क्षय रोगियों के लिये वरदान साबित रहा डाटस कार्यक्रम

जानकारी देते जिला क्षय रोग अधिकारी डॉक्टर सुग्रीव बाबू

संक्रमण के खिलाफ विभागीय जंग अभी भी जारी
हजारों क्षय रोगियों ने पाई नई जिदंगी

उरई(जालौन): क्षय रोग यानि मौत को न्यौता जी हां बात सौ फीसदी सच है यदि आप समय पर सचेत नहो तो मौत की आशंका से बचा नही जा सकता है पर समय पर उपचार हो तो जिंदगी को बचाया भी जा सकता है डाटस इसका पक्का इलाज है जिसे साबित कर दिखाया है राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम ने जहां स्वास्थ महकमें की क्षय रोग ईकाई ने हजारों रोगियों को मौत के मुंह से निकाल कर उन्हें नई जिंदगी दी है।
एक वक्त था जब क्षय रोग का नाम सुनते ही लोगों के जेहन में मौत का खौफ इस कदर मडराने लगता था कि फिर उनका जीवन किसी अभिशाप से कम नही होता था यही नहीं सबसे बडी विडंबना तो यह थी कि रोगी को समाज और उसके परिवार से भी दूरी बनाकर अकलेपन की जिंदगी गुजारनी पडती थी लेकिन डाटस कार्यक्रम क्षय रोगियों की जिंदगी में वरदान वरदान बन गया मौजूदा स्थिति यह है कि इसके उपचार ने जहां हजारों लोगो को नई जिंदगी दी है तो वहीं लोगो का क्षय रोग के प्रति नजरियां ही बदलकर रख दिया है। क्षय रोग के बारे मे बताया जाता है कि यह रोग केवल रोगी के खासने छींगने में निकलने वाले कीटाणुओं से एक दूसरें में आसानी से फैलता है रोगी किसी भी व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है । राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम आरएमटीपीसी की विगत कुछ वर्षो के दौरान मिली उपलब्धियों को देखें तो बेहद ही चैकाने वाले सकारात्मक परिणाम सामने आये है हजारों रोगियों को नियमित उपचार ने पूर्णत ठीक कर घर पहुंचा दिया है। जिला क्षय रोग अधिकारी डा सुग्रीव बाबू ने यंग भारत को दी जानकारी में बताया कि क्षय रोग का डाटस के तहत उपचार दो श्रेणियों वाले मरीजों के लिये छह महीने और आठ महीनें की अवधि में किया जाता है ।

संजय श्रीवास्तव-प्रधानसम्पादक एवम स्वत्वाधिकारी, अनिल शर्मा- निदेशक, डॉ. राकेश द्विवेदी- सम्पादक, शिवम श्रीवास्तव- जी.एम.

सुझाव एवम शिकायत- प्रधानसम्पादक 9415055318(W), 8887963126