनका भी भय अब इन “चिरकुट” उरई शहर के भू माफियाओं को नही सता रहा।इनसे पीड़ित तमाम शरीफ और कमजोर तबके के लोगो ने “यंग भारत” के माध्यम से जिलाधिकारी डा.मन्नान अख्तर और पुलिस अधीक्षक डा.यशवीर सिंह से यह पुरजोर मांग की है कि वे अन्य जनपदों की तरह उरई मे भी भू माफिया का समूल्य नाश करें और उनकी जमीनों को भय और दंद फंद से जो इस गिरोह ने हड़पी है उन्हें वापस दिलाएं तथा ये अभी तक दूसरों की जमीनें हड़पने का अभियान चलाएं हुए है। जिसका ताजा उदाहरण उरई के डाक्टर लतीफ अंसारी का पुस्तैनी ख्ेात जो करसान रोड स्थित गाटा संख्या 485 है उस पर इन दुष्टों ने ताजा ताजा डाका डालना शुरू कर दिया है तो अधिकारियों को चाहिये कि इनके खिलाफ ऐसी सबकनाक कार्रवाई अमल मे लाए कि ये किसी अन्य की अथवा सरकारी भूमि की तरफ देखने की जुर्ररत भी न सकें।

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