जब वरुण गांधी मुख्यमंत्री बनते बनते रह गए

मंत्रालय में अच्छा काम करने के बावजूद माँ मेनका गांधी को 2019 में नहीं बनाया मंत्री

संघ का शीर्ष नेतृत्व वरुण गांधी की उग्र हिन्दू छवि से था प्रसन्न

प्रधानमंत्री मोदी ने भी वरुण गांधी को दे दी थी हरी झंडी

संघ के प्रचारक तथा भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री संगठन संजय जोशी के कारण बिगड़ा खेल

अनिल शर्मा+संजय श्रीवास्तव+डॉ. राकेश द्विवेदी
दिल्ली+लखनऊ: बात वर्ष 2016 की है केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के पुत्र और उग्र हिन्दू छवि वाले भाजपा के नेता तथा सुल्तानपुर से सांसद वरुण गांधी को उत्तरप्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने के लिए संघ के शीर्ष अधिकारी तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्वीकृति दे दी थी। लेकिन नरेंद्र मोदी और संजय जोशी के बीच 36 का आंकड़ा होने के कारण ऐन वक्त पर वरुण गांधी की जगह उग्र हिन्दू वादी नेता की छवि वाले गोरखपुर के सांसद योग आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री का ताज पहनाया गया। मालूम हो कि गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन संजय जोशी के बीच गुजरात में ही 36 का आंकड़ा शुरू हो गया था। लड़ाई बढ़ते बढ़ते यहां तक पहुँची की वर्ष 2011 मे मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और संजय जोशी के बीच टकराव इतना बढ़ गया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्ष नेतृत्व को भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन के पद से श्री जोशी को हटाना पड़ा। उनकी जगह राम लाल को भाजपा का राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बनाया गया था। इसी बीच भाजपा के राष्ट्रीय नेता नितिन गडकरी को वर्ष 2012 में भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। इधर कुछ ऐसी स्थितियां बानी कि प्रधानमंत्री पद के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने भाजपा के शीर्ष नेता पूर्व उपप्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय कैबिनेट मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी के खुले विरोध के बावजूद संघ के शीर्ष नेतृत्व की सहमति से भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन राम लाल और केंद्रीय पदाधिकारियों की मौजूदगी में नरेंद्र मोदी को वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद के लिए भाजपा का दावेदार घोषत किया। इसके बाद मुंबई में हुए भाजपा के राष्ट्रीय सम्मेलन में भाजपा के सैकड़ों पदाधिकारियों और हज़ारों कार्यकर्ताओं ने इस निर्णय का तालिया बजाकर जय श्री राम का जय घोष करके इस निर्णय का जोर दार स्वागत किया। इस दौरान नरेंद्र मोदी के प्रभावशाली भाषण से देश भर से आये भाजपा के कार्यकर्ताओं का जिश उत्साह दोगुना हो गया। यहीं से लोकसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में बयार बहना शुरू हो गयी। वरुण गांधी के पक्ष में स्थितियां कैसे बानी इसके लिए हमे थोड़ा पीछे जाना होगा। भाजपा के राष्ट्रीय नेता नितिन गडकरी जब वर्ष 2012 में राष्ट्रीय अध्यक्ष बने तो उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन के पद से हटाए गए संजय जोशी को उत्तरप्रदेश भाजपा का प्रदेश प्रभारी नियुक्त कर दिया। इस दौरान वरुण गांधी मेनका गांधी, संजय जोशी के संपर्क में आये और उन्होंने उत्तरप्रदेश में भाजपा का मुख्यमंत्री का चेहरा कोन हो ये ताना बाना बुनना शुरू कर दिया। प्रदेश प्रभारी के नाते संजय जोशी ने वर्ष 2012 से 2014 तक उत्तरप्रदेश में प्रवास किया और विभिन्न जिलों में पदाधिकारियों के साथ पुराने और नए कार्यकर्ताओं से भेंट की। इस दौरान उन्होंने जिलों में विधानसभा वार कौन नेता जनाधार वाला है इसकी सूची तैयार कर ली। इसके बाद वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में जब श्री मोदी और उसके सहयोगी संगठन को राजग को जब स्पष्ट बहुमत मिल गया और मोदी को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई गई तो सूत्र बताते हैं कि श्री मोदी ने संघ के शीर्ष नेतृत्व के सामने एक शर्त रखी कि संघ के प्रचारक एवं उत्तरप्रदेश के भाजपा प्रभारी संजय जोशी को जबतक सभी पदों से मुक्त नहीं कर दिया जाएगा। वे प्रधानमंत्री के रूप ने कार्य शुरू नहीं करेंगे। इसके बाद वर्ष 2014 में संजय जोशी को सभी पदों से मुक्त कर दिया गया।
लेकिन सत्ता के 2 वर्ष बाद तक यानी वर्ष 2016 मे जब प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी रामजन्म भूमि अयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण के लिए जब कोई ठोस प्रगति न दिखा सके तो संतों में और संघ के शीर्ष नेतृत्व में भी नाराजगी होने लगी। यह नाराजगी उस समय और बढ़ गयी जब जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर भी प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र सरकार जब कुछ ठोस नहीं कर पाई तो ये नाराजगी और बढ़ गई।
उत्तरप्रदेश में उस समय समाजवादी पार्टी की पूर्ण बहुतमत की सरकार थी और युवा चेहरा अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे। संघ को चिंता यह थी कि उत्तरप्रदेश में जहां 403 विधानसभा सीटे हैं तथा लोकसभा की 80 सीटें हैं। और भाजपा की केंद्र सरकार ऐसा कुछ अभी तक नही कर पाई जिससे उत्तरप्रदेश का हिन्दू मतदाता भाजपा की ओर वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में आकर्षित हो। 2017 में विधानसभा चुनाव तय थे और संघ नेतृत्व को ऐसे नेता की तलाश थी, जिसकी छवि उग्र हिन्दू वादी की हो। इसलिए संघ के शीर्ष नेतृत्व ने यह रणनीति बनाई कि स्वर्गीय संजय गांधी एवं केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के सुपुत्र वरुण गांधी को उत्तरप्रदेश का मुख्यमंत्री का चेहरा बनाकर वर्ष 2017 का विधानसभा चुनाव क्यों न लड़ा जाए। संसद वरुण गांधी की छवि तबतक उग्र हिन्दु वादी नेता की बन गयी थी। संघ नेतृत्व को यह भी लग रहा था कि इस तरह से उत्तरप्रदेश में वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा नेता अखिलेश यादव को स्पष्ट बहुमत मिला था। तो संजय गांधी के पुत्र होने के कारण वरुण गांधी कांग्रेस के वोटों में भी अपने पिता की तरह आक्रामक छवि के कारण कांग्रेस के वोटों में भज सेंध लगाने में सफल हो जाएंगे। इस बीच संघ के शीर्ष नेतृत्व ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तरप्रदेश के प्रभारी अमित शाह से भी वरुण गांधी को उत्तरप्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने की सहमति ले ली थी। लेकिन इस अभियान में संघ के एक दो शीर्ष अधिकारियों से एक दो चूक ही गईं। उन्होंने वरुण गांधी को वर्ष 2017 के उत्तरप्रदेश के विधानसभा चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए संघ के प्रचारक संजय जोशी को गोपिनीय ढंग से इस अभियान में लगा दिया। संजय जोशी ने फिर से अयोध्या, मथुरा, काशी, झाँसी, चित्रकूट सहित उत्तरप्रदेश के अधिकांश जिलो में किसी बहाने से प्रवास किया। भाजपा के पुराने और नए उपेक्षित कार्यकर्ताओं से भेंट की और विधानसभा वार नेताओं की फिर से सूची बनाई और वह सूची वरुण गांधी को दी। संजय जोशी तब नार्थ एवेन्यू में एक सांसद के आवास में रहते थे। और उत्तरप्रदेश के चुनाव को लेकर वरुण गांधी, संजय जोशी और कभी कभी मेनका गांधी की गोपिनीय और गहन मंत्रणा होती थी। लेकिन इसकी भनक नरेंद्र मोदी और अमित शाह को हो गई। उन्होंने तत्काल पलटवार करते हुए संघ के शीर्ष नेतृत्व को वरुण गांधी की जगह कोई दूसरा नाम खोजने और संजय जोशी को उत्तरप्रदेश के चुनाव से हटाने का वीटो लगा दिया। जिसके बाद वरुण गांधी और संजय जोशी को यूपी से किनारे कर दिया गया। और भाजपा ने उत्तरप्रदेश में वर्ष 2017 का विधानसभा चुनाव बिना किसी मुख्यमंत्री के चेहरे के लड़ा। पूरा चुनाव नरेंद्र मोदी के नाम पे लड़ा गया। भाजपा को उत्तरप्रदेश के विधानसभा चुनाव में बम्फर जीत मिली। तब प्रधानमंत्री की ओर से रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के नाते केशव प्रसाद मौर्या का नाम मुख्यमंत्री की दौड़ में सबसे आगे हो गया। लेकिन संघ के शीर्ष नेतृत्व ने ऐन वक्त पर वीटो लगाकर कट्टर हिन्दू वादी नेता की छवि वाले गोरक्छ पीठाधीश्वर और गोरखपुर से भाजपा के सांसद योगी आदित्यनाथ का नाम फाइनल कर दिया। उस समय भाजपा के लखनऊ कार्यालय में द यंग भारत मौजूद था। और उस समय 15 मिनट पहले तक देश भर की इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया को मनोज सिन्हा और केशव प्रसाद मौर्या के अलावा मुख्यमंत्री पद पर कोई और नाम है इसकी जानकारी तक नहीं थी। लेकिन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने जैसे ही योगी आदित्यनाथ के नाम की घोषणा की तो सारी मीडिया में आश्चर्य छा गया और फौरन ही उत्तरप्रदेश के नए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बने, यह ब्रेकिंग न्यूज़ सभी टीवी चैनलों में चलने लगी। इस तरह से वरुण गांधी वर्ष 2017 मे संजय जोशी के कारण उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री बनते बनते रह गए और उनकी माँ केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी जो महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की कैबिनेट मंत्री थीं और उनका कार्य बहुत ही अच्छा चल रहा था। लेकिन संजय जोशी के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2019 की अपनी कैबिनेट में उन्हें नहीं लिया।