कार्यालय खुलने के बाद भी छुट्टियों जैसा नजारा

खाली पड़ी कुर्सी, अधिकारी छुटृटी पर

कई विभागीय पटलों पर नदारत रहे कर्मचारी
विभागाध्यक्ष बोले नोटिस देकर मांगेगे स्पष्टीकरण
उरई(जालौन)। दीवाली की छुट्टियों के बाद मंगलवार को सरकारी कार्यालय तो खुले पर उनमें से अधिकांश में छुट्टी जैसा नजारा देखने को मिला। हैरत की बात तो यह है कि कुछ दफतरों में आला अफसर दिखे तो कर्मचारी नदारत थे। तो कहीं कुछ एक कर्मचारी मौजूद रहे तो जिम्मेदार अफसरों का अता पता नही। हालाकि कुछ कर्मचारियों का कहना रहा कि तहसील दिवस के कारण ऐसी स्थितियां बनी है। बहरहरल जो भी हो पर इतना साफ है कि जिस तरह से कार्यालयों में पूरी तरह से सन्नाटा पसरा रहा उससे सवाल जरूर खडे हो जाते है।
मंगलवार को दौपहर बारह बजे के आस पास “यंग भारत” के संवाददाता ने जब मुख्यालय स्थित कुछ सरकारी अमलों में जानकारियां जुटाने के उदेश्य से भ्रमण किया तो बेहद ही चोकाने वाली तश्वीर सामने आयी। जिला परिषद समीप लोक निर्माण खंड द्वितीय कार्यालय के भीतर अधिकांश पटल पर काम करने वाले कर्मचारी नदारत दिखे। उनके बारें में जानकारी करने के लिये जब संबंधित अधिकारी के चेम्बर की ओर रूख किया तो स्थिति वहां भी यही देखने को मिली। किसी के गुट पर ताला पड़ा हुआ था तो किसी के कमरें के दरवाजे तो खुले थे पर वहां पड़ी कुर्सियां खाली थी। कमोवेश यह स्थिति लोक निर्माण विभाग के द्वितीय खंड कार्यालय के अधिकांश पटल पर दिखलाई दी। बाद में जब बाहर आकर अधिशाषी अभियंता लोक निर्माण खंड द्वितीय इंजीनियर अभिनेश कुमार के चेम्बर में जाकर देखा तो वह कुछ लोगो के साथ व्यस्त दिखें। बाद में जब उनसे इस बारे में जानकारी ली तो उनका कहना साफ था कि सरकारी तौर पर आज का अवकाश नही है। जो भी बिना प्रार्थना पत्र दिये अनुपस्थित है। उनसे स्पष्टीकरण मांगा जायेगा। हांलाकि उन्होने उपस्थिति रजिस्टर तलब किया तो देखा पांच कर्मचारी प्रार्थना पत्र देकर अवकाश लिये थे। जबकि एक कर्मचारी बिना अवकाश गायब मिला। जिसको स्पष्टीकरण देने की बात कहीं। विकास भवन स्थित कई विभागों की कमोवेश स्थिति यही देखने को मिली। तहसील दिवस होने के कारण आलाधिकारियों का मौजूद न होना तो समझ में आता है पर जिस तरह से आधा दर्जन तो कहीं लगभग दर्जन भर से अधिक कर्मचारियों वाले विभाग में पसरा सन्नाटा इतना तो बंया करता ही है कि अपनी जिम्मेदारियों के प्रति कर्मचारियों का रवैया खासा ढुलमुल है।
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