जेल मुख्यालय लखनऊ से आई जांच तो भूमि हड़पू गिरोह में मच गई खलबली

बाल कारागार से मिला हुआ ईशा बैंक्वेट।

दबंग भूमि हड़पू ने जेल के नियमों की धज्जियां उड़ाकर बना रखा है ईशा बैंक्वेट विवाह घर

जेल से 100 फ़ीट की दूरी तक कोई निर्माण नहीं हो सकता ऐसा है नियम

खाऊ कमाऊ अधिकारियों की कृपा से कई वर्षों से बाल कारागार से मिलाकर बनाया गया है ईशा बैंक्वेट का भवन

अवैध निर्मित ईशा बैंक्वेट से अधाधुंध कमाई करके ‘रईस’ बन गया है सड़कछाप

कुख्यात भूमाफिया सीला चतुर्वेदी का पुत्र है एडवोकेट अनुभवहीन चतुर्वेदी इसका खासमखास और मुकदमे लिखाकर शरीफ लोगों से करता है अवैध वसूली

चर्चा है कि ईशा बैंक्वेट के मामले को दबवाने के लिए उरई से लखनऊ की दौड़ लगा रहा है संचाकल, 20 लाख रुपए देने की भी पेशकश कर रहा है

अनिल शर्मा+संजय श्रीवास्तव

उरई(जालौन): मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के द्वारा भू माफियाओं के विरुद्ध कठोर अभियान चलाया जा रहा है, गैर कानूनी ढंग से किये गए कब्जों को प्रशासन को ध्वस्त करने के आदेश दिए गए हैं। जिनके पालन में उरई में कुछ स्थानों पर जेसीबी से कब्जे खोदकर फेके भी गए हैं। मगर पुलिस और प्रशासन में महत्वपूर्ण पदों पर बैठे खाऊ कमाऊ अधिकारियों के कृपा पात्र जो अवैध कमाई से ‘रईस’ बन गया है,वह भूमि हडपू गिरोह का संचालक बताया जाता है। उसके द्वारा तमाम कमजोर वर्ग के लोगों की जमीन जायदाद को जहां हथिया लिया गया है। वहीं बाल कारागार से मिलाकर गैर कानूनी ढंग से बनाया गया ‘ईशा बैंक्वेट’ सरकारी कार्यवाहियों को मुह चिढ़ा रहा है। क्योंकि जेल से 100 फ़ीट की दूरी तक किसी भवन का निर्माण न किये जाने का शासन का नियम बताया जाता है।

इस सबके बावजूद भूमि और मकान हड़पने के कई मुकदमों में वांछित ईशा बैंक्वेट का मालिक भूमि हड़पू गिरोह का न सिर्फ संचालक है। बल्कि पुलिस और प्रशासन के महत्वपूर्ण पदों पर बैठे कई अधिकारियों की कृपा से भारी धन अर्जित करने में बेखौफ होकर जुटा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश के तहत पुलिस और प्रशासन के द्वारा अभी हाल में ही कई अवैध कब्जे धारियों का कब्जा तोड़कर हटाया जा चुका है। मगर जेल जैसे अतिसंवेदनशील भवन से 100 फ़ीट की दूरी रखने के नियम को खुलेआम तोड़कर कई वर्षों पूर्व बनाये गए ईशा बैंक्वेट की तरफ जब पुलिस और प्रशासन ने देखा तक नहीं, तो लखनऊ तक इस बात की शिकायतें पहुंची। जिनका संज्ञान लेते हुए उत्तरप्रदेश जेल के शीर्ष प्रशासन ने ईशा बैंक्वेट को जेल से मिलाकर बनाये और चलाये जाने पर विस्तृत रिपोर्ट भेजने के निर्देश जिला प्रशासन को दिए। जिसके फलस्वरूप तहसीलदार उरई द्वारा जेल सुपरिटेंडेंट के समक्ष अपनी टीम के साथ नापतौल की गई। तो रईस बन चुके अवैध धंधेबाज ने अपने गिरोह एवम अपने संरक्षण दाताओं के साथ खासी भागदौड़ की। हालांकि ईशा बैंक्वेट और बाल कारागार में शासन के जेल से 100 फ़ीट की दूरी रखने के नियम का कतई पालन नहीं किया गया है। इसमें तो किसी नापतौल की भी आवश्यकता नहीं है। आंखों से ही यह साफ नजर आता है कि ईशा बैंक्वेट विवाह घर बाल कारागार की बाउंड्री वाल से लगभग मिलाकर बनाया गया है।

बाल कारागार से चिपकी ईशा बैंक्वेट की दीवार।

अब सवाल यह उठता है कि उरई विकास प्राधिकरण द्वारा उक्त विवाह घर का नक्शा नियम के विरुद्ध जाकर कैसे पास किया गया? और यदि प्राधिकरण द्वारा नक्शा पास ही नहीं किया गया तो यह अवैध निर्माण अपना सर तानकर कैसे नियम के विरुद्ध अबतक खड़ा है। आपको बताते चलें कि जमीन मकान और अवैध रूप से बने ईशा बैंक्वेट की कमाई से इसका करता धरता इतना रईस हो गया है कि संबंधित अधिकारियों को वह नियमों की पूर्ति करके जब संतुष्ट नहीं कर पाता। तो चांदी के जूते मारकर उन्हें खामोश कर देता है। रईस बन चुके शातिर दिमाग भूमि हड़पु के गैंग में कुछ अधिकारी भी पूरी तरह से शामिल हैं। जिनमे सीओ सिटी संतोष कुमार का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। क्योंकि सीओ सिटी पिछले तीन साल से उरई में जमा हुआ है, तो वो लोकल का निवासी लगता है और इस गैंग से तो उसका नाता चोर चोर मौसेरे भाई की कहावत को चरितार्थ करता है। इसके और इसके साथियों के विरुद्ध पूर्व में अनेक मुकदमे दर्ज होने के बावजूद सीओ सिटी द्वारा इसके आने पर भव्य स्वागत किया जाता है। जिसके फलस्वरूप यह कोतवाली और महत्वपूर्ण पुलिस चौकियों पर भी खुलेआम पूरे रौब के साथ बैठता है। ताकि जिनकी जायदादों पर इसने और इसके लोगों ने कब्जा जमा रखा है। वे इसके विरुद्ध सर न उठा सकें। अगर इसके सताए हुए लोग कभी पुलिस अधीक्षक से शिकायत भी करते हैं तो उसे सीओ सिटी द्वारा न सिर्फ दबा दिया जाता है। बल्कि सीओ सिटी द्वारा शिकायतकर्ता को उल्टा हड़काया जाता है। जिसके चलते इस कानून तोड़क और लोगों की खून पसीने से बनाई गई जायदाद का यह लुटेरा अब सरकारी नियमों से भी नहीं डरता। जिसका बड़ा उदाहरण बाल कारागार से मिलाकर बना ईशा बैंक्वेट का पुलिस और प्रशासन के लिए शर्मनाक उदाहरण सामने खड़ा है। यही नहीं इसके द्वारा फेके गए चांदी के टुकड़ों की हनक विकास प्राधिकरण पर भी पूरी तरह से चलती है। तभी तो नियम विरुद्ध ईशा बैंक्वेट विकास प्राधिकरण उरई को सीना तानकर मुह चिढ़ा रहा है। यही नहीं ईशा बैंक्वेट का संचालक इतना शातिर दिमाग है कि जब वह एडीएम, एसडीएम और तहसील आदि कार्यालयों में जाता है। तो वहां जिलाधिकारी से अपने घनिष्ठ संबंधों का फर्जी बखान करके अधिकारियों और स्टाफ को अरदब में ले लेता है। जब यह बात जिलाधिकारी को बताई गई तो उन्होंने इनसे मिलना भी बंद कर दिया। इसके साथ और भी शातिर लोग हैं। इसका उरई में इस समय सबसे सक्रिय भूमि हड़पू गिरोह है। जिसमे रईस बन चुके ईशा बैंक्वेट के संचालक के साथ एक छूट भइया वकील जो अपने को दिल्ली और इलाहाबाद का वरिष्ठ अधिवक्ता बताकर कम समझ वाले लोगों को हड़काता घूमता है। और अपना नाम वकील अनुभवहीन चतुर्वेदी बताता है। तथा कई मुकदमों में वांछित संजू श्रीवास्तव और अटराकला गांव का वीर गुर्जर जिसपर क्राइम के कई मुकदमे पहले से ही दर्ज हैं। और वो अपने को गुंडा बताकर काफी बल और वीरवान होने का प्रचार करता है। तथा ये सब इक्लासपुरा के कक्का यादव आदि इसी गिरोह के सदस्य हैं। जिससे बेचारे सीधे साधे लोग अपनी जमीन जायदाद पर इन लोगो द्वारा कब्जा कर लिए जाने के बावजूद इनके भबके में आकर विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि अभी अभी जनपद से तबादला होकर गए पूर्व पुलिस अधीक्षक के बंगले पर न सिर्फ ये लोग घंटो जमे रहते थे। बल्कि पूर्व एसपी से अपने खास रिश्ते भी बताते थे। तथा अपने साथियों के अवैध काम पूर्व एसपी से करा देने की डींग हांकर अपना जलवा बुलंद किये रहते थे।

समाज के लोग सोचते हैं कि योगी आदित्यनाथ की इतनी कड़ी पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था के चलते तो जरायम से जुड़े इस भूमि हड़पु गिरोह को तो तमाम बड़ी धाराएं लगाकर जेल भेजा जाना चाहिए था। मगर ये बेगैरत और समाज की नजर में बेइज्जत लोग तो सीओ सिटी तथा उस जैसे अन्य अधिकारियों के बंगलों पर बैठकर न सिर्फ मिठाई खाते हैं। बल्कि उनके संरक्षण में अवैध कामों से होने वाली कमाई का बंदर बांट भी करते हैं। इनके काले कारनामो को शहर के लोग तो भलीभांति जानते हैं। जिनके सारे प्रमाण भी हैं। मगर फिर भी इनके विरुद्ध मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा चलाई गई कार्यवाहियों का अमल कब होगा? उनसे पीड़ित और शरीफ आमजन उस दिन के इंतज़ार में है।

विशेष सूचना-कुख्यात पुराना भूमाफिया सीला चतुर्वेदी जिसपर अनेक मुकदमे चल रहे हैं। ज्ञात हुआ है कि उसके विरुद्ध 10 साल पूर्व कोतवाली पुलिस ने चार्जशीट लगा दी थी। जिसमें इस शातिर खिलाड़ी ने हाई कोर्ट से स्टे के रखा था। ज्ञात हुआ है कि उक्त स्टे वैकिट हो गया है। और अब उक्त आरोपी सीजेएम उरई से जमानत कराने की जुगाड़ में पुलिस से छुपता घूम रहा है। बाकी अभीतक उपरोक्त गिरोह के विरुद्ध कोई कार्यवाही किये जाने की सूचना पुलिस द्वारा नहीं बताई गई है।

संजय श्रीवास्तव-प्रधानसम्पादक एवम स्वत्वाधिकारी, अनिल शर्मा- निदेशक, डॉ. राकेश द्विवेदी- सम्पादक, शिवम श्रीवास्तव- जी.एम.

सुझाव एवम शिकायत- प्रधानसम्पादक 9415055318(W), 8887963126