आजतक जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट ना आने से आक्रोशित श्रमदानी मुख्यमंत्री से न्याय मांगने भांवरपुर से लखनऊ तक पैदल मार्च करेंगे

ग्राम विकास विभाग श्रमदान को क्यों नकार रहा है, और घरार नदी को नाला क्यों बता रहा है? इसकी न्यायिक जांच होनी चाहिए
बारसंघ के दो पूर्व और एक वर्तमान अध्यक्ष ने न्यायिक जांच के लिए विधिक प्राधिकरण के न्यायिक अधिकारी से मिले थे और न्यायिक जांच की मांग की थी
दिल्ली, लखनऊ की प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया श्रमदानियों के पैदल मार्च का कवरेज करने आएगी
अनिल शर्मा+संजय श्रीवास्तव+डॉ. राकेश द्विवेदी
भांवरपुर(बाँदा): जिला प्रशासन के तीन सदस्यीय जांच दल ने बीती पांच जुलाई को ग्राम भांवरपुर जाकर श्रमदानियों के द्वारा घरार नदी पर हुए श्रमदान और ग्राम विकास विभाग बाँदा द्वारा उसी के आसपास किये गए मनरेगा के कार्य की भी जांच की थी। तीन सदस्यीय जांच टीम ने सात जुलाई यानी आज जांच रिपोर्ट घोषित करने की बात कही थी। लेकिन जब आज देर शाम तक जांच रिपोर्ट घोषित नहीं कि गयी तो आक्रोशित श्रमदानियों ने समाजसेवी राजा भैया के नेतृत्व में सर पे पीला साफा बांधकर ग्राम भांवरपुर से लखनऊ तक पद यात्रा करने की रणनीति बनानी शुरू कर दी है। चाहे श्रमदानी ललिता हो, रिंची, चंदा, बबिता, राजा बाई, रुक्मिणी, प्रेमा, राम सजीवन, सुख नंदन, नत्थू प्रसाद, अयोध्या सहित 52 श्रमदानी आज देर शाम आँखों मे आंसू लिए बोले कि जब पूरा देश मान चुका है, मीडिया मान चुकी है, जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी यह मान चुके हैं कि 10 जून से 18 जून 2020 तक श्रमदानियों ने घरार नदी को श्रमदान से पुनर्जीवित किया है। तो ग्राम विकास विभाग बाँदा हमारे श्रमदान को क्यों नकार रहा है? वो हमारी प्राचीन नदी घरार को नाला बनाने ने क्यों तुला हुआ है? जांच दल के सामने ही बीती पांच जुलाई को नव भारत टाइम्स के बुन्देलखण्ड प्रभारी अशोक निगम, मुक्ति चक्र पत्रिका दिल्ली के संपादक गोपाल गोयल, यंग भारत की टीम तथा तमाम इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया के पत्रकारों के सामने ग्राम विकास विभाग के जे.ई शिव शरण ने ये स्वीकार किया था कि घरार के तट पर श्रमदान 22 जून से शुरू हुआ था। और मनरेगा का सिर्फ 1600रु का काम हुआ है। ये तभी साफ हो गया था कि 10 जून से 18 जून तक घरार नदी पर श्रमदानियों ने ही श्रमदान किया है। श्रमदानियों और समाजसेवी राजा भैया ने बताया कि ग्राम विकास विभाग की इन्ही करतूतों को लेकर पिछले दिनों बाँदा जिला बार के पूर्व अध्यक्ष आनंद सिन्हा, पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी जीतू, वर्तमान अध्यक्ष अवधेश गुप्ता खादी ने विधिक प्राधिकरण के न्यायिक अधिकारी अभिषेक व्यास को प्रार्थना पत्र देकर। यह मांग की थी कि ग्राम विकास विभाग बाँदा की मनमानियों को देखते हुए घरार नदी पर 10 जून से 18 जून तक हुए श्रमदान की न्यायिक जांच करानी चाहिए। ताकि दूध का दूध और पानी का पानी सामने आ जाये। श्रमदानियों ने एक स्वर में कहा अब हमें ग्राम विकास विभाग से न्याय मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। इसलिए वो जिला जज से अनुरोध करते हैं कि इस मामले स्वतः संज्ञान लेकर शीघ्र से शीघ्र न्यायिक जांच कराएं। इस दौरान श्रमदानियों ने कहा कि वो न्याय मांगने के लिए ग्राम भांवरपुर से लखनऊ तक पद यात्रा करने की आज रात रणनीति बनायेंगे। इसके बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिन्होंने हमारे श्रमदान से खुश होकर हमे भागीरथ पुरुस्कार देने की घोषणा की थी। पड़ यात्रा कर हम उन्ही से न्याय मांगने जाएँगे। उधर मीडिया क्षेत्र में यह चर्चा जोरों पर है कि 8 या 9 जुलाई को ये 52 महिला पुरूष श्रमदानी पैदल न्याय मार्च पर निकलेंगे। तो जिले के तमाम श्रमदानी इनके मार्च में शामिल होकर इन्हें समर्थन देंगे।दिल्ली और लखनऊ की प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया श्रमदानियों के इस पैदल न्याय मार्च को कवर करने के लिए आ रहा है।