जिले में डरावना होता जा रहा है कोरोना

जिनके सैंपल पेंडिंग हैं उनकी बढ़ गई हैं धड़कने
जनपद में कुल 81 केस निकलने और अभी 36 एक्टिव होने से बढ़ रही हैं चिंताएं
जिला और पुलिस प्रशासन बचाव के लिए झोंक रहा है पूरी ताकत
संजय श्रीवास्तव
उरई: जालौन जनपद में प्रवासियों के वापिस आने के बाद से उनके द्वारा बरती गयीं लापरवाहियां न सिर्फ जनता बल्कि जिला और पुलिस प्रशासन पर भारी पड़ रही हैं।
अति संहारक विश्व व्यापी दुनिया मे भीषण जनहानि को अंजाम देने वाली कोरोना महामारी के एकाएक जोर पकड़ लेने से समाज मे भय का संचार कुछ अधिक ही होता जा रहा है। प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार जनपद में अबतक कुल 3157 लोगों की जांच की गई है। इनमे 28 सैंपल तो रिजेक्ट हो गए थे। अबतक कुल 2843 जांचों की रिपोर्ट आ चुकी हैं। जनपद में एक्टिव कोरोना संक्रमित मरीज अब बढ़कर 36 हो गए हैं। अभी भी 286 सैम्पलों की जांच रिपोर्ट पेंडिंग है। यही उन लोगों के लिए भय का कारण बन गया है। जिनके सैम्पलों की जांच अभी नही आई है। क्योंकि कोरोना मरीजों की संख्या में हो रहा इजाफा लंबित जांचों को लेकर लोगों की धड़कनें बढ़ा रहा है। खासतौर पर उनकी जिनके सैंपल अभी पेंडिंग हैं। भय का ग्राफ बढ़ने का कारण भी स्पष्ट है कि जनपद में कोरोना के मरीजों की संख्या और प्रतिशत दोनों ही बढ़ रहे हैं। काबिलेगौर है कि लॉक डाउन खुलने के बाद से सड़कों पर उमड़ी भीड़ द्वारा बचाव की किसी भी गाइडलाइन का पालन नहीं किया जा रहा है। कहना न होगा कि बढ़ी संख्या में नागरिक बाजार के ग्लैमर और अपनों से मिलने की ललक के चलते सुरक्षा के लिए बरती जाने वाली सावधानियों का उल्लंघन करने का मजा ले रहे हैं। तब वे यब भी भूल जाते हैं कि उनकी यह उदंडता जानलेवा भी हो सकती है। समाज के जागरूक लोगों द्वारा तो फिजिकल डिस्टेन्स का जहां पालन भी किया जा रहा है। और मास्क एवम सैनिटाइजर का उपयोग भी वे कर रहे हैं। किंतु कुछ पिछड़े क्षेत्रों में न तो लोग WHO का पूरी तरह से मतलब समझते हैं। न ही बचाव संबंधी गाइडलाइन को लेकर उनकी ज्यादा गंभीरता है। ये तो बस पुलिस के डंडे से ही नियंत्रित होते हैं। बचाव और नैतिकता की भावना से नहीं। ऐसी परिस्थितियों के चलते जनपद के नगरीय क्षेत्रों जैसे कोंच, कालपी, डकोर, कदौरा में कोविड-19 का संक्रमण फैल भी गया है। गांवों में कम केस उजागर हुए हैं। इसका सबसे बड़ा कारण बॉडी की इम्युनिटी पावर है। सभी जानते हैं कि पूरी तरह से ग्रामीण परिवेश में रहने वाले लोग मौसम की परवाह किये बिना कड़ी मेहनत करते हैं। और उनकी खुराक भी सादा और अच्छी होती है। वे फास्ट फूड आदि का प्रयोग भी नहीं करते। इसी वजह से उनकी इम्युनिटी पावर भी अच्छी है। जो उनका इस खतरनाक दौर में सुरक्षा कवच बना हुआ है।
जनपद में कोरोना संक्रमण बढ़ा है। मरीज भी अधिक हो गए हैं मगर हमारी आशा का एक बड़ा आधार यह है कि कुल 81 मरीजों में से 41 मरीज ठीक भी हो चुके हैं। और अभी भी स्वास्थ लाभ प्राप्त कर रहे हैं। प्रशासन और पुलिस तथा स्वास्थ्य विभाग अपने सारे काम छोड़कर कोरोना को सर्वाधिक प्राथमिकता देते हुए पूरी गंभीरता के साथ जुटे हुए हैं। हां इतना ज़रूर है कि कोरोना का आतंक पहले के मुकाबले बढ़ रहा है। और जिनके सैंपल पेंडिंग हैं उनकी तो उसी में सांस अटकी हुई है। खासतौर पर इनमे शामिल वो लोग ज़्यादा डर रहे हैं। जिन्हें पहले से किडनी, लिवर आदि की कोई बड़ी बीमारी है। अथवा जिनके लंग्स कमजोर हैं, सांस फूलने की बीमारी है या एलर्जी की सेंसटिविटी है। कुल मिलाकर उपरोक्त परिस्थितियों के बीच जिले की जनता और प्रशासनिक तंत्र कोरोना से जूझ रहा है।
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