आतंक का पर्याय बना विकास पंडित छका रहा है प्रदेश की पुलिस को

सौ घंटे बीते पुलिस के हांथ रीते
एक्शन सुपरस्टार सनी देओल के बड़े फैन विकास ने स्वयं रखा था अपना नाम “विकास पंडित”
फ़िल्म अर्जुन पंडित में शरीफ से बदमाश बने थे सनी देओल
विकास के सरेंडर करने की चर्चाओं से यूपी पुलिस हलाकान
प्रदेश के मोस्ट वांटेड की सूची में तीसरे पायदान पर आ गया विकास पंडित
पुलिस अफसरों की वर्दी पर भी हैं खून के छींटे
विकास के गांव में आज भी पसरा है पुलिस के संहार का सन्नाटा
अनिल शर्मा+संजय श्रीवास्तव+डॉ. राकेश द्विवेदी
कानपुर: पुलिस दल के साथ अभूतपूर्व नरसंहार की घटना को अंजाम देने वाला ना सिर्फ विकास पंडित बल्कि उसका गिरोह भी ऐसे गायब हो गया है जैसे गधे के सिर से सींग।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उसकी गिरफ्तारी के अत्यंत कड़े आदेशों के चलते जहां प्रदेश के डीजीपी को रात-रात भर नींद नहीं आ रही है। एवम एसटीएफ सहित पुलिस के जांबाज अफसरों और भारी भरकम पुलिस दल का जहां खाना-सोना और चैन तक दूभर हो गया है। क्योंकि बर्बर घटना के सौ घंटे बीत जाने के बावजूद इन हत्यारों को पकड़ने में अथवा उनका सुराग ही लगा पाने में अबतक पुलिस पूरी तरह नाकाम। यही कारण है कि बड़े-बड़े मारते खां पुलिस अफसरों के माथे पर पड़े बल बढ़ते ही जा रहे हैं। आतंक और रहस्य की परतों में लिपटे आपरेशन विकास के चलते पुलिस को कभी उसके उन्नाव की कोर्ट में सरेंडर करने की सूचना मिलती है, कभी मध्यप्रदेश अथवा हरयाणा। अब ताजा सूचना दिल्ली के कोर्ट में दुर्दांत हत्यारे के आत्म समर्पण की संभावना की चर्चायें हैं।
मालूम हो कि पुलिस कभी इस कोर्ट में अपना जाल बिछाती है तो कभी उस कोर्ट में अपना जाल बिछाती है। ताजा सूचना ने पुलिस की समस्या को और ज़्यादा इस कारण बढ़ा दिया है कि दिल्ली में बहुत सारी कोर्ट हैं। उनमें पुलिस का जाल बिछाना असंभव तो नहीं मगर बेहद मुश्किल काम है। और बहुत सम्भव है कि विकास से पुलिस का आमना सामना होते ही दोनों ओर से गोली चल जाएगी। ऐसे में कुछ और निर्दोषों के बीच मे फंसकर मारे जाने की आशंका भी है। क्योंकि खूंखार विकास पंडित अपनी जान बचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। पुलिस यह सच्चाई भी जानती है मगर उसके जिंदा या मुर्दा पकड़ने का बेहद कठिन लक्ष्य पुलिस के सिर पर है।

यहां विकास के गांव बिकरु में जहां हज़ारों की आबादी है पुलिस ने एक-एक घर को खंगाल डाला है। जहां पुलिस को कुछ हथियार भी मिले हैं और कुछ खतरनाक बम भी। ऐसे में माना जा रहा है कि विकास के समर्थक उसके गांव में बड़ी तादाद में हैं। एक बात और उजागर हुई है कि विकास के ध्वस्त हो चुके विशाल काय घर मे जगह जगह पर सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे। जिनका सीधा प्रसारण लखनऊ स्थित विकास दुबे के कृष्णा नगर के निवास में होता था। जहां से उसकी पत्नी सारी स्थिति देखकर विकास अथवा अन्य संबंधित लोगों को इन्हें वायरल किया करती थी। कहने का मतलब यह कि फरार चल रही विकास दुबे की पत्नी भी विकास के आपराधिक कार्य में भूमिका निभाती थी। हालांकि यह सब तो तब उजागर हो पायेगा जब पुलिस विकास और उसके गिरोह को जिंदा दबोच लेगी। विकास के उन्मूलन का यह एपिसोड अभी जारी है। मगर दूसरी ओर पुलिस विभाग में ही आपस मे आरोप और प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। जिसके चलते शहीद हो चुके सीओ देवेंद्र शर्मा द्वारा तत्कालीन एसएसपी अनंत देव त्रिपाठी को लिखा गया वह गोपनीय पत्र भी वायरल हो चुका है। जिसमे सीओ बिल्हौर ने चौबेपुर के निलंबित एसओ के विकास दुबे के साथ घनिष्ठ रिश्ते होने, अपराध कर्म में उसका सहयोग करने का आरोप लगाते हुए पूर्व एसएसपी से एसओ चौबेपुर के पद से विनय तिवारी को अविलंब हटाये जाने की संस्तुति की थी। और फोन पर भी उन्हें यह सारी असलियत बताई थी। तबके एसएसपी अनंत देव ने विनय तिवारी को कॉन्फ्रेंस में लेकर सीओ की बात ना मानने के कारण कड़ी फटकार तो लगाई थी। मगर विनय तिवारी के प्रति अनंत देव का लगाव कुछ ज़्यादा था। अथवा कोई अन्य कारण की इतना सब सर्कल ऑफिसर के रिपोर्ट करने के बाद भी विनय तिवारी को थाना चौबेपुर से हटाया नहीं गया था। इस कारण पूर्व एसओ चौबेपुर ने अब शहीद हो चुके सीओ बिल्हौर को ठेंगे पर कर दिया था। और वह उनके करंट अफसर होने के बावजूद भी उनकी कोई बात नहीं सुनता था। ना ही उनके आदेशों का पालन करता था। तथा ना कि किसी को पकड़ने अथवा छोड़ने में सीओ साहब का आदेश लेने अथवा उन्हें सूचना देने की ज़रूरत समझता था। जबकि वह हर बात तत्कालीन एसएसपी अनंत देव त्रिपाठी को सीधा बताया करता था। ये सारे तथ्य टेलिफोनिक बातचीत एवम सीओ द्वारा किये गए पत्राचार के वायरल हो जाने के कारण अब सर्व विदित हो चुके हैं। स्थानीय स्तर पर पुलिस विभाग में दांय मची हुई है। और यह मामला तब और बिगड़ जाता है जब वर्तमान में एसटीएफ के डीआईजी बन चुके अनंत देव त्रिपाठी जांच के लिए कानपुर आते हैं। शहीद सीओ की पुत्री और परिजनों ने तो अब अनंत देव त्रिपाठी पर कानपुर में एसएसपी रहते हुए सीओ देवेंद्र मिश्रा की उपेक्षा करने और विकास दुबे के कृपापात्र चौबेपुर के एसओ रहे विनय तिवारी को सबकुछ जानने के बावजूद संरक्षण देने का खुला आरोप लगा रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि दबिश जाने से पहले की एक एक सूचना विनय तिवारी और उनके खास सिपाहियों के द्वारा फ़ोन के माध्यम से दुर्दांत दुबे तक पहुंचाई जा रही थी। जिसे सुनकर वह खूनी दरिंदा आग बबूला होकर अपने गिरोह और ऑटोमेटिक हथियारों के साथ पुलिस पार्टी को कफ़न उड़ा देने के एलान आधी रात में अपनी छत पर चढ़कर लगातार कर रहा था। अब तो यह समय के गर्भ में है कि पुलिस को विकास दुबे उर्फ विकास पंडित जिंदा हाथ आता है अथवा मुर्दा। या कहीं राज्य मंत्री संतोष शुक्ला की शिवली थाने में हत्या का मुख्य आरोपी होने के बावजूद बरी होकर जेल से फूल मालाओं के साथ आता है।