क्या सीएम अशोक गहलोत गुट के पांच और विधायक छोड़ सकते हैं साथ?

जैसलमेर के सूर्यगढ़ होटल में रुके हैं गहलोत गुट के 92 विधायक

गहलोत गुट के 4 मंत्री सहित 7 विधायक जयपुर में

सचिन पायलट सहित कुल 19 विधायक हरियाणा के मानेसर होटल में रुके हैं

14 अगस्त को विधानसभा में हो जाएगा फैसला

अनिल शर्मा़+संजय श्रीवास्तव़+डा0 राकेश द्विवेदी

जैसलमेर। रास्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को उस समय तगड़ा झटका लगा, जब जैसलमेर के 5 सितारा होटल सूर्यगढ़ में रुके गहलोत गुट के कुल 92 विधायकों ने एक महिला सहित कुल पांच विधायकों ने गहलोत की कार्य पद्धति पर नाराजगी जताई। यदि कांग्रेस के इन पांचों विधायकों के विरोध का स्वर जारी रहा, तो 14 अगस्त को राजस्थान विधानसभा के सत्र में होने वाले विश्वासमत में सीएम गहलोत के सामने संकट पैदा हो सकता है। उधर राज्यपाल कलराज मिश्र ने 14 अगस्त को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सत्र बुलाने की अनुमति देकर सीएम अशोक गहलोत के खिलाफ वगावत कर रहे पूर्व उपमुख्यमंत्री तथा पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट को अपनी बाजी मजबूत करने के लिए काफी अवसर मिल गया है। दोनों ओर से खुलकर हार्सट्रेडिंग जारी है।
बागी सचिन पायलट को केन्द्र की मोदी सरकार तथा भाजपा के कद्दावर नेता और सांसद ज्योतिरादित्य के माध्यम से समर्थन मिल रहा है। जिससे अब सचिन पायलट की स्थिति और मजबूत होती जा रही है। मालूम हो कि राजस्थान विधानसभा में कुल 200 सीटें हैं। जिसमें पिछले विधानसभा में कुल 199 सीटों पर मतदान हुआ था। कांग्रेस केा 99 भाजपा को 73, भाजपा के सहयोगी दल को 3 सीटें, निर्दलीय को 13, बसपा को 6, सीपीएम को 2, भारतीय ट्रायबल्स पार्टी केा 2, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी को 3 और राष्ट्रीय लोकदल को एक सीट मिली थी। कांग्रेस ने निर्दलीयों के समर्थन से सरकार बना ली थी। गहलोत मुख्यमंत्री तथा सचिन पायलट उपमुख्यमंत्री बन गए थे। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बसपा के 6 विधायकों केा तोड़कर कांग्रेस में मिला लिया था।
बसपा सुप्रीमो मायाबती ने इस मामले को पार्टी की तरफ से हाइकोर्ट में याचिका डाल दी है। मामला कोर्ट में है। इसके बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर विवाद इतना गहराया कि दोनों गुटों के लोग सड़क पर उतर कर आरोप प्रत्यारोप लगाने लगे। कांग्रेस के पार्टी हाइकमान ने सचिन पायलट की नहीं सुनी तो वे अपने सहित 19 विधायकों को लेकर हरियाणा के होटल मानेसर में रुके हुए हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी प्रदेश की एसओेजी के माध्यम से सचिन पायलट और केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र शेखावत को सम्मन भिजवाए। इसके साथ ही पार्टी हाइकमान से कहकर सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री तथा पार्टी के अध्यक्ष पद से हटवा दिया।
उधर केन्द्र सरकार के इशारे पर अशोक गहलोत के भाई और करीबियों पर एडी और इन्कम टैक्स के छापे पड़े। विधायकों की खरीद फरोख्त से परेषान होकर सीएम गहलोत ने 14 अगस्त तक अपने गुट के विधायकों को बचाने के लिए जयपुर के होटल से जैसलमेर के पांच सितारा होटल सूर्यगढ़ में पहुंच गए। गहलोत गुट के जैसलमेर के होटल में अभी तक कुल 92 विधायक ही पहुंच सके हैं। जबकि गहलोत गुट के ही 4 मंत्री और तीन विधायक सहित 7 जनप्रतिनिधि जयपुर में ही रुके हुए हैं। उधर सूर्यगढ़ होटल में रुक 92 विधायकों में से एक महिला सहित कुल 5 विधायकों ने सीएम गहलोत की कार्य पद्धति पर नाराजगी जताकर हड़कंप मचा दिया है।
इस सूचना से सचिन पायलट के खेमे में उत्साह की लहर है। यदि ये 5 विधायक विद्रोह कर गए और बसपा सुप्रीमो के इशारे पर कांग्रेस में शामिल हुए 6 विधायक यदि हार्सट्रेडिंग के चलते कांग्रेस का व्हिप तोड़कर विश्वास मत के विरोध में वोट दे दिया, तो फिर गहलोत की सरकार का बचना मुष्किल हो जाएगा। इस में यदि सीएम गहलोत को कुछ आक्सीजन मिलती दिख रही तो वह राजस्थान की नेता प्रतिपक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से मिल सकती है। क्योंकि उनके सीएम अशोक गहलोत से अच्छे संबंध हैं। वे भाजपा में किसी बाहरी नेता का कद नहीं बढ़ने देना चाहतीं। इसीलिए वे राजस्थान में गहलोत की सरकार गिराने में उतनी सक्रिय नहीं हैं, जितने मप्र में सरकार गिराने में शिवराज सिंह और भाजपा सक्रिय थे।

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