आरोपी रखता है आर.टी.आई माफिया बनने की चाहत

आर.टी.आई एक्टिविस्ट अरुण तिवारी पर है भयादोहन, बंधक बनाने, जान से मारने का आरोप
बिना एन.ओ.सी. की दिल्ली की ट्रेवल एजेंसी की टैक्सी परमिट की कार से ठाट से चलता है अरुण तिवारी
राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के अध्यक्ष का बोर्ड कार में लगा है, जो नीले और लाल रंग से पुता है, जो रंग पुलिस विभाग का प्रतीक है
नियम के अनुसार टैक्सी परमिट वाले वाहन को पीले और काले निर्धारित रंग पर पुतना चाहिए, जबकि अरुण तिवारी की कार का रंग झक सफेद है
हाई कोर्ट ने नाम या संगठन के नाम के बोर्ड वाहन में लगाने पर लगाई है पाबंदी
इंजीनियर पंकज शर्मा का आरोप है कि भयादोहन करने वाला आर.टी.आई. का माफिया बनकर लोगों को डराता है
25 से 30 गुर्गों की है इसकी टीम
बुंदेलखंड के अधिकांश सरकारी विभागों, और प्राइवेट कंपनियों के खिलाफ 300 से अधिक की हैं आर.टी.आई
167 से अधिक अपीलें लखनऊ की विभिन्न राज्य सूचना आयुक्तों की कोर्टों में हैं लंबित
इन्हीं आरोपों में जेल में बंद है अरुण तिवारी
अनिल शर्मा+संजय श्रीवास्तव+डॉ. राकेश द्विवेदी
लखनऊ+उरई: आर.टी.आई. एक्टिविस्ट अरुण तिवारी भयादोहन, बंधक बनाकर जान से मारने एवम सरकारी कार्य में बाधा के आरोपों में इन दिनों जेल में बंद है।
उसके जलवे और रौब निराले हैं। जेल जाने से पूर्व अरुण तिवारी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से मिलते जुलते नाम का एक राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन बनाया हुआ है। जिसके वह स्वयं राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। वह जिस कार पर चलता है वह दिल्ली की एक ट्रेवल्स एजेंसी के नाम है। इस इंडिगो ecs कार का नंबर DL-1N-6671 है। जिसका दिल्ली की लाइफलाइन ट्रेवल्स ऐजेंसी के नाम पर रजिस्ट्रेशन है। इस ट्रेवल्स कंपनी का पता 213, शिवम प्लाजा-प्लाट नंबर-3 सेक्टर-6 द्वारका दिल्ली है। आर.टी.ओ. विभाग का कानून है कि कोई भी वाहन यदि खरीदा गया है। और वह दूसरे जिले या दूसरे राज्य का है तो वाहन खरीदने वाले को एक वर्ष के भीतर एन.ओ.सी.(नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) बनवा लेना चाहिए। लेकिन यह कार चूंकि अभी भी दिल्ली में टैक्सी परमिट के रूप में पंजीकृत है। और अभी एन.ओ.सी. नहीं लिया गया है तो इसका रंग टैक्सी के रंग पीले और काले रंग में होना चाहिए। जबकि अरुण तिवारी की कार का रंग झक सफेद है। सी.ओ. कोंच राजीव प्रताप सिंह से जब द यंग भारत ने सवाल किया तो उन्होंने कहा कि अरुण तिवारी अपनी बिना एन.ओ.सी. की सफेद कार में जिसके आगे बोर्ड लगा है। जिसमे लिखा है अध्यक्ष राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन। इस बारे में सी.ओ. कोंच श्री सिंह का कहना है कि कोई भी व्यक्ति ऐसे राष्ट्रीय संगठनों जैसे मानवाधिकार आयोग से मिलता जुलता नाम नियम और नैतिकता के आधार पर नहीं रखना चाहिए। उन्होंने कहा अरुण तिवारी ने रजिस्ट्रार के यहां से इस नाम के संगठन का रेजिस्ट्रेशन करा लिया होगा। लेकिन नैतिक रूप से ऐसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से मिलते जुलते नाम लिखना गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि हाई कोर्ट ने किसी भी वाहन में नेम प्लेट या बोर्ड लगाने की मनाही कर दी है। उन्होंने कहा चूंकि मानवधिकार आयोग इस देश का सरकारी प्रतिष्ठापूर्ण आयोग है। इसमें रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट के जज और रिटायर्ड हाई कोर्ट के जज केंद्र और राज्य के चेयरमैन होते हैं। इसलिए ऐसे सम्मानीय आयोग से मिलते जुलते नाम किसी गैर सरकारी संगठन को ऐसे नाम नैतिकता के आधार पर नहीं रखने चाहिए। उन्होंने कहा कि आरोपी अरुण तिवारी की कार चूंकि दिल्ली में टैक्सी परमिट में है। तो उसे निजी वाहन के रूप में चलाने का हक नहीं है।
उधर एट थाने में राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के अध्यक्ष अरुण तिवारी के विरुद्ध एफ.आई.आर. लिखाने वाले गावड़ कंस्ट्रक्शन लिमिटेड के इंजीनियर पंकज शर्मा जो बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का कार्य करा रहे हैं। श्री शर्मा ने कहा कि यह प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ड्रीम प्रोजेक्ट है। इस निर्माण कार्य में आर.टी.आई. एक्टिविस्ट ग्राम नरछा थाना एट निवासी अरुण तिवारी ने अपने गुर्गों के साथ बीती 30 मई 2020 को न सिर्फ अड़ंगा लगाया। बल्कि उन्हें और उनके कर्मचारियों को जो बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के किलोमीटर 174 पर कार्य करवा रहे थे। न सिर्फ कार्य में बाधा पहुंचाई बल्कि उन्हें और उनके कर्मचारियों को बंधक बनाकर जान से मारने की धमकी भी दी। इस दौरान उनकी कंपनी के तमाम कर्मचारी और लेबर मौजूद थे। अरुण तिवारी और उनके गुर्गे गाली गलौज कर रहे थे।उनके बंधक बनाने और जान से मारने की धमकी से वे और उनके कर्मचारी अंदर से भयभीत हो गए हैं। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का कार्य शीघ्र पूरा हो। इसके लिए वे जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और जालौन जिले की जनता से भी सहयोग चाहते हैं। क्योंकि बुलदेलखंड एक्सप्रेसवे बनना उनके हित में है। इंजीनियर श्री शर्मा ने कहा कि आर.टी.आई. एक्टिविस्ट अरुण तिवारी दरअसल आर.टी.आई. माफिया बनने की कोशिश में लगा है। वो अबतक बुंदेलखंड के सभी जनपदों के अधिकांश सरकारी विभागों और प्राइवेट कंपनियों में जिनमे पी.डब्ल्यू.डी, बेसिक माध्यमिक शिक्षा विभाग, बेतवा सिचाई प्रखंड प्रथम व द्वितीय, खनिज विभाग जनपद जालौन,बाँदा,हमीरपुर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी जनपद जालौन, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत जनपद जालौन, अधिशासी अभियंता विद्युत विभाग प्रथम खंड, नगरपालिका उरई समेत पूरे बुंदेलखंड के अधिकांश विभागों के खिलाफ 300 से अधिक आर.टी.आई लगा चुका है।
जबकि लखनऊ स्थित सूचना आयुक्तों के कोर्टों में 167 अपीलें हैं। जिनमे सुनवाई हो रही है। श्री शर्मा ने कहा कि इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि अरुण तिवारी और उसके गुर्गे सरकारी विभागों और गैर सरकारी कंपनियों को किस तरह दबाव में लेकर भयादोहन का कार्य करते हैं। क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में आर.टी.आई यदि वास्तव में जनता के फायदे के लिए लगाई होती तो जिले और बुंदेलखंड का विकास दिखाई देने लगता। मालूम हो कि आरोपी राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन का अध्यक्ष इन दिनों जेल में है।
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