आठ पुलिस जन शहीद-यंग भारत विशेष

अपने साथियों के हत्यारों को भूखे शेरों की तरह खोज रही है पुलिस
आक्रामक हुए पुलिस दल ‘खून का बदला खून’ का ऐलान कर रहे हैं
विकास दुबे सहित सभी फरार हत्यारों का एनकाउंटर करने की रणनीति के साथ चप्पे-चप्पे को खंगाल रही है पुलिस
आतंक के बल पर विकास दुबे ने अर्जित की है अकूत संपत्ति
संजय श्रीवास्तव-प्रधानसम्पादक
बिकरु(कानपुर): बीती रात कानपुर नगर के थाना चौबेपुर क्षेत्र के ग्राम बिकरु में दुर्दांत हिस्ट्री शीटर विकास दुबे के घर दबिश देने गए पुलिस दल को गोलियों से छलनी करके सीओ और 02 एसओ सहित आठ पुलिस जनों को शहीद करके फरार हो जाने की अत्यंत सनसनी खेज घटना के बाद पूरा इलाका पुलिस की छावनी बन गया है। और हत्यारों के विरुद्ध आक्रोशित पुलिस बेहद आक्रामक हो उठी है।
मुख्यमंत्री के कड़े आदेशों के चलते डीजीपी ने हत्यारे गिरोह का उन्मूलन करने के इरादे से बेहद सटीक और गोपनीय रणनीति अपने विश्वसनीय आला अधिकारियों के साथ मिलकर बनाई है। जिसके तहत विकास दुबे के अधिकांश रिश्तेदार और खास लोगों को उठा लिया है और उनसे गहरी पूछताछ कर रही है। वहीं छठे हुए पुलिस के जांबाज अधिकारियों और कर्मचारियों की टीमें अलग-अलग दस्तों में बटकर शिकारियों की तरह अपने शिकारों को जी जान से खोजने में जुटी हैं। तथा ‘खून का बदला खून’ का ऐलान करते हुए हत्यारों की तलाश कर रही हैं।
उल्लेखनीय है कि अपने शिक्षा काल मे प्रतिभाशाली स्टूडेंट रहा विकास दुबे सन 2001 में शिवली थाना परिसर में घुसकर भाजपा के राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त संतोष शुक्ला की दिन दहाड़े गोलियों से छलनी करके हत्या कर देने के मामले के बाद जरायम की दुनिया मे एक बहुत डरावना किरदार बनकर उभरा था। उसके बाद तो विकास दुबे ने इलाके में चारों तरफ वारदातों की झड़ी लगा दी। इस समय उसके विरुद्ध 60 आपराधिक मामले पंजिकृत हैं। इसी बीच उसके आतंक के चलते गवाहों के पक्ष द्रोही हो जाने के कारण विकास दुबे संतोष शुक्ला की हत्या में कोर्ट द्वारा बरी कर दिया गया था। तभी से उसने सीधे-सीधे अपराधों को अंजाम देना बंद करके मठाधीशी शुरी कर दी। तथा अपने दबदबे के चलते दूर-दूर तक के इलाकों की पंचायतें निपटाने लगा। उसकी बात ना मानने का साहस किसी मे नहीं था। हिस्ट्री शीटर विकास दुबे अब तमाम यंत्र खरीदकर बड़े स्तर की ठेकेदारी भी करने लगा। जिससे उसके पास धन की कोई कमी ना रही। यही नहीं पास के औद्योगिक क्षेत्र और अन्य व्यापारियों से वह नियमित रंग दारी भी वसूल करता था। जिससे उसका खजाना दिन दूना रात चौगुना बढ़ता गया। पिछले पांच वर्षों से विकास दुबे ने अपने हाथों से किसी सनसनी खेज वारदात को अंजाम भी नहीं दिया। मगर उसके विरुद्ध तीन दिन पूर्व दर्ज हुई 307 की एक एफआईआर के चलते सीओ बिल्हौर के नेतृत्व में भारी पुलिस दल उसे गिरफ्तार करने हेतु बीती रात जब उसके घर पहुंचा तो उसके पहले ही विकास दुबे को पुलिस आने की सूचना मिल चुकी थी। अचानक इस खूंखार अपराधी के अंदर का शैतान जाग गया और उसने आनन-फानन में अपने दुर्दांत साथी और ऑटोमेटिक हथियार आदि की व्यवस्था कर ली। तथा अपने घर के रास्ते के आगे अपनी जेसीबी लगाकर पुलिस के लिए पैदल आने की मजबूरी पैदा कर दी। यह उसकी आपराधिक बुद्धि की रणनीतिक चाल थी। अपने कर्तव्य का पालन करता हुआ पुलिस दल जब पैदल उतरकर उसके घर की ओर बढ़ने लगा तो छत पर मोर्चाबंदी किये विकास और उसके गिरोह ने सादा और ऑटोमेटिक हथियारों से निशाना लगाकर गोलियां दागना शुरू कर दीं। अचानक हुई ताबड़तोड़ गोली बारी से आधी रात के वक्त पुलिस मौत के फंदे में फंस गई। जिसके चलते आठ पुलिस जन शहीद हो गए। जबकि 06 बुरी तरह जख्मी होकर गिर पड़े। इन्ही के साथ एक ग्रामीण को भी गोली लगी है। रीजेंसी अस्पताल में भर्ती इनमे से कुछ की हालत नाजुक बताई जा रही है। एसटीएफ और एटीएस सहित प्रदेश के सारे जांबाज पुलिस दल ऑपेरशन में लगे हुए हैं। क्योंकि यह घटना इतनी विकराल है कि जिसने भाजपा सरकार की चूल्हे हिला दी हैं। तथा यह अब तेज तर्रार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नाक का सवाल बन गया है। यही वजह है कि डीजीपी और अन्य आला पुलिस अफसर अपराधियों की खोज में लगी पुलिस टीमों से विकास दुबे की लाश मांग रहे हैं।
संजय श्रीवास्तव-प्रधानसम्पादक एवम स्वत्वाधिकारी, अनिल शर्मा- निदेशक, डॉ. राकेश द्विवेदी- सम्पादक, शिवम श्रीवास्तव- जी.एम.
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