क्या सीओ सिटी के नेतृत्व में पकड़ा गया कॉल गर्ल रैकेट?

पुलिस का कोई भी जिम्मेदार सीओ सिटी हो या महिला थाना प्रभारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं

गोलमाल की आशंका से पुलिस की नीयत पर संदेह

मामले को दबाकर कहीं खेल तो नहीं कर रहे पुलिस वाले

उरई(जालौन): उरई के मोहल्ला पीली कोठी में स्थित सुहाग महल और कोंच बस स्टैंड के बीच एक घर मे पुलिस ने सीओ सिटी संतोष सिंह के नेतृत्व में कथित तौर पर छापा मारा और घर के अंदर से देह व्यापार में लिप्त रहने वालीं तीन युवतियों और दो युवकों को धर दबोचा। युवक उक्त युवतियों के ग्राहक बताये जा रहे हैं।

मुन्नी देवी नामक महिला के घर में पड़ी इस पुलिसिया रेड की जानकारी जैसे ही इलाके में फैली कि अपने आप मे एक सनसनी बन गयी। देह व्यापार के किरदारों को पुलिस द्वारा गुप चुप ढंग से पकड़े जाने की चर्चाएं बड़े रस के साथ लोगों के बीच की जाने लगीं। इस सामाजिक बुराई के खिलाफ उठे पुलिस के कदम की जानकारी पाने के लिए जब मीडिया कर्मियों ने सीओ सिटी का फोन लगाया तो उनसे संपर्क हो पाने में असफलता हांथ लगी। क्योंकि सीओ सिटी संतोष सिंह ने अपना सरकारी मोबाइल(CUG) उठाना ही मुनासिब नहीं समझा। शहर कोतवाल का CUG भी पत्रकारों की घंटी से बजते बजते थक गया मगर उसे पिक नहीं किया गया। उधर मोहल्ले वासियों के अनुसार जो जानकारी मिली थी। उसमें इस पकड़ धकड़ के मामले में महिला थाना प्रभारी श्रीमती नीलेश का अहम रोल इसलिए भी बताया जा रहा था कि वे ऐसे मामले पकड़ने में खासी रुचि रखती हैं। किंतु उन्होंने खबर नबीस का फोन काफी देर बाद उठाया तो मगर घटना की जानकारी देने में टाल मटोल करने लगीं। जब पत्रकार ने कहा कि पूरे मोहल्ले वाले इस छापे मारी के प्रत्यक्षदर्शी हैं तो आप क्यों नहीं मीडिया को सही जानकारी दे रही हैं। तो वे बात बदलकर बोलीं की ये छापा मोबाइलों की बरामदगी के संबंध में सर्वलान्स के स्टाफ ने डाला था। उन्हें यह जानकारी नहीं है। यहां यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सर्वलान्स का स्टाफ तो कार्यालय का स्टाफ है। उसे फील्ड में छापे मारी करने का कोई अधिकार नहीं होता। मगर पूरी घटना और तीन युवतियों एवम दो युवकों के पकड़े जाने की घटना को देखने वाले सबकुछ खुल कर बता रहे हैं। मगर अपराधों के उन्मूलन के लिए जिम्मेदार पुलिस यहां तक कि एक राज पत्रित अधिकारी सीओ सिटी के द्वारा मीडिया को कोई जवाब ही न देने तथा कोतवाली एवम महिला थाने में किसी प्रकार की लिखा पड़ी न किये जाने से पुलिस की नीयत पर संदेह होना लाजमी है। कहना न होगा कि ऐसे तमाम मामलों में पुलिस के उरई सर्किल के अधिकारी अपनी जवाब देही से बचते हैं। और यहां पुलिस के कामों में पारदर्शिता का नितांत अभाव है। हमारा काम तो समाज और उच्च अधिकारियों को सही सूचना प्रदान करना है, सो हमने दे दी। अब देखना है कि जिले के नए पुलिस कप्तान डॉ. यशवीर सिंह जो तेज तर्रार भी हैं। देह व्यापार जैसी घृणित समाजिक बुराई और उससे भी गिरे हुए पुलिस के गोलमाल के रवैय्ये पर आखिर कौन सा रुख अख्तियार करते हैं?

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