जेल के सभी बंदी व स्टाफ हुए कोरोना संक्रमण से मुक्त

जेल अधीक्षक की मेहनत लाई रंग, संक्रमण मुक्त हुई जेल

बंदियों की बेहतर देखभाल के चलते संक्रमण से नहीं हुई कोई भी मौत

उरई(जालौन)। कुछ दिनोंं पहले तक कोरोना संक्रमण का बड़ा गढ़ बन चुकी जिला जेल अब कोरोना संक्रमण से मुक्त हो चुकी है। जेल अधीक्षक के अथक प्रयासेां के चलते जिला जेल के सभी कोरोना संक्रमितों ने इस महामारी को मात दे दी है। फिर से हुए टेस्ट में सभी लोगों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। जिसके बाद जेल प्रशासन व जिला प्रशासन के अधिकारियों ने राहत की सांस ली है।
बताते चलें कि जिला जेल में सबसे पहले 16 जुलाई को नौ लोगों की कोरोना जांच की गई थी। जिसमें आठ पुरुष व एक महिला बंदी शामिल थे। इनमें कुछ बंदी कोरोनाा पॉजीटिव पाए गए थे। इसके बाद हरकत में आए जेल प्रशासन ने व्यापक पैमाने पर टेस्टिंग अभियान चलाया और जेल से पूरे स्टाफ व बंदियों की जांच कराई गई। 25 जुलाई से एक अगस्त तक चरणबद्ध तरीके से हुए कोरोना टेस्ट में जेल में बंद कुल 759 बंदियों में 211 बंदी कोरोना पॉजीटिव पाए गए थे। इसके अलावा स्टाफ के 42 लोगों की भी जांच कराई गई थी। जिसमें सभी निगेटिव आए थे। इसके बाद सभी बंदियों को आइसोलेट कर उनका उपचार शुरू कर दिया गया था। बेहतर देखभाल, भोजन व उपचार के चलते अब सभी बंदी अपनी क्वारंटीन की अवधि पूरी कर कोरोना संक्रमण से मुक्त हो चुके हैं। इन सभी की दोबारा टेस्टिंग कराई गई। जिसमें सभी बंदी कोरोना निगेटिव पाए गए। जिसके चलते अब जिला कारागार कोरोना संक्रमण से मुक्त हो चुकी है। इस बड़ी उपलब्धि में जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा का योगदान सराहनीय रहा। उन्होंने लगातार संक्रमित मरीजों के उपचार, भोजन व्यवस्था व अन्स सुविधाआें पर निगाह रखी और इसी का नतीजा है कि बेहतर देखभाल के कारण सभी बंदी इस महामारी को मात देने में सफल हो गए। इससे जेल व जिला प्रशासन ने राहत की सांस ली है।

संक्रमित बंदियों को इस तरह दी गई डायट
कोरोना से संक्रमित हुए मरीजों के खान—पान पर विशेष ध्यान दिया गया। उन्हें रोजाना छह केला, 50 ग्राम दूध, एक अण्डा, एक नींबू, आयुर्वेदिक काढ़ा व उबला हुआ पानी नमक के साथ दिया गया। इससे उनके अंदर इम्युनिटी तेजी से विकसित हुई और सभी बंदी कोरेाना को मात देने में सफल हो गए।

बंदियों को अवसाद से बचाने के भी किए गए थे उपाय
जेल में कोरोना महामारी से संक्रमित हुए बंदियों को मानसिक अवसाद न हो, इसके लिए जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा द्वारा विशेष इंतजाम भी किए गए थे। बंदियों को अवसाद से बचाने के लिए जेल के अंदर उनके मनोरंजन का पूरा इंतजाम किया गया। जिसमें जेल रेडियो के माध्यम से प्रतिदिन काउंसलिंग की गई। जेल में बनाए गए एल—1 अस्पताल में इन्डोर गेम्स लूडो, कै रम आदि की व्यवस्था की गई थी। इसके अलावा टेलीविजन, जेल रेडियो, संगी बाद्यय यंत्र ढोलक, हरमोनियम आदि भी उपलब्ध कराए गए थे। सांस्कृतिक मनोरंजन की भी व्यवस्था की गई थी। जिससे बंदी मानसिक अवसाद से ग्रस्त नहीं हुए।

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