कांग्रेसी विधायक प्रद्युम्न लोधी के भाजपा में जाने से पूर्व सीएम कमल नाथ पर उठे सवाल

कांग्रेस से भाजपा में आने पर श्री लोधी को खाद्य एव आपूर्ति निगम का चेयरमेन बनाकर कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया
भाजपा की पूर्व मंत्री ललिता यादव ने कमल नाथ की सरकार में सिर्फ 15 माह में बालू के कारोबार से लोधी पर 100 करोड़ कमाने का लगाया आरोप
भाजपा में आने की यही मुख्य वजह मानी जा रही है

अनिल शर्मा़+संजय श्रीवास्तव़+डा0 राकेश द्विवेदी

छतरपुर। कांग्रेस विधायक प्रद्युम्न लोधी ने जिस तरह कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया है। इसके चलते कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ पर तीखे सवाल उठ रहे हैं। मालूम हो कि मप्र में 2018 के विधानसभा चुनाव में छतरपुर जिले की बड़ा मलहरा विधानसभा सीट से कांग्रेस के लगभग डेढ़ दर्जन नेताओं ने टिकिट मांगा था। लेकिन कांग्रेस के कमल नाथ ने सभी को दरकिनार करते हुए छतरपुर जनपद से बाहर के निवासी प्रद्युम्न सिंह लोधी को प्राथमिकता देते हुए टिकिट दिया था। जिससे सभी चैंक गए थे। इसके पीछे यह चर्चा आम है कि भाजपा की फायर ब्रांड नेता उमा भारती और तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के बीच लंबे अरसे से छत्तीस का आंकड़ा रहा है। इसका फायदा उठाते हुए कमलनाथ ने उमा भारती के करीबी माने जाने वाले लोधी बिरादरी के 5 नेताओं को विधानसभा का टिकिट दे दिया। जिनमें प्रद्युम्न लोधी और राहुल लोधी प्रमुख हैं। जिससे प्रदेश में लोधी बिरादरी का वोट कांग्रेस को अच्छी संख्या में मिला और वे चुनाव जीत गए।
हालांकि इस विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस की कांटे की टक्कर थी, लेकिन कुछ सीटें हार जाने के कारण शिवराज सिंह लगातार चैथीबार मुख्यमंत्री नहीं बन पाए और कमल नाथ मुख्यमंत्री बन गए। इसके पीछे यह कारण बताया जा रहा है कि यदि कमल नाथ ने एक रणनीति के तहत उमा भारती के करीबी लोधी नेताओं को कांग्रेस से टिकिट न दिया होता तो मप्र में चैथीबार फिर शिवराज सिंह की सरकार बनती।
मालूम हो कि कांग्रेस विधायक प्रद्युम्न सिंह लोधी भाजपा के कद्दावर नेता माने जाते रहे हैं। उनकी शुरुआत भारतीय जनता युवा मोर्चा से हुई और वे मोर्चा के प्रदेश मंत्री तक रह चुके हैं। लेकिन जब उन्होंने भाजपा की जगह कांग्रेस से टिकिट लेकर विधायक बने तो कुछ दिनों बाद ही वे मुख्यमंत्री कमल नाथ के बेहद करीबी माने जाने लगे।
जब मुख्यमंत्री कमल नाथ की सरकार ज्योतिरादित्य सिंधिया की बगावत के कारण अल्पमत में आई और कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री के रूप में कमल नाथ ने इस्तीफा दिया उस समय विधायक प्रद्युम्न लोधी कमल नाथ के सामने फूट फूट कर रोए थे। यह खबर और वीडियों विभिन्न टीवी चैनलों में खूब वायरल हुआ था।
उधर सिंधिया की वजह से प्रद्युम्न लोधी ने भाजपा का फिर दामन थामा तो भाजपा की वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री ललिता यादव ने विधायक प्रद्युम्न लोधी पर यह खुला आरोप लगाया कि कांग्रेस की 15 माह की कमल नाथ सरकार में बालू के कारोबार में 100 करोड़ से ज्यादा कमाए हैं। ललिता यादव ने यह भी आरोप लगाया कि बालू के कारोबार के चलते प्रद्युम्न लोधी फिरसे भाजपा में आए हैं। क्योंकि बालू खनन के ये कारोबार सत्ता के सहारे ही चलते हैं। उधर भाजपा की फायर ब्रांड नेता उमा भारती ने षिवराज सिंह के मंत्रिमंडल के विस्तार में क्षेत्र और जाति के संतुलन का ध्यान न रखने का आरोप लगाया। इसके बाद ही षिवराज सिंह सरकार ने कांग्रेस से भाजपा में आए प्रद्युम्न सिंह लोधी को खाद्य एवं आपूर्ति निगम का चेयरमैन बनाकर उन्हें कैबिनेट मंत्री दर्जा दे दिया गया।
इसके चलते कांग्रेस के प्रदेष अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ को अपने चहेते विधायक प्रद्युम्न सिंह लोधी को लेकर पार्टी में खूब किरकिरी हो रही है। जिस तरह से प्रद्युम्न लोधी ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा है। उसको लेकर यह संभावना जताई जा रही है कि मध्य प्रदेष में होने वाले 24 विधान सभा सीटों के उपचुनाव में उमा भारती, प्रहलाद पटेल, प्रद्युम्न लोधी आदि के कारण मप्र में लोधी समाज का अधिकांष वोट भाजपा प्रत्याषियों के पक्ष में जाने की संभावना है।