आम आदमी पार्टी उप्र में पंचायत चुनाव में खड़ा करेगी पूरे प्रदेश में संगठन

वर्ष 2022 में उप्र का विधानसभा चुनाव लड़ेगी
आप के पास है गरीबों के लिए बिजली पानी का अचूक फार्मूला
अनिल शर्मा़+संजय श्रीवास्तव़+डा0 राकेश द्विवेदी

दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) के संस्थापक अध्यक्ष और दिल्ली प्रदेश के रिकार्ड तीसरी बार मुख्यमंत्री बने अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने दिल्ली में गोपनीय बैठक में यह निर्णय लिया है कि वह उप्र के आगामी पंचायत चुनाव में अपने पार्टी के प्रत्याशी खड़ा करेंगे। इसके बाद उनकी पार्टी को उनकी रणनीति के अनुसार सफलता मिलती है तो वह उप्र के आगामी 2022 के विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत के साथ उतरेगी।
मालूम हो कि आम आदमी पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल एक आइआरएस अधिकारी रहे हैं। उन्होंने नौकरी से इस्तीफा देकर सूचना के अधिकार को कानून बनाने के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया। इसके लिए उन्हें रमन मैग्सेसे पुरस्कार 2006 में मिला। उसके बाद वे अपने गुरू अन्ना हजारे के साथ रामलीला मैदान में लोकपाल बिल के लिए अनशन पर बैठे। उन्होंने अपने मित्रों के साथ मिलकर आम आदमी पार्टी यानि “आप” का गठन किया। जिसका चुनाव चिन्ह झाड़ू है।
2013 में पहली बार उन्होंने दिल्ली प्रदेश में विधानसभा चुनाव लड़ा। वे दिल्ली विधानसभा की 70 सीटों में से 28 सीटें जीतने में सफल रहे। लेकिन उनकी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। इस चुनाव की विशेष बात यह थी कि केजरीवाल ने नई दिल्ली विधानसभा सीट से कांग्रेस की वरिष्ठ नेता शीला दीक्षित जो दिल्ली की पिछले 15 साल से मुख्यमंत्री थीं, उन्हें पराजित किया था। इसके बाद कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी को समर्थन दिया तो केजरीवाल ने मुख्यमंत्री के तौर पर 26 दिसम्बर 2013 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। लेकिन जल्द ही कांग्रेस के साथ आम आदमी पार्टी के मतभेद हो गए और केजरीवाल सरकार ने 49 दिन बाद 14 फरवरी 2014 को इस्तीफा दे दिया। इन 49 दिनों के दौरान केजरीवाल सरकार ने गरीबों को 200 यूनिट तक फ्री बिजली तथा गरीबों को मुफ्त पानी देने की जो योजना बनाई थी। उसका गरीबों पर ऐसा असर हुआ कि 2015 के विधानसभा चुनाव में केजरीवाल की आप पार्टी ने विधानसभा की कुल 70 सीटों में से 67 सीटें जीतकर एक नया इतिहास रच दिया।
इसके बाद इस वर्ष 2020 में दिल्ली विधानसभा के चुनाव में भाजपा की केन्द्र सरकार और भाजपा के कई प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों तथा राजग के सहयोगी दलों ने इस चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी। इसके बाद भी आप को 70 में से 62 सीटें जीतकर यह साबित कर दिया कि दिल्ली प्रदेश की जनता में वे आज भी लोकप्रिय हैं। गरीबों की लिए बिजली, पानी तथा बेहतर शिक्षा की अपनी सफल योजना के सहारे वे उप्र प्रदेश में 2020 के नवंबर दिसम्बर में होने वाले पंचायत चुनाव में इसी फार्मूले के साथ उतरने वाले हैं। इस चुनाव के माध्यम से आम आदमी पार्टी उप्र में अपना मजबूत संगठन खड़ा करेगी। इसके बाद वे पूरी ताकत से 2022 में उप्र में होने वाले विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी आप के साथ उतरेंगे। जिस तरह से दिल्ली में अपनी योजनाओं के बल पर केजरीवाल और उनकी सरकार गरीबों का दिल जीतने में सफल रही है। उसी आधार पर आम आदमी पार्टी 2022 के उप्र विधानसभा चुनाव में जब उतरेगी तो वह जातीय समीकरण के आधार पर नहीं, बल्कि गरीबों को फ्री बिजली, पानी और बेहतर शिक्षा को आधार बनाकर ही चुनाव लड़ेगी। यह भी बताएगी कि “आप” ने अपने काम के बल पर कैसे उसने दिल्ली में लगातार तीसरी बार जीत हासिल की है। आम आदमी पार्टी यदि उप्र में चुनाव लड़ती है तो भाजपा के साथ साथ सपा बसपा और कांग्रेस के लिए भी कड़ी चुनौती पेश करेगी।