जिम्मेदारों की नजरों के सामने ही सरकारी धन की बर्बादी का आलम

दुर्दशा का शिकार सुलभ शौचालय

कलैक्ट्रेट में शोपीस बना लाखो से निर्मित पर्यटन विभाग का शौचालय
वर्ष 2008 में कराया गया था सुलभ शौचालय का लोकापर्ण
उरई(जालौन)। आम लोगो की सुविधाओं के नाम पर खर्च सरकारी धन की सार्थकता की बात करें तो यह कम चैकाने वाली बात नही है कि कुछ कार्यकम और योजनायें वक्त से पहले ही दम तोड देती है। कलैक्ट्रेट परिसर में तकरीबन ढेड दशक पूर्व बनबाया गया सार्वजनिक शौचालय इसका जीता जागता प्रमाण है जो लोकापर्ण के बाद अपनी सार्थकता पर खरा उतरना तो दूर अपना अस्तित्व भी नही बचा पाया लाखो से निर्मित भवन की मौजूदा हालत यह है कि उपेक्षित हालत में अपनी दुर्दशा बयां कर रहा है।
कलैक्ट्रेट परिसर में आने जाने वाले लोगो की सुविधा को देखते हुये उ0प्र0 पर्यटन विभाग के सौजन्य से सार्वजनिक सुलभ शौचालय का निर्माण कराया गया था इसके पीछे एक मंशा यह भी थी कि यहां कलैकट्रेट में काम करने वाले विभिन्न कार्यालयों के कर्मचारियों को भी उक्त सुविधा मिल सके बहरहाल 2 जुलाई 2008 को उक्त शौचालय भवन का लोकार्पण तत्कालीन जिलाधिकारी रिगिजयान सैम्पिल के दारा कराया गया। जिस तरह से पर्यटन विभाग ने शौचालय को उस वक्त के मुताबिक आधुनिक संसाधन युक्त बनाने में खासा धन खर्च किया उसके देखते हुये उसकी सार्थकता लंबे समय तक और अधिक से अधिक लोगो को मिल पाती ऐसा देखने को नही मिला अब इसके पीछे क्या वजह रही यह अलग बात है लेकिन इतना साफ है कि अच्छा खसा धन खर्च करने के बाद भी उक्त शौचालय भवन की सार्थकता पूरी न हो सकी और आज मौजूदा हाल में वह अपनी दुर्दशा को बयां कर रहा है।
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