उमा भारती क्या फिरसे मप्र की मुख्यमंत्री बनना चाहती हैं?

वे मप्र की मुख्यमंत्री और दोबार केन्द्रीय मंत्री रह चुकी हैं
संकल्प यात्रा के माध्यम से तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सरकार को उखाड़ फेकने का श्रेय उन्हें प्राप्त है
बड़ा मलहरा विधान सभा सीट से उनके चुनाव लड़ने की चर्चा जोरों पर

अनिल शर्मा+संजय श्रीवास्तव+डॉ. राकेश द्विवेदी

भोपाल। भाजपा की फायरब्रांड नेता पूर्व केन्द्रीय मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के एक बार फिर से सक्रिय राजनीति में आने की चर्चा इन दिनों जोरों पर है। पिछले दिनों से सोशल मीडिया पर यह चर्चा जोरांे पर है कि मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री छतरपुर की बड़ा मलहरा विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़कर मप्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए एकबार फिर से मन बना रहीं हैं।
याद रहे उन्होंने करीबी लोधी बिरादरी के नेता तथा बड़ा मलहरा विधानसभा सीट के विधायक प्रद्युम्न लोधी को कांग्रेस से इस्तीफा दिलवाकर पिछले दिनों भाजपा में शामिल कराया है। इसके बाद मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह पर दवाब बनाकर उन्हें खाद्य एवं आपूर्ति निगम का चेयरमैन बनवाया है तथा केबिनेट मंत्री का दर्जा भी दिलवाया है। इसके कारण बड़ा मलहरा विधानसभा सीट भी खाली हो गई है। मप्र में जहां अभी तक विधानसभा की 24 सीटों पर चुनाव होने थे, उसमें यह पच्चीसवीं सीट बड़ा मलहरा भी जुड़ गई है। इसकी संभावना जताई जा रही है कि उमा भारती अपनी परंपरागत विधानसभा सीट बड़ा मलहरा से उपचुनाव लड़ सकतीं हैं। जहां से वे चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री पद की दावेदार भी बन सकती हैं।
मालूम हो कि 6 मई 1959 का डूंग गांव में जन्मी उमा भारती बचपन से ही भागवत और रामकथा कहने लगी थीं। राजमाता विजया राजे सिंधिया की उन पर नजर पड़ी। 1984 में राजमाता ने उन्हें खजुराहो से चुनाव लड़ाया जहां वे हार गईं। इसके बाद 1989 में खजुराहो सीट से सांसद बनी। इसके बाद वे राम मंदिर आंदोलन से जुड़ गईं। 2002 में भोपाल से सांसद बनी और अटल बिहारी बाजपेयी की कैबिनट में मंत्री बनी। इसके बाद उन्होंने मप्र में 2002 में संकल्प यात्रा निकाली और इससे पूरे प्रदेष में तत्कालीन कांग्रेस के मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को मिस्टर बंटाधार का नाम देकर, मप्र को एक नया नारा दिया ‘बिपासा‘ बिजली, पानी सड़क। इसी दौरान प्रदेष की हर विधानसभा का दौरा किया। जनता से कहा आप हमें बहुमत दो, हम आपको बिजली, पानी, सड़क के साथ एक मजबूत और साफ सुथरी व्यवस्था देंगे। अगले चुनाव में उन्होंने 230 में से 173 सीटें जीतकर भारी बहुमत प्राप्त किया, जबकि कांग्रेस को केवल 38 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। लेकिन मुख्यमंत्री के रूप में उनके जीवन में नाटकीय मोड़ तब आया जब 1995 में हजारों लोगों के साथ कर्नाटक के हुगली में विवादित ईदगाह पर उन्होंने तिरंगा यात्रा निकाली। जिसमें उनके खिलाफ कोर्ट से गैर जमानती वारंट जारी हुआ और इसके चलते उन्हें वर्ष 2004 में मप्र के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।
फायरब्रांड नेता उमा भारती उप्र और मप्र के बुंदेलखण्ड क्षेत्र की लेाधी बिरादरी में सबसे लोकप्रिय नेता मानी जाती हैं। मप्र में उनका शासन और उनके किए गए जनहित के काम आज भी याद किए जाते हैं। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा में हिंदुत्व का एक बड़ा चेहरा मानी जाती हैं। इस नाते यह चर्चा जोरों पर है कि यदि वे बड़ा मलहरा विधानसभा सीट से चुनाव जीतती हैं तो इसे उनकी मप्र की राजनीति में एकबार फिरसे सक्रिय होकर मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल होने की एक नई पारी मानी जाएगी।

संजय श्रीवास्तव-प्रधानसम्पादक एवम स्वत्वाधिकारी, अनिल शर्मा- निदेशक, डॉ. राकेश द्विवेदी- सम्पादक, शिवम श्रीवास्तव- जी.एम.

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