जालौन में पहली बार किसान ने टिश्यू कल्चर से की केले की खेती

अपने केले के खेत में किसान बृजेश त्रिपाठी

किसानों के प्रेरणास्रोत बने बृजेश
अकोड़ी बैरागढ़ के किसान ने मुनाफा देखकर रकबा बढ़ाने का लिया निर्णय
बोले- मुनाफा अच्छा, इसीलिए आगे बढ़ाऊंगा खेती का रकबा

उरई: सूखे का दंश झेल रहे बुंदेलखंड के किसानों ने परंपरागत खेती को छोड़कर नई और वैज्ञानिक खेती कर तरक्की की नई कहानी गढ़ रहे हैं। जालौन के उरई तहसील के गांव अकोड़ी बैरागढ़ के रहने वाले किसान बृजेश त्रिपाठी उनमें से एक हैं, जिन्होंने महाराष्ट्र की प्रसिद्ध केले की प्रजाति जी-9 उगाकर लाभ कमाने में जुट गए हैं। वे जिले के पहले किसान हैं, जिन्होंने टिश्यू कल्चर से एक हेक्टेयर में केले की खेती की है। मुनाफा देखकर वे काफी खुश हैं। इस साल उन्होंने इसका रकबा बढ़ाने का निर्णय लिया है।

साल 2019 में पहली बार की खेती
किसान बृजेश त्रिपाठी ने बताया कि वे महाराष्ट्र के जलगांव गए थे। वहां पर उन्होंने केले की बागवानी देखी। जिसे देखकर उन्होंने अपनाने का निर्णय लिया। साल 2019 के अगस्त में उन्होंने अपने खेत में एक हेक्टेयर जमीन पर केले के पौधे लगाए। इस खेती में उन्होंने कोई भी रसायनिक खाद का प्रयोग नहीं किया। बल्कि घर और गांव में मिलने वाली गोबर खाद का प्रयोग किया। वर्तमान में उनके एक पौधे में 25 से 35 किलो की घार (फलों का गुच्छा) लगा है। उत्पादन को देखकर वे इस समय फूले नहीं समा रहे हैं।

यूट्यूब से सीखा कैसे फसल को उन्नत बनाया जाए

पिता ब्रजेश त्रिपाठी के काम में उनका बेटा अतुल त्रिपाठी पूरा सहयोग देने में लगा है। अतुल ने बताया कि वे केले की खेती को कैसे और उन्नत बनाया जाए, इसके लिए लगातार यूट्यूब पर नई-नई चीजें खोजते रहते हैं। पौधे की सिंचाई, जमीन की गुड़ाई और फिर उसमें खाद डालने का काम कैसे किया जाए, यह सबकुछ वैज्ञानिक तरीके से किया जाता है। समय समय पर कीटाणुनाशक दवाओं का भी छिड़काव किया गया। कहा कि, अगर इसी तरह से किसान परंपरागत खेती के साथ आर्थिक मुनाफा देने वाली फसल को अपनाएं तो बुंदेलखंड का भी किसान खुशहाल हो जाएगा।

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