जांच समिति ने श्रमदान को स्वीकारा

पन्ना की पहाड़ी में गए बिना ही जांच दल ने घरार नदी को नाला बताया
आक्रोशित श्रमदानी अर्धनग्न होकर मुख्यमंत्री से न्याय मांगने पड़ यात्रा कर लखनऊ जाने पर रणनीति बनाने में जूटे
अनिल शर्मा+संजय श्रीवास्तव+डॉ. राकेश द्विवेदी
भांवरपुर(बाँदा): बाँदा जिले के नरैनी ब्लॉक के भांवरपुर गांव में 52 श्रमदानियों द्वारा 10 से 18 जून 2020 के बीच श्रमदान करके एक दशक से सूखी पड़ी घरार नदी को जिस तरह से पुनर्जीवित किया गया। उसकी चर्चा केंद्रीय जलशक्ति मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इन श्रमदानियों को भागीरथ सम्मान से सम्मानित करने की घोषणा भी कर चुके हैं। लेकिन नरैनी के बीडीओ और ग्राम विकास विभाग ने इस श्रमदान को जैसे खारिज करने का मन ही बना लिया था। लेकिन चाहे आजतक हो, एबीपी न्यूज़ हो, लखनऊ के कई इलेक्ट्रॉनिक चैनल हों, नव भारत टाइम्स हो, द यंग भारत हो, अमर उजाला हो, दैनिक जागरण हो, हिंदुस्तान हो, लोक भारती हो, मुक्ति चक्र हो यानी अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया ने 10 से 18 जून प्रतिदिन श्रमदानियों के श्रमदान का कवरेज किया। जिसका परिणाम यह हुआ कि ग्राम विकास विभाग चाह करके भी श्रमदान को नकार नही पाया। जिला प्रशासन के द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच दल ने जो रिपोर्ट जिलाधिकारी को दी है। उसमें जांच दल ने स्वीकार किया है कि 265 मीटर क्षेत्र में श्रमदानियों ने श्रमदान किया है। जबकि 21 जून से कुल 65 मीटर क्षेत्र में मनरेगा का कार्य हुआ है, जो मात्र 1600रु का है। इस रिपोर्ट से श्रमदानियों में आक्रोश है कि जांच दल ने उनके श्रमदान को तो माना लेकिन इस घरार नदी पर उन्होंने ढाई किलोमीटर तक श्रमदान किया है। वह मात्र 265 मीटर तक कैसे सिमट गया। श्रमदानियों ने यह भी कहा है कि जांच दल पन्ना की पहाड़ियों में नहीं गया। जहां से घरार नदी निकली है। और हमारी प्राचीन नदी को जांच दल ने नाला कैसे बता दिया। बहराल ये आक्रोशित श्रमदानी मुख्यमंत्री से न्याय मांगने के लिए अर्धनग्न होकर ग्राम भांवरपुर से लखनऊ तक पद यात्रा के लिए दृढ़ हैं और उसकी रणनीति बना रहे हैं। श्रमदानियों ने कहा इस बार उनके साथ जिले के तमाम श्रमदानी भी इस पद यात्रा में शामिल होंगे। श्रमदानियों ने कहा जिस तरह से बीडीओ नरैनी ने बिना मनरेगा का काम शुरू हुए घरार नदी के तट पर मनरेगा के जबरियां बोर्ड लगवाया। जिस तरह से उस बोर्ड में बाद में 21 जून की तारीख डलवाई। जांच दल और श्रमदानियों के सामने ग्राम विकास विभाग के जेई शशि भूषण ने यह खुलासा कर दिया था कि उसने 21 जून को मस्टररोल इशू करवाये हैं। इतने झूँठ पकड़ जाने के बाद ग्राम विकास विभाग शासन स्तर से अपने विरुद्ध कार्यवाही होने की संभावना से डरा हुआ है। इसलिए उसने एन-केन प्रकारेण वह प्राचीन घरार नदी को नाला लिखवाने में और ढाई किलोमीटर के श्रमदान को 265 मीटर तक सीमित करवाने में सफल हो गया। लेकिन श्रमदानियों ने कहा है कि प्रदेश के न्याय प्रिय मुख्यमंत्री ग्राम विकास विभाग के दोषी अधिकारियों को सजा देंगे। इसके अलावा विधिक प्राधिकरण के न्यायिक अधिकारी की जांच अभी शेष है। उनकी जांच से भी सच्चाई खुलकर आ जायेगी। श्रमदानियों ने कहा कि वो प्राचीन घरार नदी और वास्तविक किये गए श्रमदान की लड़ाई को लड़ते रहेंगे।