जिम्मेदारों को नही, सरकारी धन की बर्बादी की परवाह

लाखों से निर्मित शौचालय बंया करते कहानी

उरई(जालौन)। सरकारी योजनाओं को जनता की भलाई और उन्हें सुविधायें मुहैयां कराने के उदेश्य से क्रियान्वित किया जाता है। लेकिन कभी कभी इनकी जो तस्वीर सामने आती है वह एक साथ कई सवाल खडे कर देती है। यहां नगर में स्थापित कराये गये फाइवर निर्मित शौचालय इसकी जीती जागती मिशाल है। जो जिम्मेदारों की अनदेखी के चलतें सरकारी धन की बर्बादी की कहानी बंया कर रहे है।
गौरतलब हो कि विगत एक दशक के दौरान नगर के विकास और सौन्र्दयीकरण को लेकर जिला प्रशासन और नगर पालिका ने एक के बाद एक कई कार्य योजनाओं को अमली जामा पहनाया। जिनमें नगर को स्वच्छ रखने के लिये सुलभ काम्पलैक्स तथा जगह जगह फाइवर निर्मित शौचालय भी शामिल थे। मजे की बात तो यह है कि कई स्थानों पर निर्मित कराये गये शौचालय आंशिक तौर पर तो उपयोग में आये लेकिन बाद मे रख रखाब न होने के कारण वह उपेक्षित हो गये और कुछ ही समय बाद उनकी बर्बादी का मंजर शुरू हो गया। यह स्थिति नगर के कई शौचालयों की है जो सरकारी धन की बर्बादी के गवाह बने हुये है।
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