अपने ही बनाये जाल में फंस गया ग्राम विकास विभाग बांदा

8 जून 020 से प्रवासी मजदूरों ने सुकड़ी नदी पर श्रमदान शुरू किया था
13 जून को घरार नदी में जल स्रोत फूट पड़े नदी पुनर्जीवित हो उठी
17 जून को जल शक्ति मंत्री के मित्र ने घरार नदी पर हो रहे श्रमदान के वीडियो और फोटो भेजे
जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को घरार नदी पर हो रहे श्रम दान के वीडियो और फोटो भेजे
19 जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रमदानियों को भगीरथ कहकर सम्मान करने की घोषणा की
ग्राम विकास विभाग में हड़कंप मच गया वीडियो मनोज कुमार ने आनन फानन में घरार नदी को नाला बताकर घरार नदी के तट पे मनरेगा का बोर्ड लगा दिया
20 जून को लखनऊ से मुख्य अभियंता के नेतृत्व में एक जांच दल आया जिसने श्रम दानियों से बात की
सीडीओ ने मनरेगा के कार्य की स्वीकृति ही 20 जून को दी जबकि घरार नदी में श्रमदान 8 जून से ही शुरू हो गया था
अनिल शर्मा +संजय श्रीवास्तव+डॉ राकेश द्विवेदी
भाँवर पुर( वांदा ) डीएम अमित बंसल के निर्देश पर ग्राम भाँवरपुर पहुंचे एसडीएम अतर्रा जेपी यादव ने जैसे ही जांच की घोषणा की इसके साथ ही अपने ही बनाए जाल में ग्राम विकास विभाग फसता नजर आ रहा है
मालूम हो कि देश के पंजाब गुजरात महाराष्ट्र आदि प्रदेशों से दूसरे और तीसरे लॉकडाउन के बाद हालात के मारे प्रवासी मजदूर परिवार सहित पैदल चलकर लौटे तो फिर उन्होंने समाजसेवी राजा भैया के साथ मिलकर एक दर्शक से सूखी पड़ी अपनी धरार नदी को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया । इसके बाद 8 जून से घरार नदी पर श्रमदान शुरू किया 13 जून को मजदूरों के अथक परिश्रम से नदी का मलबा हटाते ही उसके जल स्रोत फूट पड़े और 1 दिन के भीतर ही नदी में 3 से 4 फुट पानी भर गया इसकी सूचना जब गांव के ग्रामीणों और आसपास के गांव वालों को मिली तो वह नदी को देखने चले आए और बुंदेलखंड की परंपरा के अनुसार आसपास के गांव वाले श्रमदानीयों के लिए खाद्यान्न लेकर भी आए उन्होंने वहां सांझी रसोई बनाई और सब श्रम दानियों के साथ सहभोज भी किया इस दौरान कीर्तन मंडली ने गीत गाकर और खुशी में नाच कर श्रम दानियों का मनोरंजन करने लगे जबकि खाना बनाते समय और श्रमदान करते समय महिलाएं बुंदेली लोकगीत गाकर श्रमदानीयों का उत्साहवर्धन करती रहे ।17 जून को जल शक्ति मंत्री के मित्र घरार नदी पर आए उन्होंने घरार नदी पर श्रम दान कर रहे 52 प्रवासी मजदूर श्रमदानियों के फोटो ओर वीडियो जल शक्ति मंत्रालय को भेजे इसके बाद केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने वह फोटो और वीडियो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेज दिये ।इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के अवर मुख्य सचिव अविनीश अवस्थी से मन्त्रणा की कि 18 जून को मुख्यमंत्री ने घरार नदी के सभी 52 श्रमदानियों को भागीरथ का नाम देते हुए उनका सम्मान करने की घोषणा की यह खबर जब मीडिया में आई तो बांदा के ग्राम विकास विभाग में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में सीडीओ हरिश्चंद्र वर्मा वीडियो मनोज कुमार ग्राम प्रधान रामनरेश सिंह धरार नदी के तट पर पहुंचे उन्होंने श्रमदानियो को मनरेगा में काम करने पर ₹201 प्रतिदिन देने की बात कही वीडियो ने कहा जब से आप लोगों का श्रमदान चल रहा है तब से वह ₹201 प्रतिदिन के हिसाब से मनरेगा से भुगतान करा देंगे इस पर श्रमदानियों ने कहा कि हमें बेईमानी का पैसा ना चाही साहब इसके बाद वीडियो और ग्राम प्रधान ने जबरिया मनरेगा का बोर्ड घरर नदी के तट पर लगवा दिया इस बोर्ड में तब से मनरेगा का काम शुरू हुआ और कब खत्म होगा इसका कोई जिक्र नहीं है घरार नदी को नाला बताते हुए इसमें अनुमानित खर्च का बजट 78473 रुपए लिखा है लेकिन काम कब शुरू हुआ और कब खत्म होगा यह नहीं लिखा इसके बाद 20 जून को लखनऊ से मुख्य अभियंता के नेतृत्व में जांच दल आया साथ में सीडीओ और वीडियो तथा ग्राम प्रधान भी थे इस दौरान श्रम दानियों ने गंगा की कसम खाकर कहा के घरार नदी हमारे पूर्वजों के सामने से बह रही है पिछले एक दशक से यह नदी सूख गई थी जिसे हम श्रमदानीयों ने पुनर्जीवित किया है इस पर मुख्य अभियंता ने सीडीओ हरिश्चंद्र वर्मा को निर्देश दिया के नाले की जगह घरार नदी को दर्ज किया जाए इसके बाद मनरेगा विभाग की मनमानी से आक्रोशित होकर श्रमदानीयों ने 18 तारीख से ही घरार नदी पर श्रमदान बंद कर दिया और 22 जून से अन्य गांव के प्रवासी मजदूरों को लेकर भाऊ सिंह का पुरवा मैं सूखी पड़ी नहर की खुदाई में श्रमदान शुरू कर दिया इसी तरह ग्राम कठेला पुरवा ग्राम पिपरहरी और ग्राम खमभौरा मैं श्रमदान का कार्य शुरू हो गया इसके बाद ग्राम विकास विभाग से श्रमदान यों को न्याय ना मिलता देख ग्राम भाँवरपुर के श्रमदानियों को न्याय दिलाने के लिए आसपास के आधा दर्जन गांवों के श्रमदान यों ने 29 जून को लखनऊ कूच करने की घोषणा की थी लेकिन थाना अध्यक्ष अतर्रा 28 की रात को ही लगभग 1:30 बजे समाजसेवी राजा भैया को मिलने के लिए बुलाया लेकिन जब राजा भैया ने यह कह दिया कि वह देर रात नहीं मिल सकते तो फिर सुबह 7:00 बजे मिलने की बात तय हुई सुबह 7:00 बजे पुलिस और पीएसी ने राजा भैया के आश्रम को घेर लिया लेकिन वह 6:00 बजे ही पुलिस को चकमा देकर ग्राम पावर पुर पहुंच चुके थे 8:00 बजे सीओ नरैनी के नेतृत्व में कई थानों की शसस्त्र पुलिस और पीएसी ने ग्राम बाबरपुर को कल छावनी में तब्दील कर दिया था। इतना ही नहीं पांच गांवों से प्रवासी मजदूर श्रमदानी मुख्यमंत्री से न्याय मांगने के लिए लखनऊ पूछ के लिए आ रहे थे उन्हें रास्ते में ही पुलिस ने आने से रोक दिया लेकिन इसके बावजूद 52 श्रमदानियों ने हार नहीं मानी उन्होंने महिला श्रमदानियों ललिता प्रजवानी सिया प्यारी शांति प्यारी बाई प्रिंसी चंपा सुनीता रुखिया राजा भाई आदि को की अगुवाई में पुलिस के सामने जमकर नारेबाजी की और कहां की हम घरार नदी के श्रमदानी है हमे न्याय दो 8 बजे से लेकर जब 12 बजे तक नारे बाजी होती रही और समझाने आये सीडीओ और वीडियो से समझौता वार्ता करने से इंकार कर दिया तब जिलाधिकारी बांदा अमित बंसल ने एसडीएम अतर्रा जेपी यादव को वार्ता करने के लिए भेजा एसडीएम ने जब सभी महिला पुरुष प्रवासी मजदूरों की बातें संवेदनशीलता से सुनी और उन्होंने कहा कि आप सब के बयान लिए जाएंगे और इसके बाद 6 तारीख को वह रिपोर्ट जारी करेंगे इस पर समझौता हुआ और प्रवासी मजदूर श्रमदानियों ने 6 जुलाई तक अपना आंदोलन स्थगित करने की घोषणा कर दी एसडीएम ने उनसे यह भी कहा कि यदि उनको न्याय नहीं मिलता तो वह 7 जुलाई से अपनी रणनीति बनाने के लिए स्वतंत्र हैं । इसमें हैरान करने वाली बात यह है की मुख्य विकास अधिकारी ने 20 जून से ग्राम भाँवरवरपुर में मनरेगा के कार्य की स्वीकृति दी है जबकि घर आर नदी में श्रमदान का कार्य बीती 8 जून से ही शुरू हो चुका था जबकि 19 जून को वीडियो मनोज कुमार और ग्राम प्रधान रामनरेश सिंह ने मनरेगा का बोर्ड घरार नदी के तट पर लगवाया था इससे साफ है कि मनरेगा विभाग अपने ही बनाए जाल में खुद ही फंसता नजर आ रहा है ।
विधिक सेवा प्राधिकरण के न्यायिक अधिकारी ने 2 दिन में सीडीओ से ग्राम घरार नदी पर चले श्रमदान की सम्पूर्ण रिपोर्ट मांगी ।
वांदा । जिला वार संघ के पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी जीतूं ने विधिक प्राधिकरण के न्यायिक अधिकारी/ सचिव अभिषेक व्यास को आज प्रार्थना पत्र देकर यह अवगत कराया है की पिछली 8 जून से प्रवासी मजदूर श्रमदानियों ने ग्राम भाँवर पुर में पिछले एक दशक से सूखी पड़ी घरार नदी को श्रमदान करके पुनर्जीवित किया है जबकि 19 जून को मनरेगा विभाग ने नदी के तट पर जबरिया मनरेगा का बोर्ड लगाकर नदी को नाला बताते हुए उसमें हो रहे श्रमदान की बात कही है जबकि इस बोर्ड में काम के प्रारंभ होने और काम के समाप्त होने की कोई तिथि नहीं दी गई है इसमें इस कार्य के लिए अनुमानित बजट ₹78473 जरूर लिखा हुआ है श्री जीतू ने न्यायिक अधिकारी से मांग की है कि श्रमदानियों के कार्य को जबरिया ग्राम विकास विभाग अपना मनरेगा का कार्य बता रहा है । इसमें हैरान करने वाली बात यह है कि सीडीओ हरिश्चंद्र वर्मा ने उस स्थान पर मनरेगा के कार्य की स्वीकृति 20 जून को दी है जबकि वहां घरार नदी पर सैकड़ों लोगों और मीडिया की मौजूदगी में विगत 8 जून से 18 जून तक श्रमदानियों ने नदी को पुनर्जीवित करने के लिए काम किया लेकिन जब उन्होंने देखा की ग्राम विकास विभाग उनके साथ अन्याय कर रहा है तो इससे दुखी होकर 52 श्रमिकों ने मुख्यमंत्री से न्याय पाने के लिए लखनऊ तक पदयात्रा करने की घोषणा कर दी थी उनका कहना है मुख्यमंत्री तो श्रमदानियों का सम्मान करते हुए उन्हें भागीरथ पुरस्कार देने की घोषणा करते हैं जबकि मनरेगा विभाग उनके श्रमदान को ही छीनने की कोशिश कर रहा है इस प्रार्थना पत्र पर न्यायिक अधिकारी अभिषेक व्यास ने घरार नदी पर हुए श्रमदान की रिपोर्ट सीडीओ हरिश्चंद्र वर्मा को 2 दिन में देने के निर्देश दिए हैं मालूम हो कि श्री जीतू भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष भी रह चुके हैं ।