कानपुर की आबादी सिडनी व सिंगापुर के बराबर, प्रदूषण छह गुना

कानपुर: प्रदूषण की मार से कराह रहे कानपुर के दिन कब बहुरेंगे यह तो कोई नहीं बता सकता है पर विदेशों के कुछ शहरों से इसकी तुलना की जाए तो शर्मनाक तस्वीर सामने आती है। अगर सिडनी और सिंगापुर की बात करें तो इसकी आबादी भी कानपुर के बराबर ही है पर वहां शुद्ध हवा में लोग सांस लेते हैं और कनपुरिए जहरीली हवा में।
सुनने में भले ही अच्छा न लगे पर आंकड़ों की सच्चाई यही है। सर्दी की दस्तक के बीच कानपुर का एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) जहां 300 के पार पहुंच गया है, वहीं सिंगापुर व सिडनी का 50 से भी कम है। भले ही इसे सुधारने के लाख दावे किए जाएं पर हमें तकनीकी, कार्यशैली के अलावा उनसे शुद्ध वातावरण में कैसे रहा जाए, यह भी सीखने की जरूरत  है।
कभी पूरब का मैनचेस्टर कहलाने वाले कानपुर की पहचान दुनिया के प्रसिद्ध औद्योगिक शहरों में होती थी लेकिन अब प्रदूषण ने बदनाम करना शुरू कर दिया है। वर्ष 2016 से लगातार अपना शहर प्रदूषित शहरों की टॉप सूची में शामिल हो रहा है। पिछले वर्ष तो यह नंबर वन हो गया था। कानपुर की आबादी करीब 55 लाख है। इतनी ही आबादी वाले कई शहर दूसरे देशों में भी हैं। इसके बावजूद वह न सिर्फ स्वच्छ हैं बल्कि वहां के लोग शुद्ध हवा में जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
इसके विपरीत कानपुर में दिन बीतने के साथ प्रदूषण का ग्राफ खतरनाक स्तर की ओर बढ़ रहा है। सिर्फ पीएम 2.5 नहीं बल्कि ओजोन, सल्फर डाई ऑक्साइड और नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड की मात्रा भी मानक से काफी अधिक है। मानक के अनुसार पीएम 2.5 या अन्य पैरामीटर भी 50 से कम होने चाहिए। हालांकि 100 तक स्थिति सामान्य समझी जा सकती है मगर कानपुर में ये पैरामीटर लगातार बढ़ रहे हैं। मंगलवार को एक्यूआई 317 रहा।
विदेशों में धुएं पर रोक, प्रदूषण पर सख्त कानून
सिंगापुर और सिडनी में धुएं पर पूरी तरह रोक है। मतलब न तो खुले में स्मोकिंग की जाती है और न ही कूड़ा जला सकते हैं। वहीं प्रदूषण को लेकर डब्ल्यूएचओ के मानकों का सख्ती से पालन किया जाता है। हरियाली पर विशेष ध्यान है। सिंगापुर के पहले प्रधानमंत्री ली कुआन यू ने प्रदूषण पर शुरुआती दौर में ही सख्ती दिखाई थी। सख्त कानून बनाने के साथ लगातार नियमों को बदलते रहे। गाड़ियों से निकलने वाला धुआं खतरनाक हुआ तो सिस्टम को अपग्रेड कर दिया। अब यूरो-6 चल रहा है, जो कार्बन मोनो ऑक्साइड, हाइड्रो कार्बन समेत खतरनाक कण को कम कर देता है।
शहर
पीएम2.5
ओजोन
एनओटू
एसओटू
कानपुर
327
125
165
13
सेंट्रल सिंगापुर
30
13
3
लॉस एंजिलिस
68
34
21
2
सिडनी
49
19
1
बार्सिलोना
35
4
4
2
मेलबर्न
69
23
जोहांसबर्ग
89
2
2
फुकोओका
30
33
12
2
अंकारा, टर्की
103
19
14
7
टोरंटो, कनाडा
17
13
11
1
यंगून, म्यांमार
68
4
2019 में दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर था कानपुर
वर्ष 2019 में कानपुर को दुनिया के सबसे प्रदूषित शहर के रूप में खराब पहचान मिली थी। टॉप-20 की सूची में कानपुर ही नहीं इंडिया के करीब 13 शहर शामिल थे। उस दौरान यहां का पीएम-2.5 173 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर और पीएम-10 318.5 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर लंबे समय तक रहा।
पिछले साल ये थे टॉप-20 प्रदूषित शहर
1- कानपुर, इंडिया
2- फरीदाबाद, इंडिया
3- पसाखा, भूटान
4- गया, इंडिया
5- वाराणसी, इंडिया
6- पटना, इंडिया
7- दिल्ली, इंडिया
8- लखनऊ, इंडिया
9- आगरा, इंडिया
10 -मुजफ्फरपुर, इंडिया
11- गुरुग्राम, इंडिया
12- ग्रेटर कैरो, इजिप्ट
13- जयपुर, इंडिया
14- डेल्टा रीजन, इजिप्ट
15- पटियाला, इंडिया
16- जोधपुर, इंडिया
17- नारायनगंज, बांग्लादेश
18- अली सुबह अल-सलेम, कुवैत
19- बोडिंग, नार्थ चाइना
20- उलानबातर, मंगोलिया
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