जांच टीम को श्रमदानियों ने बताई घरार नदी पर श्रमदान की व्यथा

जांच टीम ने श्रमदानियों के लिए बयान
श्रमदानियों ने कहा 10 जून से 18 जून 2020 तक घरार नदी में हमने किया श्रमदान
ग्राम विकास के जेई ने स्वीकारा कि 21 जून से सिर्फ 1600 रुपए का मनरेगा का काम हुआ, जांच में श्रमदानियों की सच्चाई खुलकर सामने आई
न्याय न मिलने पर श्रमदानियों ने 8 जुलाई से ग्राम भांवरपुर से लखनऊ तक पैदल जा कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय मांगेगे
अनिल शर्मा+संजय श्रीवास्तव+डॉ. राकेश द्विवेदी
भांवरपुर (बांदा)। आज जिलाधिकारी अमित बंसल के आदेश पर तीन सदस्यीय जांच दल ग्राम भांवरपुर पहुंचा। जहां श्रमदानी महिला पुरुषों ने घरार नदी में बीती 10 जून से 18 जून तक हुए श्रमदान के बारे में विस्तार से जानकारी दी। जांच टीम ने प्रत्येक श्रमदानी के बयान लिए। इसके बाद जांच टीम ने श्रमदानियों को बताया कि वे अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को देंगे। जो 7 जुलाई को इस रिपोर्ट की घोषणा करेंगे। उधर श्रमदानियों ने जांच टीम से दो टूक कहा कि यदि 7 जुलाई की शाम तक हमें जांच रिपोर्ट न मिली तो हम 8 जुलाई 2020 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय मांगने के लिए ग्राम भांवरपुर से लखनऊ तक पैदल मार्च करेंगे और तब तक वहां डेरा डाले रहेंगे, जब तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट नहीं हो जाती। उन्हें अपनी व्यथा बताकर उनसे न्याय की गुहार लगाएंगे।
जिलाधिकारी अमित बंसल के निर्देष पर आज 3 सदस्यीय जांच दल जिसमें डीपीआरओ संजय यादव, अधिशाषी अभियंता मोहम्म्द शमीम तथा डिप्टी कमिश्नर मनरेगा वेद प्रकाश थे। वे आज रविवार को करीब साढ़े ग्यारह बजे दिन में ग्राम भांवरपुर पहुंचे। जहां पहले उन्होंने ग्राम प्रधान राम नरेश सिंह, सचिव, तथा बीडीओ मनोज कुमार के साथ अन्य ग्राम से आए मनरेगा मजदूरों से वार्ता की, उनसे मनरेगा के कार्याें की बात पूछी। इसके बाद जांच दल घरार नदी पहुंचा। जांच दल ने 52 श्रमदानियों से श्रमदान के बारे में पूछा। इस पर श्रमदानी बबिता, रानी, चन्दा, ललिता, बृज रानी, सिया प्यारी, आशा, चम्पा, रंची, पुनीता, रूबिया, राजाबाई, रुकमिनी, प्रेमा, राम सजीवन, सुख नन्दन, नत्थू प्रसाद, अयोध्या सहित 52 महिला पुरुष श्रमदानियों ने प्रसिद्ध समाजसेवी राजा भइया, मुक्ति चक्र पत्रिका दिल्ली के संपादक गोपाल गोयल, अशोक निगम, यंग भारत तथा तमाम अन्य वरिष्ठ पत्रकारों की मौजूदगी में जांच दल को बताया कि वे लोग कोरोना महामारी में लॉकडाउन 2, 3 के दौरान पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र आदि प्रदेशों में जहां वे काम करते थे। अपने गांव भांवरपुर पैदल चलकर आए थे।
जहां कई दिन बाद उन्होंने प्रसिद्ध समाजसेवी राजा भइया को गांव में बुलाकर वार्ता की थी। इसके बाद गांव में एक दशक से सूखी पड़ी घरार नदी को पुनर्जीवित करने का निर्णय बीती 8 जून को घरार नदी के तट पर हुई बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया था। इसके बाद 10 जून से सूखी नदी पर श्रमदान का कार्य प्रारम्भ हुआ। सूखी नदी पर उगे बेशरम व झाड़ झंखाड़ को जड़ से उखाड़ने के बाद जब हम प्रवासी मजदूर श्रमदानियों ने घरार नदी से 3-3 फुट मलवा निकाला तो उससे जल स्रोत फूट पड़े। देखते ही देखते नदी में 3 से 4 फुट तक पानी आ गया। जब यह खबर ग्रामीणों को पता चली, तो वे दौड़े दौड़े आए। बुंदेली परम्परा के अनुसार नदी के पुनर्जीवित होने और श्रमदान को प्रोत्साहन देने के लिए आसपास के आधा दर्जन गांव के लोग खाद्यान्न लेकर आए। 13 जून से घरार नदी के तट पर मेला जैसा लग गया। महिलाओं ने लोकगीत गाते हुए सामूहिक रसोई बनाई। जबकि कीर्तन पार्टियां श्रमदानियों में जोश बढ़ाती रहीं।
17 जून को केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के एक मित्र ने घरार नदी के श्रमदान के फोटो व वीडियो लेकर मंत्रीजी को भेजे। मंत्री श्री शेखावत ने जल शक्ति मंत्रालय के साथ-साथ इन्हें उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी भेजा। इसके बाद 19 जून को मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव अवनीश चन्द्र अवस्थी से मंत्रणा करके सभी 52 श्रमदानियों को भागीरथ पुरस्कार देने की घोषणा की। इससे बांदा जिले के ग्राम विकास विभाग में हड़कम्प मच गया। 19 जून को शाम 4 बजे बीडीओ नरैनी मनोज कुमार ने आनन-फानन में घरार नदी के तट पर मनरेगा का बोर्ड लगवा दिया। जिसमें नाले के कार्य के लिए 74473 रुपए का बजट भी दर्ज है। लेकिन मनरेगा यह कार्य कब शुरू होगा और कब खत्म होगा, बोर्ड में यह नहीं लिखा है।
आज श्रमदानी महिला पुरुषों ने गंगा की कसम खाकर कहा कि बीडीओ हमें 4, 5 दिन की मजदूरी मनरेगा से फ्री में दिवांवें का कहे रहे हैं, गंगा की कसम खाके हम कहत हन कि साहब हमें बेइमानी का पइसा न चाही। हमने घरार नदी में श्रमदान करो है ये बात हम मरते दम तक कहत रैहें। इस दौरान ग्राम विकास विभाग के जेई शिव शरण ने श्रमदानियों और जांच दल के सामने ये बताया कि घरार नदी पर 21 जून से ही मनरेगा का काम मस्टररोल में दिखाया है। जो अब तक मात्र 1600 रुपए का हुआ है। जबकि श्रमदानी 10 जून से 18 जून 20 तक ही घरार नदी में श्रमदान की बात कह रहे हैं। जांच दल के सामने यह बात खुलकर आ गई कि श्रमदानियों ने घरार नदी पर 10 से 18 जून तक श्रमदान किया।