दो धड़ों में बंटते बंटते बच गई कांग्रेस

अब यह तय हो गया कि गांधी परिवार के अलावा कांग्रेस में नहीं है कोई विकल्प

सीडब्ल्यूसी की वर्चुअल बैठक में शामिल थे कांग्रेस के 48 वरिष्ठ नेता

राहुल गांधी ने मां के बीमार होने तथा राजस्थान में संकट के समय 23 नेताओं की चिट़ठ पर नाराजगी जताई और भाजपा की मिली भगत बताया

इस पर मचा बवाल

गुलाम नबी आजाद ने इस्तीफे की पेशकश की तो कपिल सिब्बल ने भी नाराजगी जताई

बाद में सर्व सम्मति से सोनियां गांधी को 6 माह के लिए कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर किसी तरह मामला सुलझाया गया

यंग भारत ने 18 जुलाई को प्रकाशित अपनी खबर में कांग्रेस में पीढ़ी की लड़ाई की बात उजागर की थी

13 दिन बाद यंग भारत की खबर पर कांग्रेस की राज्य सभा की बैठक में हुए बवाल नेे लगाई मुहर

अनिल शर्मा़+संजय श्रीवास्तव़+डा0 राकेश द्विवेदी

दिल्ली। यंग भारत ने 18 जुलाई, 2020 को अपनी प्रकाशित खबर में यह खुलासा किया था कि कांग्रेस के भीतर बुजुर्ग बनाम युवाओं का संघर्ष बहुत तेजी से चल रहा है। इस खबर के 13 दिन बाद दिल्ली में कांग्रेस के राज्यसभा सदस्यों की हुई बैठक में बुजुर्ग बनाम युवा की लड़ाई खुलकर सामने आ गई। रही सही कसर दिल्ली में कांग्रेस वर्किंग कमेटी की हुई वर्चुअल बैठक ने पूरी कर दी। अब यह बात खुलकर सामने आ गई है कि कांग्रेस में बुजुर्ग बनाम युवाओं का संघर्ष अपने चरम पर है।
सीडब्ल्यूसी की बैठक में कांग्रेस के बुजुर्ग एवं युवा 48 नेताओं ने हिस्सेदारी की। बवाल उस समय शुरू हुआ जब कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने उन 23 नेताओं पर आरोप लगाया कि उन्होंने चिट्ठी लिखने के लिए उस समय को चुना जब कांग्रेस की कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनियां गांधी (उनकी मां) बीमार थीं और राजस्थान में पार्टी पर गहरा संकट था। उन्होंने नाराजगी भरे स्वर में कांग्रेस के कुछ नेताओं पर भाजपा से मिली भगत कर यह चिटठी लिखने का आरोप लगाया। यह आरोप लगाते ही कांग्रेस लगभग दो धड़ों में बंट गई। राज्यसभा में कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद ने नाराजगी भरे स्वर में राहुल गांधी को यह कहकर चुनौती दी यदि यह साबित हो जाए तो उनकी भाजपा से मिली भगत है तो वे कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं।
इसी तरह की नाराजगी पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने भी जाहिर की। इस पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री एके एंथेनी ने इस चिट्ठी के आरोपों को बहुत क्रूर बताया। उधर कांग्रेस की लीडर अंबिका सोनी ने ऐसे नेताओं पर कार्यवाही की मांग की, तो पूर्व मंत्री शैलजा ने पत्र लिखने वाले नेताओं को भाजपा का एजेण्ट कहा। मामला तूल पकड़ने लगा और कांग्रेस पार्टी दो धड़ों में बंटती नजर आने लगी। इस बीच कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने यह कहकर बीच बचाव किया कि राहुल गांधी ने किसी को भाजपा से मिली भगत की बात नहीं कही। इसका समर्थन राहुल गांधी ने कपिल सिब्बल और गुलाम नबी आजाद को फोन करके सफाई दी। इसके बाद वातावरण बदल गया। गुलाम नबी आजाद, आनन्द शर्मा, मुकुल वासनिक, जितिन प्रसाद, कपिल सिब्बल जैसे नेताओं ने सामूहिक नेतृत्व की पैरवी की। वहीं बड़ी संख्या में नेताओं ने नेताओं ने गांधी परिवार में निष्ठा जताई। बैठक में मौजूद ज्यादातर लोकसभा सदस्यों ने अध्यक्ष पद के लिए सोनियां गांधी और राहुल गांधी का समर्थन किया। कांग्रेस के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अहमद पटेल राजस्थान के मुख्यमंत्री अषोक गहलोत, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेष बघेल, पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंदर सिंह ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए सोनियां गांधी और राहुल गांधी का पुरजोर समर्थन किया।
उधर कांग्रेस कार्यालय के बाहर बाहरी संख्या में कार्यकर्ता गांधी परिवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाओ के नारे लगा रहे थे। बैठक में सर्व सम्मति से यह प्रस्ताव पारित हुआ कि श्रीमती सोनियां गांधी 6 माह के लिए कांग्रेस की कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनी रहें। जिसका सभी ने समर्थन किया। पूर्व वित्तमंत्री पी चिदम्बरम ने 6 माह बाद नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन के लिए एआइसीसी की वर्चुअल बैठक बुलाने का सुझाव दिया। उधर राहुल गांधी ने कहा कि किसी भी षिकायत का मंच पार्टी की कार्यसमिति होनी चाहिए, मीडिया नहीं। जिस पर सभी ने सहमति जताई। बहरहाल सीडब्ल्यूसी की बैठक में यह तय हो गया कि कांग्रेस पार्टी में अभी गांधी परिवार का कोई विकल्प नहीं, लेकिन अगर कांग्रेस में बुजुर्ग बनाम युवा की लड़ाई का हल न निकाला गया तो कांग्रेस के शांत समुद्र में फिर से बड़ा तूफान आ सकता है।

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