कोरोना महामारी की भेंट चढ़ गया मुस्लिम समाज का मोहर्रम

नहीं निकला जुलूस न हुए लंगर और ना हुई तकरीर

उरई (जालौन)। मोहर्रम की 10 तारीख के अंतिम दिन कोरोना महामारी को देखते हुए ना तो कोई तकरीर हुई और न ही ताजियों का जुलूस मुस्लिम समाज के द्वारा निकाला गया। मुस्लिम रीति रिवाज के अनुसार हर वर्ष जो लंगर का कार्यक्रम खुले मंच पर दर्जनों जगह होता था जिसमें मुस्लिम समाज की महिलाएं, पुरुष और बच्चे पहुंच कर लंगर का आंनद लेते थे मगर इस वर्ष मुहर्रम के अंतिम दिन पहली बार ना तो मस्जिदों पर तकरीर ही हो सकी ना ही लंगर वितरण का कार्यक्रम खुलकर हो सका जिससे मुस्लिम समाज के लोगों निराशा ही नजर आयी। इस सम्बंध में समाजसेवी युसूफ अंसारी अलमारी वालों ने बताया कि शहर के मोहल्ला तिलकनगर पीरों वाली मस्जिद के मैदान में हर वर्ष मोहर्रम के त्योहार पर तकरीर होती थी यह पहली बार इतिहास में मौका है कि कोरोना महामारी के दौर में त्योहार इस वर्ष फीका रहा जिससे मुस्लिम समाज के लोगों त्योहार पर मायूसी दिखाई दी।

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