डिकौली गौशाला में बेमौत मर रही है गायें

सौ गायों को मौत के बाद गाड़ देने का आरोप
बीस गायें अभी ले रही हैं अंतिम सांसे
एक तरफ मौब लिंचिंग दूसरी तरफ बेमौत मरती गायें
उरई: जनपद के माधौगढ़ तहसील क्षेत्र के अंतर्गत डिकौली ग्राम में बनवाई गई गौशाला में गायों को खाना, पानी और इलाज समय पर न मिलने कारण उनकी ताबड़तोड़ मौतों का सिलसिला जारी है।
उल्लेखनीय है कि देश और प्रदेश में भाजपा का शासन आने के बाद से ही हिन्दू धर्म मे गौ माता माने जाने वाली गायों का गौशालाओं में पालन पोषण अच्छे ढंग से करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा जहां इसके लिए अलग से बजट स्वीकृत किया गया। वहीं बड़ी संख्या में गौशालाओं का निर्माण भी कराया गया। इनके खाने पीने और दवाई के खर्चे का भी प्रबंध सरकार द्वारा किया गया। वह भी इसलिए की गौ वंशजों को आवारा भटकने से बचाया जा सके और उन्हें सुरक्षित गौशालाओं में रखकर गौकशी पर पूर्ण नियंत्रण पाया जा सके। इस हेतु प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बहुत कड़े आदेश-निर्देश अधिकारियों को जारी किए थे। कुछ समय तक तो सरकार के इस शीर्ष प्राथमिकता वाले मुद्दे पर पूरी तरह से अमल होता नजर आया। बहुत सारी गौशालाएं भली भांति संचालित होने लगीं। समय बीतने के साथ साथ गायों और गौशालाओं से जिम्मेदार लोगों का मोह भंग सा होने लगा। हालांकि उत्तरप्रदेश के कई स्थानों पर गौहत्याओं ने अथवा गौहत्या का संदेह होने की स्थिति में “मौब लिंचिंग” की कई घटनाएं हो चुकी हैं। जिसके परिणामस्वरूप कई इंसानों की भीड़ द्वारा बर्बर हत्याएं कर दी गयीं। मगर दुर्भाग्य की भाजपा के शासन काल मे ही गौवंशजो के लिए सुरक्षित समझी जाने वाली गौशालाओं में अब खाना, पानी एवम इलाज के अभाव में अनेक गायों की दुर्दशा ग्रस्त होकर मृत्यु हो रहीं हैं। डिकौली गौशाला में पहुंचे गौरक्षकों ने मुआयना करने के बाद बेमौत मरती गायों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस गौशाला में गायों की स्थिति बेहद दर्दनाक है। उनका आरोप है कि यहां लगभग सौ गायों की भूख, प्यास और बीमारी से तड़पकर मौत हो चुकी है। इसे दबाने के लिए गायों के शवों को गड्ढे खोदकर दफना दिया गया है। जबकि मंगलवार दिनांक 02/06/2020 को कम से कम 20 गायें जर्जर हालत में पड़ी हुईं अंतिम सांसे ले रही हैं। जिन गौवंशजो को बचाने के नाम पर मौब लिंचिंग करके इंसानों का शिकार किया गया और उन्हें दर्दनाक मौत भीड़ द्वारा दे दी गयी। उन्हीं गायों की अब हो रही अकाल मौतें बेहद दुखद हैं। शासन को गौवंशजो के पोषण के किये व्यवस्था बनाने हेतु नए सिरे से विचार करना चाहिए।
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