गहलोत-पायलट किसी भी कीमत पर एक दूसरे को मात देने में लगे हैं

सीएम गहलोत राज्यपाल पर दवाब बनाकर और कोर्ट के सहारे अपनी जीत पक्की करने में लगे हैं
पीएम अशोक गहलोत अभी सदन में परीक्षण कराके जीत हासिल करना चाहते हैं
वहीं सचिन पायलट ने सुप्रीम कोर्ट में केन्द्र सरकार को पार्टी बनाकर मामला लम्बा खीचना चाहते हैं
यदि दस दिन के भीतर फ्लोर टैस्ट हो गया तो बाजी गहलोत के हाथों में आने की संभावना
यदि कोर्ट में मामला 15 दिन से ज्यादा टला तो तमाम विधायक सचिन के पक्ष में चले जाएंगे, फिर गहलोत सरकार के गिरने के चांस बढ़ जाएंगे
अनिल शर्मा़+संजय श्रीवास्तव़+डा0 राकेश द्विवेदी

जयपुर। राजस्थान में सत्ता का संघर्ष इस समय चरम पर है। कांग्रेस के मुख्यमंत्री अपने पक्ष में विधायकों को लेकर राजभवन के सामने कल पहुंच गए थे और वहीं धरना देकर राज्यपाल कलराज मिश्र से फ्लोर टैस्ट लेने का आदेश देने के लिए दवाब बनाने लगे। इतना ही नहीं गहलोत के पक्ष के विधायकों ने राजभवन के लान पर ही धरना देकर अपना संख्याबल दिखाने की कोशिश की। इस दौरान उन्होंने यह कहते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। जब तक राज्यपाल विधानसभा का सत्र बुलाने का आदेश नहीं देंगे, वे यहीं धरने पर बैठे रहेंगे।
इस दौरान जब गहलोत राज्यपाल से मिलने राजभवन के अन्दर गए तो धरने पर बैठे गहलोत समर्थक विधायकों ने जोर जोर से इंकलाब जिन्दाबाद तथा गहलोत तुम संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं, के नारे लगाने शुरू कर दिए। जब नारेबाजी का शोर बढ़ा तो राज्यपाल कलराज मिश्र राजभवन से निकलकर धरना स्थल पर आ गए और विधायकों से मुलाकात की। राज्यपाल ने धरने पर बैठे विधायकों को समझाया कि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। इसलिए कोई भी आदेश देने के पहले वे कानून के विशेषज्ञों से राय लेंगे। इसके लिए समय चाहिए। उन्होंने धरना दे रहे विधायकों से नाराजगी भरे स्वर में कहा कि आप लोग गलत परंपरा डाल रहे हो। राजभवन में आकर जनप्रतिनिधियों के धरना देने की परंपरा नहीं है।
इसके बाद कांग्रेसियों ने धरना समाप्त कर दिया। मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि वे दूसरी बार राज्यपाल को विधायकों की सूची भेजी है। मंत्रिपरिषद की बैठक बुलाकर सदन बुलाने के लिए दोबार प्रस्ताव भी राज्यपाल को भेजा है। वहीं हाइकोर्ट ने जिस तरह सदन के बाहर विधायकों पर किसी बैठक में न पहुंचने को लेकर यह पूछा कि सदन के बाहर गए हुए विधायकों को कांग्रेस की बैठक में आने के लिए व्हिप कैसे जारी किया जा सकता है। विधायकों को संविधान के तहत अभिव्यक्ति और असहमति की आजादी से नहीं रोका जा सकता है। यह कहकर हाइकोर्ट ने कांग्रेस के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों को एक तरह से संजीवनी मिल गई। उससे भी पायलट और उनके खेमे के विधायकों के हौसले बुलंद हो गए हैं।
इसके साथ ही सचिन पायलट ने अपने अधिवक्ता हरीष साल्वे के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को पक्षकार बनाने की जो याचिका दी है उसे सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दे दी है। अब केन्द्र सरकार की ओर से सालिसीटर अपना पक्ष रखने के लिए समय लेंगे। सत्ता का यह घमासान अब उस नाजुक दौर में पहुंच गया है कि यदि दस दिन के भीतर राज्यपाल फ्लोर टैस्ट के लिए आदेश दे देते हैं, तब तो बाजी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पक्ष में हो जाएगी। यदि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान 15 दिन से अधिक एक महीने का समय लग गया तो ऐसी संभावना है कि तमाम कांग्रेसी विधायक पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के पक्ष में आ जाएंगे। ऐसी स्थिति में अशोक गहलौत को अपनी सरकार बचाना मुश्किल हो जाएगा।
मालूम हो सचिन पायलट ने गहलोत से विवाद के चलते अपने साथ 30 विधायक होने की घोषणा की थी। लेकिन वे अपने साथ कुल अपने सहित 19 विधायकों को ही अपने खेमे में रख पाए। जिससे उनकी दावेदारी कमजोर पड़ी, लेकिन जिस तरह से मुख्यमंत्री गहलोत कांग्रेसी विधायकों को होटल में रखकर लाखों रुपए प्रतिदिन खर्च कर रहे हैं यदि यह सिलसिला सुप्रीम कोर्ट में मामले के चलते ज्यादा दिनों तक चला तो फिर गहलोत को अपने पक्ष में विधायकों को ज्यादा दिन तक रोके रखना मुश्किल हो जाएगा। फिर बाजी पलट सकती है।

संजय श्रीवास्तव-प्रधानसम्पादक एवम स्वत्वाधिकारी, अनिल शर्मा- निदेशक, डॉ. राकेश द्विवेदी- सम्पादक, शिवम श्रीवास्तव- जी.एम.

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