क्या सचिन पायलट बन सकते हैं कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष?

कांग्रेस हाइकमान ने राष्ट्रीय महासचिव केसी बेणुगोपाल, अहमद पटेल और प्रियंका गांधी की बनाई तीन सदस्यीय कमेटी

कांग्रेस में सचिन पायलट के माध्यम से युवा बनाम बुजुर्ग की लड़ाई का हो सकता है पटाक्षेप

राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने के विधानसभा सत्र बुलाने के लिए 14 अगस्त तक का लंबा समय देने से कांग्रेस को हुआ फायदा

पायलट ने राजस्थान में 6 वर्षों की प्रदेष अध्यक्षी में संगठन क्षमता का दिया प्रमाण

यंग भारत 18 जुलाई को ही कांग्रेस में पीढ़ी संघर्ष की स्टोरी प्रमुखता से छाप चुका है

अनिल शर्मा़+संजय श्रीवास्तव़+डा0 राकेश द्विवेदी

दिल्ली। पिछले 48 घंटों में कांग्रेस में तेजी से बदले घटनाक्रम में कांग्रेस की बुजुर्ग लाबी ने वैचारिक रूप से युवा लाबी को संगठन में महत्वपूर्ण पद देने के लिए सहमति जता दी है। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी जिस तरह से पार्टी में संगठन की कमान युवाओं को देना चाहते हैं। उसके लिए भी यह सैद्धान्तिक सहमति बनना एक शुभ लक्षण है। जिस तरह से बगावती तेवर अपनाए सचिन पायलट केा मनाने के लिए कांग्रेस की कार्यवाहक राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनियां गांधी ने तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। जिसमें राष्ट्रीय महासचिव केसी बेणुगोपाल, राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी तथा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अहमद पटेल हैं।
इससे साफ है कि सचिन पायलट को कांग्रेस में शीघ्र ही राष्ट्रीय जिम्मेदारी दी जा सकती है। चर्चा यह है कि सचिन पायलट को क्या राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो कांग्रेस में इसे राहुल गांधी और उनके युवा साथियों के विचारों की जीत माना जाएगा। क्योंकि कांग्रेस के युवा नेता लंबे समय तक संगठन और सत्ता में युवाओं की प्रमुख भागीदारी की मांग कर रहे थे। सचिन पायलट एक ऐसे युवा नेता हैं जिन्होंने राजस्थान कांग्रेस पार्टी के प्रदेष अध्यक्ष रहते हुए जिस तरह से जमीनी स्तर पर कांग्रेस का जनाधार खड़ा किया, जिस तरह से आम कार्यकर्ताओं को पार्टी से जोड़ा, जिसके कारण कांग्रेस भाजपा को मात देकर सत्ता में आई। पार्टी हाइकमान ने उनकी संगठन क्षमता और कौषल को मान लिया है।
उधर कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी भी यह चाहते हैं कि उनके इस्तीफे के बाद अब नेहरू गांधी परिवार के अलावा कोई युवा नेता राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। ताकि कांग्रेस पार्टी पर जो लगातार परिवारवाद का आरोप अन्य दल के नेता लगाते हैं, उसका भी जवाब दिया जा सके। इसलिए इसकी संभावना बढ़ गई है कि अभी राजस्थान में सत्ता का संघर्ष थम जाने के बाद 14 अगस्त को होने वाले विधानसभा सत्र में होने वाले विष्वासमत प्रस्ताव में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की जीत हो जाए। उसके बाद पार्टी की तीन सदस्यीय कमेटी सचिन पायलट को कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का सुझाव पार्टी हाइकमान को दे सकती है। क्योंकि इस तीन सदस्यीय कमेटी में केसी बेणुगोपाल और प्रियंका गांधी राहुल गांधी के युवाओं को आगे लाने के सुझाव की पक्षधर हैं। इसलिए अहमद पटेल को भी इस निर्णय में अपनी मोहर लगानी पड़ेगी।
कांग्रेस में सचिन पायलट के साथ नए युग की शुरुआत होने की संभावना है। लंबे समय से कांग्रेस में बुजुर्ग बनाम युवा पीढ़ी का संघर्ष चल रहा हैं। 2019 में कांग्रेस को मिली हार से कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी बहुत आहत हुए। वे इस चर्चा से भी आहत बताए जाते हैं, कि कांग्रेस में नेहरू गांधी परिवार के अलावा कोई संगठन की कमान नहीं संभाल सकता। इसी के चलते उन्होंने पार्टी के निर्णयों से अपनी दूरी बना ली थी। जिसके चलते श्रीमती सोनियां गांधी को कार्यवाहक राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था। जिसका कार्यकाल 10 अगस्त, 2020 को समाप्त हो गया है।
इसी बीच पिछले दिनों उपमुख्यमंत्री व कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सचिन पायलट ने बगावत का झंडा उठा लिया था। वे अपनी सहित 19 कांग्रेस विधायकों को लेकर हरियाणा के मानेसर होटल में रुके हुए थे। इसको लेकर राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार संकट में आ गई थी। रोज रोज हार्स ट्रेडिंग की खबरों से भी गहलोत परेषान थे। कांग्रेस में बुजुर्ग बनाम युवा का संघर्ष खुलकर दिल्ली में पिछले दिनों श्रीमती सोनियां गांधी की अध्यक्षा में हुई राज्यसभा सांसदों की बैठक में आ गया था। जिसमें बुजुर्गों की ओर से पूर्व मंत्री मणि शंकर अय्यर, कपिल सिब्बल, गुलाम नबी आजाद, अहमद पटेल, आनन्द शर्मा आदि थे। तो दूसरी तरफ कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी बेणुगोपाल, प्रियंका गांधी तथा देश के विभिन्न क्षेत्रों से राजीव सातव, जितेन्द्र प्रसाद, मिलिन्द देवड़ा, पूर्व मंत्री नवजोत सिद्धू, कुं0 भंवर सिंह, दीपेन्द्र हुड्डा, प्रिया दत्त, संजय निरुपम आदि युवाओं का ग्रुप संगठन को मजबूत भागीदारी देने की पैरोकारी लंबे समय से कर रहा है।
इस मुहिम को वैचारिक रूप से राहुल गांधी का समर्थन प्राप्त होना बताया जाता है। कांग्रेस के लिए सोने में सुहागा यह हो गया कि राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को विधानसभा सत्र बुलाने के लिए लंबी तारीख यानि 14 अगस्त तक का समय दे दिया। इसका फायदा उठाते हुए राहुल गांधी के रणनीतिक सलाहकार माने जाने वाले पूर्व वरिष्ठ आइएएस अधिकारी के राजू और प्रियंका गांधी ने सचिन पायलट से इस बीच कई बार बात की। इसके बाद कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ सचिन पायलट की मीटिंग कराई। इसमें प्रमुख भूमिका राष्ट्रीय महासचिव केसी बेणुगोपाल, के राजू और प्रियंका गांधी ने निभाई। राहुल गांधी पहले से अपने साथी ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस से जाने को लेकर दुःखी थे। वे अपने दूसरे साथी सचिन पायलट को कांग्रेस छोड़कर नहीं जाने देना चाहते थे। इसलिए दिल्ली में उन्होंने सचिन पायलट के साथ लगभग दो घंटे की लंबी बातचीत की।
इसके बाद कल 10 अगस्त का सचिन पायलट ने अपने समर्थकों के साथ राजस्थान में जाकर 14 अगस्त को होन वाले विधानसभा सत्र में अपने समर्थकों के साथ जाकर अशोक गहलोत सरकार को बचाने का आष्वासन राहुल गांधी को दे दिया। मालूम हो कि सचिन पायलट पिछड़े वर्ग गुर्जर बिरादरी से आते हैं। उनकी शादी जम्मू कष्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला की बेटी सारा अब्दुल्ला से हुई है। इसलिए वे देश में पिछड़े वर्ग और मुस्लिम समाज को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। इसके अलावा कांग्रेस का वर्षों से मूल वोट बैंक ब्राह्मण, दलित और मुस्लिम रहा है। इसलिए इसकी संभावना पूरी है कि सचिन पायलट को शीघ्र ही या तो कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाएगा या उन्हें केन्द्रीय संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाएगी। क्योंकि राहुल गांधी सचिन पायलट के माध्यम से अपने दो उद्देष्य पूरे करना चाहते हैं। एक तो नेहरू गांधी परिवार से बाहर के व्यक्ति को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर, दूसरे जमीनी कार्यकर्ता को कांग्रेस में महत्वपूर्ण पद देकर पूरे देश को यह बताना चाहते हैं, कि उन्होंने कांग्रेस का अध्यक्ष पद जो छोड़ा था उसके पीछे उनका सिद्धान्त था कोई नाटक नहीं था।

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