चुनाव से पहले कि कूटनीति में जुटे अखिलेश

सेंधमारी में जुटे कूटनीति के दिग्गज सपा नेता

भाजपा के पिछड़े और अति पिछड़े वोट बैंक में सपा योजना बद्ध सेंध लगाने में जुटी
अखिलेश यादव स्वयं पिछड़े और अति पिछड़े नेताओं को तरजीह देने में जुटे
पिछड़ों, अति पिछड़ों की वजह से ही भाजपा को वर्ष 2017 के वि.स. चुनाव में मिली थी 326 सीटें
अनिल शर्मा+संजय श्रीवास्तव+डॉ. राकेश द्विवेदी
लखनऊ: राजनीति में कूटनीति के चाणक्य के रूप में स्थापित मुलायम सिंह यादव के पुत्र और उनकी राजनीतिक विरासत के वारिस समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वर्ष 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अभी से राजनीति की सतरंजी बिसात पर बड़ी खामोशी के साथ सधी चालें चलना शुरू कर दी हैं। उन्हें अच्छी तरह से मालूम है कि उत्तरप्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में मुस्लिम समाज का वोट एक तरफा उन्हें मिलने वाला है। क्योंकि जिस तरह से बसपा सुप्रीमो सुश्री मायावती ने जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर धारा 370 और 35A हटाये जाने के मामले में केंद्र सरकार का खुलकर विरोध नहीं किया। इसी तरह दिल्ली के शाहीन बाघ इशू पर भी बसपा सुप्रीमो और उनकी पार्टी का स्टैंड मुस्लिमों के बहुत पक्ष में नहीं रहा। इसके चलते यह लगभग तय है कि आगामी विधानसभा चुनाव में अपलसंख्यकों का लगभग एक मुस्त वोट अखिलेश यादव और उनकी समाजवादी पार्टी की ही ओर जाएगा। रही बात पिछड़े वर्ग की सबसे मार्शल कौम यादव बिरादरी के वोट बैंक का बंटवारा विधानसभा चुनाव में करने की हैसियत में कोई राजनीतिक दल नहीं है। इसलिए अखिलेश यादव और किचन कैबिनेट के सिपहसालारों की एक ही राय है कि उत्तरप्रदेश के विधानसभा चुनाव के पूर्व यादव बिरादरी के अति उत्साह को थोड़ा थामकर रखा जाए। जिस तरह से भाजपा के शीर्ष और प्रांतीय नेताओं ने पिछड़े और अति पिछड़े वर्ग को केंद्र में रखकर विधानसभा चुनाव लड़ा था और उस समय भाजपा के सिर्फ दो ही मुद्दे जनता के सामने रखे गए थे। एक गुंडागर्दी और माफिया गिरी का अंत, दूसरा भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की बात। जनता काफी समय से कांग्रेस, बसपा, सपा की सरकारें देख चुकी थी। इसलिए उसने लंबे लगभग ढाई दशक बाद भाजपा को एक और मौका दिया। इसमे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चमत्कारिक व्यक्तित्व तो था ही प्रदेश की जनता गुंडा गर्दी माफिया गिरी जातिवाद और इसके साथ साथ जातिवाद का प्रभाव शासन, प्रशासन और पुलिस में चरम में पहुंचता देख चुकी थी। इसके बाद भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष के रूप में केशव प्रसाद मौर्या जो पिछड़ों एवं भाजपाईयों तथा विश्व हिंदू परिषद का भी चर्चित चेहरा थे। क्योंकि उनको विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल(अब स्वर्गीय) का भी आशीर्वाद प्राप्त था। इसका परिणाम यह हुआ कि पहली बार उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा को पिछड़ों, अति पिछड़ों, दलितों के साथ-साथ सवर्णों का भी भारी संख्या में वोट मिला। और प्रदेश के इतिहास में भाजपा को अपने विधायकों की संख्या 326 करने और दो तिहाई बहुमत पाने में सफल हो गयी। भाजपा के शासन में गुंडा गर्दी, माफिया गिरी में तो रोक लगी लेकिन भ्रष्टाचार के मामले में पिछली सरकारों के मुकाबले भाजपा के शासन में अधिकांश सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार कई गुना ज्यादा बढ़ गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने एन वक्त पर गेरुआ वस्त्र धारी कट्टर हिंदूवादी नेता योगी आदित्यनाथ को अचानक मुख्यमंत्री बनवा दिया। जिससे पूरे हिन्दू समाज को बहुत उम्मीद बंधी। लेकिन एक ही साल के भीतर पिछड़ों, अति पिछड़ों और दलितों को सत्ता और संगठन में वह महत्त्व नहीं मिला जो सोचकर उन्होंने भाजपा को बम्पर जीत दिलाई थी। इतना ही नहीं सत्ता के गलियारों में यह चर्चा आम होने लगी कि शासन और प्रशासन में योगी जी की जाती का ही वर्चस्व है। जबकि संघ की विचारधारा के हिसाब से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जो गेरुआ वस्त्र धारी सन्यासी हैं उनका वरदहस्त पूरे हिंदू समाज को मिलना चाहिए था। भाजपा में पिछड़ों और दलितों की इस तकलीफ को भांपकर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पिछड़ों, अति पिछड़ों को अपने पक्ष में करने की रणनीति बनाई है। उनकी दूसरी गोपिनीय रणनीति दलितों को सपा से जोड़ने की है।
बहराल सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम जो कुर्मी बिरादरी के हैं, राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा सांसद विशम्भर निशाद, वरिष्ठ नेता राजपाल कश्यप, वरिष्ठ नेता दयाराम प्रजापति, वरिष्ठ नेता लोटनराम निशाद, वरिष्ठ नेता राम अश्रे कुशवाहा, वरिष्ठ नेता रामलखन प्रजापति, वरिष्ठ नेता राजेन्द्र चौधरी, वरिष्ठ नेता साहब सिंह सैनी को वर्ष 2020 से लेकर मार्च 2021 तक पिछड़े, अति पिछड़े के बीच नई जमीन तौयार करने और उन्हें पार्टी में महत्त्व मिलेगा ये समझाने का काम सौंप दिया है। कोरोना महामारी में कमी आते ही पिछड़े, अति पिछड़े वर्ग के सपा सम्मेलन प्रदेश में तेजी से शुरू हो जाएंगे।
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