दलित युवती नीशू की आत्महत्या का मामला ले सकता है विस्फोटक रूप

दरोगा के उत्पीड़न से पीड़ित होकर फांसी पर झूलने वाली युवती के परिवार ने न्याय न मिलने पर दी कोतवाली के सामने आत्मदाह कर लेने की सनसनी खेज धमकी

पिता ने कहा हमारी लड़की चली गयी, अब फैलाई जा रही है 10 लाख रुपये लेकर समझौता करने की अफवाह

जिम्मेदार पुलिस जनों पर लगाया दबाव बनाने का आरोप

शीघ्र आना है मजिस्ट्रियल इन्क्वारी की रिपोर्ट

परिजनों के आत्मघाती बोल सुनकर पुलिस और प्रशासन सतर्क

नीशू आत्महत्या कांड का विश्लेषण- यंग भारत की नजर से…

उरई(जालौन): पुलिस द्वारा अपमान किये जाने से छुब्ध होकर अगले सुबह फांसी लगाकर आत्महत्या कर लेने वाली मृतक 21 वर्षीय नीशू का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है।

अभी मजिस्ट्रियल इन्क्वारी जो एडीएम प्रमिल कुमार द्वारा की जा रही है। तथा आईजी रेंज झाँसी सुभाष सिंह बघेल के आदेश से जनपद के एएसपी भी जांच कर रहे हैं। अभीतक ये जांच रिपोर्टें आयी भी नहीं हैं कि इस सनसनी खेज प्रकरण को लेकर मचे घमासान की प्रतिक्रिया स्वरूप दुखी परिजनों ने इंसाफ न मिलने पर कोतवाली के सामने सपरिवार आत्मदाह कर लेने का ऐलान करके, इस प्रकरण की गंभीरता को और ज्यादा बढ़ा दिया है। स्मरण रहे कि 7 अगस्त को शहर के नामी दरोगा योगेश पाठक और महिला पुलिस द्वारा जवाहर गंज के बाजार से दी गयी सूचना के आधार पर मृतक युवती एवम उसकी सहेलियों को पकड़कर कोतवाली लाये थे। परिजनों के अनुसार वहां मृतक नीशू को दरोगा द्वारा खासा प्रताड़ित किया गया। जिसमें बेल्टों से मारना भी शामिल है। बाद में परिवार की भारी मशक्कत के बाद बमुश्किल रात्रि 11 बजे कोतवाली से इन युवतियों को छोड़ा गया था। उक्त प्रकरण में न तो किसी शिकायत करता द्वारा कोई तहरीर या शिकायत लिखित दी गयी थी। न ही इनको हिरासत में लेने की कोई बात पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज की गई थी। रातभर तो सब ठीक था, किन्तु 8 की भोर में जब स्वाभिमानी नीशू ने फांसी लगाकर प्राण त्याग दिए। तो इस प्रकरण ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी। विरोधी दलों और नीशू के परिजनों के समर्थकों ने न सिर्फ कोतवाली के बाहर जमावड़ा लगाया। बल्कि शहर के अनेक स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किया गया। दलित नेताओं और उनकी पक्षधर पार्टियों ने भी जमकर गुबार निकाला। विधायक गण भी निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए जिलाधिकारी डॉ. मन्नान अख्तर के समक्ष पहुंचे। तब जिलाधिकारी ने मजिस्ट्रियल इन्क्वारी की घोषणा करके एडीएम प्रमिल कुमार को जांच सौंप दी। दरोगा और पुलिस जनों के ऊपर लग रहे गंभीर इल्जामों की गूंज दूर तक गयी। फलस्वरूप झाँसी रेंज के आईजी सुभाष सिंह बघेल आनन फानन में उरई आये। पूरी वास्तविकता को समझा और उन्होंने भी एएसपी डॉ. अवधेश सिंह को उक्त प्रकरण की जांच सौंप दी। दिन बीते तो इस मामले का मानो रायता ही फैल गया। क्योंकि विरोधी दल और पुलिस समर्थक आमने सामने आकर मीडिया में अपने अपने तीर चलाने लगे। दरोगा के समर्थकों द्वारा फेसबुक पर डाली गई पोस्टों में पिछले एसपी डॉ. सतीश कुमार के कार्यकाल में सबसे ज़्यादा चर्चित और अति शक्रिय दरोगा योगेश पाठक जिन्होंने पूरी कोतवाली ही संभाल रखी थी। उनका चित्रण फेसबुक पर डाली गई पोस्टों में एक मसीहा के रूप में किया जाने लगा और खूब महिमा मंडित भी किया जाने लगा। जिसके फलस्वरूप भाजपा विरोधी शक्तियां भी आवेश में आ गईं। और यह अप्रिय घटना राजनीतिक मुकाबले में बदल गयी। जिसके बीच मे पुलिस अभीतक बुरी तरह फसी हुई है। अपनी बेटी नीशू को पुलिस प्रताड़ना के चलते दुखी परिवार को जब ऐसा लगने लगा कि शायद इस लामबंदी से उनको न्याय नहीं मिल पाएगा। तो उन्होंने प्रतिक्रिया स्वरूप यह घोषणा कर दी कि इंसाफ न मिलने की दशा में वे सपरिवार आत्मदाह कर लेंगे। हालांकि अभी मजिस्ट्रियल इन्क्वारी और एएसपी की रिपोर्ट आना बाकी है।

पुराने पुलिस अधीक्षक के कार्यकाल में ‘शहर दरोगा’ के रूप में चर्चित होकर विवादास्पद हुए सब इंस्पेक्टर योगेश पाठक और इस घटना में उनके सहयोगियों के गले में अभी फंदा डला हुआ है। घटना के पक्ष और विपक्ष ने तर्क और कुतर्क करने वालों के पास तो हर बात का जवाब है। मगर पुलिस के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि जब कानून और पुलिस नियमावली में यह स्थापित नियम है कि अंधेरा होने पर किसी भी स्त्री को चाहे उसपर कितना बड़ा भी अभियोग क्यों न हो। उसे पुलिस नहीं पकड़ेगी। न ही थाना अथवा चौकी में हरगिज ले जाएगी। तो मृतक नीशू के प्रकरण में स्त्रियों के संरक्षण में बनाये गए इस सर्व मान्य नियम का पालन क्यों नहीं किया गया? पुलिस के गले की यह सबसे बड़ी फांस है। जानकार पूरी तरह से इसे जानते भी हैं। मगर अभी इंतज़ार खास तौर से मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट का है। रिपोर्ट आने पर पता चलेगा कि इस द्वंद में जांच का ऊंट किस करवट बैठता है?

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