चतुर सीओ की चाल में फंस गए एसपी

पूर्व पुलिस अधीक्षक/ मलाई दार पोस्ट पर तीन वर्ष से जमा दगा बाज सीओ

सीओ सन्तोष ने पटेल जाति के दो कोतवाली प्रभारियों के खिलाफ एसपी के कान भरे
उरई और कालपी में कोतवाल तैनात करने में लिया सुविधा शुल्क
बालू में हर प्रकार की अवैध कमाई को लेकर झांसी मण्डल के आइजी ने सीओ सन्तोष को किया था खासा बेइज्जत मगर उसे शर्म नहीं आयी
पटेल इंस्पेक्टरों की लखनऊ में सत्ता के गलियारे में है ऊंची पहुंच
चैकी से सजातीय दरोगा को लाइन हाजिर करने से नाराज हो गए थे कालपी विधायक
“बेइज्जती प्रूफ” है सीओ सिटी सन्तोष
बीते कार्यकाल में अनेक सीओ का जिला अथवा कार्यक्षेत्र बदला मगर तीन वर्ष से जमा सन्तोष नहीं बदला

उरई(जालौन): मृदुभाषी एसपी डा0 सतीश कुमार को सीओ उरई ने अपनी चालों में ऐसा फंसाया कि अन्ततः उन्हें सीओ के कारण जिले से होना पड़ा रुखसत। एसपी डा0 सतीश कुमार का जिले में सिर्फ नौ माह का कार्यकाल रहा। मगर इस छोटी सी अवधि में उन्होंने अपनी शालीनता की छाप लोगों में छोड़ी।
उरई सर्किल में तीन साल से सीओ सिटी की कुर्सी पर जमा सन्तोष कुमार कैसे भी कमाई करने में जनता में खासा कुख्यात है। वह पिछले तीन वर्षों से जिले में अपनी मोटी कमाई के बल पर जमा हुआ है। सीओ सन्तोष कुमार ने अपनी मीठी मीठी बातों से एसपी डा0 सतीश कुमार का करीब होता चला गया और फिर वह उरई का सीओ होने के बावजूद बालू की अवैध कमाई का स्वर्ग कहे जाने वाले क्षेत्र कालपी में यानि दूसरे सीओ के क्षेत्र में अनधिकृत रूप से अकसर रात में पहुंचकर और बालू माफियाओं के साथ मिलकर हर तरह से अवैध कमाई में जुटा रहता था। जब सीओ की अवैध कमाई की चर्चा आम होने लगी और बदनामी का पानी सिर के ऊपर जाने लगा तो पिछले दिनों झांसी मण्डल के आइजी सुभाष बघेल ने पुलिस लाइन में पुलिस कर्मियों की बैठक में सीओ उरई सन्तोष कुमार को जमकर फटकारा था।
मालूम हो सीओ उरई सन्तोष कुमार ने एसपी डा0 सतीश कुमार से अपनी नजदीकियों का लाभ उठाते हुए कोतवाल कालपी मानिक चन्द्र पटेल के खिलाफ खूब कान भरे और अन्ततः मानिक चन्द्र पटेल का ट्रांसफर एसपी कार्यालय में करवा दिया। जहां बाद में एसपी ने इंस्पेक्टर मानिक चन्द्र पटेल को अपना पीआरओ बना लिया। जिले में यदि कमाई की दृष्टि से देखा जाय तो कालपी कोतवाली में कोतवाल की पोस्टिंग सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। क्योंकि कालपी कोतवाली क्षेत्र में बालू की सबसे ज्यादा अवैध कमाई होती है। इसलिए हर इंस्पेक्टर कालपी कोतवाली में पोस्टिंग के लिए लार टपकाता रहता है।
चर्चा यह है कि सीओ उरई सन्तोष कुमार की कालपी में होने वाली बालू की अवैध कमाई में जब कोतवाली प्रभारी मानिक चन्द्र पटेल अड़ंगा लगाने लगे तो अवैध कमाई के चतुर खिलाड़ी सीओ उरई ने एसपी की नजदीकी का फायदा उठाते हुए तत्कालीन कोतवाल मानिक चन्द्र पटेल के खिलाफ एसपी के कान भरे और उनका स्थानान्तरण कालपी कोतवाली से करवा दिया। उनकी इस हरकत से भाजपा के पटेल समाज के नेता नाराज न हो जांय, इसलिए शिव गोपाल पटेल को कालपी स्थानांतरित कर दिया। यह चर्चा जोरों पर है कि पोस्टिंग कराने के मामले में सीओ उरई ने सुविधा शुल्क भी खाया है।
सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि एक सर्किल का क्षेत्र का सीओ दूसरे के क्षेत्र में जाकर बालू माफियाओं से मिलकर अवैध कमाई कैसे कर रहा था और उसके खिलाफ वरिष्ठ अधिकारियों ने कड़ी कार्यवाही क्यों नहीं की। उधर उरई के कोतवाल शिव गोपाल पटेल उरई से हटाए जाने पर नाराज थे। जिसका परिणाम यह हुआ कि मानिक चन्द्र पटेल और शिव गोपाल पटेल जिनकी लखनऊ में भाजपा की सत्ता के गलियारे में अच्छी पहुंच बताई जाती है। उन्होंने एसपी के खिलाफ गोपनीय रूप से शिकायतें पहुंचाईं। इस प्रकरण में आग में घी का काम ज्ञान भारती चैकी कालपी के दरोगा गोकुल सिंह को एसपी द्वारा लाइन हाजिर करना भी रहा।
चर्चा यह है कि गोकुल सिंह क्योंकि कालपी के भाजपा विधायक नरेन्द्र सिंह जादौन के खास माने जाते थे और गोकुल सिंह भी सीओ उरई के द्वारा कालपी में बालू माफियाओं से अवैध उगाही में सीओ उरई का सहयोग नहीं कर रहे थे। इसलिए सीओ ने एसपी से कहकर गोकुल सिंह को लाइन हाजिर करवाया था। जिससे नाराज होकर भाजपा के कालपी क्षेत्र के विधायक नरेन्द्र सिंह जादौन ने एसपी की शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की थी। चर्चा यह है कि पटेल इंस्पेक्टरों को हटाना और विधायक के चहेते दरोगा गोकुल सिंह को लाइन हाजिर करना एसपी डा0 सतीश कुमार की गले की फांस बन गया और सीओ उरई सन्तोष कुमार के कृत्यो का भुगतान एसपी डा0 सतीश कुमार को अपना पद गवांकर चुकाना पड़ा और उन्हें नौ माह में ही जिले से जाना पड़ा।

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