उरई के पुलिस विभाग में एक गंदे अध्याय का अंत, यंग भारत की खबर का असर…

कड़क और तेज तर्रार एसपी डॉ. यशवीर सिंह।

एसपी ने बदनाम और अनेक घटिया आरोपों से घिरे सीओ सिटी संतोष को तत्काल किया कार्यमुक्त

तीन साल से अधिक समय से एक ही सीट पर जमे खाऊ कमाऊ सीओ सिटी के चार्जलेस होने से उसके दलाल और भूमाफिया साथियों की दशा हो गयी है ‘विधवा’ जैसी

सत्ताधारी कुछ जनप्रतिनिधियों को आका बनाकर यहां खेल रहा था अवैध कमाई के बड़े-बड़े खेल

सीओ संतोष के कुकर्मों के चलते भाजपा का हुआ भारी नुकसान

अपराध रोकने के लिए मिली वर्दी की आड़ में किया अपराध और अपराधियों से जमकर दोहन

पूरा बेइज्जत होकर कार्यमुक्त हुआ विवादित सीओ सिटी

28 अगस्त को कोंच रोड पर सेक्स रैकेट को पकड़कर छोड़ना बना तत्काल कार्यमुक्त का कारण

भूमाफियाओं और दलालों को अब नए सिरे से किसी घूस खोर सरपरस्त अधिकारी की तलाश

अनिल शर्मा+संजय श्रीवास्तव+राकेश द्विवेदी

उरई(जालौन): जनपद जालौन के मुख्यालय उरई में सीओ सिटी के पद पर पिछले तीन वर्षों से अधिक समय से अपने आका सत्ताधारी जनप्रतिनिधियों की वजह से जमे पड़े सीओ संतोष सिंह का तबादला लगभग 1 माह पूर्व अम्बेडकर नगर जनपद के लिए हो गया था। मगर वह उरई में होने वाली अवैध कमाई में इस कदर लिप्त था कि तबसे न तो उसने रिलीव होने का मन बनाया और न ही उसके सत्ताधारी आकाओं ने उसे रिलीव होने दिया। यही नहीं स्थानतरणाधीन सीओ तबादले के बाद से और ज्यादा खुलकर खेल रहा था। विवेचनाओं में दिन रात समय देकर उसने खूब स्याह सफेद करके अपनी जेबें भरीं। अवैध कमाई की हवस के चलते सीओ ने 28 अगस्त की शाम कोंच रोड स्थित एक मकान से महिला थानाप्रभारी नीलेश कुमारी और अपने खासम खास पुलिस दल के साथ धावा बोलकर तीन कॉल गर्ल एवम दो ग्राहकों को घर में घुसकर पकड़ा। तथा पुलिस अधिकारी की कर्तव्यहीनता का बड़ा उदाहरण पेश करते हुए कहा जाता है कि उसने कई लाख रुपए लेके उनको सबकी जानकारी के बावजूद पूरी बेहयाई के साथ बिना किसी कार्यवाही के छोड़ दिया था। बस यही आखिरी दांव उसके कार्यमुक्त होने का कारण बना। इस पकड़ धकड़ के पीरियड में झाँसी के कमिश्नर जनपद के दौरे पर थे और उरई में ही केम्प कर रहे थे। उन्हें जब ऐसे घृणित कृत्य करने वाले सीओ के बारे में पूरी जानकारी मिली तो उनका रुख कड़ा हो गया। इधर जनपद में नए आये पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह साफ सुथरी छवि के कड़क आईपीएस अधिकारी हैं। इसी समीकरण के चलते सीओ संतोष की उच्च अधिकारियों को पैसा खिलाकर कु कृत्यों पर पर्दा डालने की उसकी पुरानी चाल सफल नहीं हो पाई। और ट्रांसफर के बाद भी भारी रकम पीट लेने वाले सीओ सिटी संतोष को रिलीवर के आने से पहले ही पुलिस अधीक्षक ने मंगलवार को सुबह तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर दिया। ऐसा होते ही स्याह चेहरे वाले आरोपी सीओ का चेहरा काला पड़ गया। और उसका मुह भी बुरी तरह से लटक गया। दूसरी तरफ उसके दलाल अनुभवहीन चतुर्वेदी, सड़क छाप से रईस बना एक अपराधी तथा उनके अन्य साथी जो प्रोपर्टी के मामलों में सीओ की दम पर दंद-फंद करके अपनी हैसियत बहुत बड़ा चुके हैं। काली कमाई से उजले कपड़े पहनकर लक्ज़री गाड़ियों के साथ शरीफ और सीधे साधे कमजोर वर्ग के लोगों के साथ-साथ सरकारी और नजूल की प्रॉपर्टी को भी हड़प लेने वाले कायर अराजकतत्व सीओ की दमपर बाहुबली बनकर घूमने लगे थे। उनकी तो हवाइयां उड़ गयीं। क्योंकि तमाम अपराधों को अंजाम देने के बावजूद सीओ संतोष को अपने धंधे का साझेदार बना लेने के कारण सभी पर काफी मुकदमे पहले से दर्ज रहने के बावजूद उनके खिलाफ कोई पुलिस कार्यवाही नहीं हो पाती थी। हालांकि वे सभी भूमाफिया निरोधी एक्ट, गुंडा एक्ट, गैंगस्टर एक्ट और जिला बदर के सबसे अग्रिम पंक्ति के सुपात्रों में शामिल हैं। फिलहाल तो संतोष सिंह के जिले से अपमानित होकर कार्यमुक्त हो जाने के बाद से उनकी स्थिति विधवाओं जैसी हो गयी है। मगर वे स्वार्थी तथ्य अब अपने संरक्षण के लिए किसी नए घूस खोर पुलिस अफसर की तलाश में जुट गए हैं। ताकि उसको अपनी अवैध कमाई का एक हिस्सा देकर उसे संतोष सिंह की तरह अपने संरक्षक के रूप में यूज़ किया जा सके। मगर देखना है कि जनपद में आते ही चुस्त दुरुस्त और कड़ी पुलिसिंग को बहाल करने वाले तेज तर्रार और कड़क पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह के कार्यकाल में सबको सताने वाला यह गिरोह कैसे सींखचों के पीछे जाने से बच पाएगा। क्योंकि गिरोह के सभी सदस्यों पर कई-कई आपराधिक मुकदमे पहले से ही दर्ज चले आ रहे हैं। और सीओ सिटी संतोष के तीन वर्ष के लंबे कार्यकाल में इन्होंने कई बार कानून को न सिर्फ तोड़ा है बल्कि कमजोर वर्ग अनेक व्यक्तियों के साथ आपराधिक कृत्य किये हैं। किन्तु अपने पार्टनर सीओ सिटी के कारण अनेक मुकदमें दर्ज होने से रह भी गए।

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