आरपीएफ की मिली भगत से बालू माफियाओं की चांदी

आरपीएफ को ‘सेट’ करके बालू माफिया बेखौफ
रेलवे को हो रहा है लाखों रुपए राजस्व का नुकसान
शराब की दुकान के लिए रेलवे की दीवार तोड़कर बना लिया गया अवैध रास्ता
अनिल शर्मा़+संजय श्रीवास्तव़+बृज मोहन निरंजन

उरई। आरपीएफ की मिली भगत से बालू माफिया रेलवे की जमीन में अवैध ढंग से बालू और गिट्टी का कार्य कर रहे हैं। उधर रेलवे की दीवार तोड़ भी दी गई है और अवैध रास्ता बना दिया गया है। ताकि शराबियों को शराब की दुकान पर आने जाने में दिक्कत न हो।
मालूम हो कि रेलवे स्टेशन उरई के माल गोदाम से लेकर बेरी वाले बाबा से आगे राठ रोड के पुल तक रेलवे जमीन है। जिसमें काफी दिनों से रेलवे सुरक्षा बल और बालू माफियाओं की मिली भगत से रेलवे की जमीन में पूरे क्षेत्र में अवैध ढंग से बालू डंप की गई है। इनके पास ही गिट्टी के भी ढेर लगाए गए हैं। यहां बालू माफिया ट्रैक्टरों और ट्रालियों के माध्यम से ढड़ल्ले से लोगों को बालू गिट्टी बेच रहे हैं। यह अवैध व्यापार रेलवे की जमीन में खुलेआम होता है। लेकिन आरपीएफ इससे इसलिए आंखें मूंदे है क्योंकि इसमें मोटी कमाई होती है।
इस बारे में जब रेलवे इंजीनियरिंग विभाग के सीनियर सेक्शन इंजीनियर वक्र्स एके गुप्ता से जब यंग भारत ने बात की, तो श्री गुप्ता ने बताया कि रेलवे विभाग ने रेलवे की जमीन पर बालू और गिट्टी का अवैध ढंग से डंप करके उसका अवैधानिक व्यापार करने वालों को कई बार नोटिस दिया है। इसे हटाने का अभियान भी चला चुके हैं लेकिन जैसे किसी तालाब में काई हो जाए और उस पर ढेला फेंकने पर काई थोड़ी देर के लिए हट जाती है। उसी तरह नोटिस मिलने और अभियान के वक्त ये बालू माफिया कुछ घंटों के लिए बालू और गिट्टी के ढेर हटा देते हैं। लेकिन आरपीएफ की मिली भगत से कुछ घंटे बाद ही बालू माफिया अपना यह व्यापार फिर चालू कर देते हैं।
इस संबंध में उरई रेेलवे स्टेशन के अधीक्षक एपी वर्मा ने यंग भारत को बताया कि रेलवे की जमीन पर अवैधानिक ढंग से बालू और गिट्टी का व्यापार करने वाले बालू माफियाओं की शिकायत वे झांसी मण्डल के रेलवे अधिकारियों से भी कर चुके हैं। श्री वर्मा ने यह भी बताया कि इन बालू माफियाओं के इशारे पर कई दुकानदारों ने रेलवे की दीवार तोड़कर अवैध रास्ता बना लिया है।
मजेदार बात यह कि रेलवे की जमीन में अवैध ढंग से दीवार तोड़कर शराब के एक ठेकेदार ने भी अवैधानिक ढंग से एक रास्ता बनाई है, ताकि शराबियों को उसके देषी शराब के ठेके में आने में कोई परेषानी न हो। यह बात दूसरी है कि कई शराबी शराब पीकर मोहल्ले में बवाल करते हैं लेकिन कमीशन के चक्कर में आरपीएफ (रेलवे सुरक्षा बल) मौन लगाए बैठी रहती है। इससे रेलवे कर्मचारियों उनके कर्मचारियों, उनके परिवारीजनों तथा आम लोगों को सड़क पर लगे बालू और गिट्टी के ढेरों के कारण आने जाने में काफी परेशानी होती है।