द यंग भारत की खबर का हुआ असर

मुख्यमंत्री भांवरपुर के भागीरथो का करेंगे सम्मान
घरार नदी बनी प्रेरणा
प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह प्रवासी मजदूरों और किसानों सहित सौ लोगों को देंगे धान और किचन गार्डन के जैविक बीज
बुंदेलखंड की सूखी नदियों को पुनर्जीवित करने को चलेगा अभियान
प्रवासी मजदूर करेंगे श्रमदान
अनिल शर्मा +संजय +श्रीवास्तव +राकेश द्विवेदी
लखनऊ+भांवरपुर।द यंग भारत एवं बुंदेलखंड की तमाम प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने जिस तरह से प्रवासी मजदूरों द्वारा बांदा जनपद की ग्राम भांवरपुर में एक दशक से सूखी पड़ी घरार नदी को इस तरह से प्रवासी मजदूरों ने जिसमें महिला एवं पुरुष दोनों शामिल थे। अथक श्रमदान करके जिस तरह से सूखी नदी धरार को पुनर्जीवित कर दिया। केंद्रीय एवं जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह के माध्यम से मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ को सूचना मिली तो उन्होंने अवर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी से इस मामले में गहन चर्चा की। इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यलय में भावरपुर के घरार नदी पर श्रमदान करने वाले प्रवासी मजदूरों को भागीरथ की संज्ञा देते हुए उनके सम्मान की घोषणा की। इन भागीरथ और मजदूरों का सम्मान शीघ्र ही लखनऊ में होगा। और इन्हीं भागीरथ मजदूरों को गांव में ही आत्मनिर्भर बनाने की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कोशिश होगी।
मालूम हो कि दूसरे एवं तीसरे लॉकडाउन के बाद हालात के मारे प्रवासी मजदूर जो दिल्ली,महाराष्ट्र,गुजरात आदि प्रांतों से पैदल चलकर अपने गांव भंवरपुर पहुंचे थे। 15-20 दिन अपने भविष्य के बारे में विचार करने के बाद इन लोगों के बारे में समाजसेवी राजा भैया को पता चला तो वह गांव आए और उन्होंने मजदूरों से बात की। इसके बाद समाजसेवी राजा भैया ने जल जन जोड़ो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक डॉ संजय सिंह से मोबाइल फोन पर बात मजदूरों से बात कराई। इसके बाद बीती 8 जून से घरार नदी पर श्रमदान का कार्यक्रम प्रवासी मजदूरों ने शुरू कर दिया। पहले 4 दिनों तक सूखी नदी में खड़े बेशरम एवं कटीली झाड़ियों डेढ़ किलो मीटर लंबे तथा 10 मीटर चौड़ी नदी में जड़ से उखाड़े गए। इसके बाद 2 दिन तक मलबा हटाने का काम हुआ जैसे ही मलबा हटा 14 जून नदी की कोख के जल स्रोतों से जलधारा फूट पड़ी। यह देख प्रवासी मजदूर खुशी से नाचने लगे तथा देवी व ईश्वर के जयघोष लगाने लगे। यह खबर जब गांव में पहुंची तो गांव भांवरपुर के बूढ़े, बच्चे, महिलाएं, युवतियां भागते हुए नदी किनारे पहुंचे और जोर जोर से जयकारा लगाने लगे। यह खबर जैसे ही आसपास के गांव के लोगों तक पहुंची तो ग्राम रानीपुर, कनाय, बाबूपुर, विधुवापुरवा, बिल्हर, पँचमपुर आदि गांव के लोग आने लगे। वहां मेला जैसा लग गया और बुंदेलखंड की जो सैकड़ों साल पुरानी परंपरा है। सभी गांव से आये हुए लोग श्रमदान में हांथ बटाने लगे। इसके बाद वहां कीर्तन शुरू हो गया। आसपास के गांव से आई महिलाएं जो अपने साथ श्रमदानियों के लिए राशन भी लाईं थीं। उन्होंने सांझा चुल्हा जलाया और सामुदायिक रसोई बनाकर दोपहर और देर शाम को सभी ने मिलकर सह भोज किया। इस दौरान खाना बनाने से लेकर खाना खिलाने तक महिलाएं लोक गीत गाती रहीं। यह सिलसिला 14 तरीक से आजतक जारी है। लोग श्रमदान में उत्साहपूर्वक हिस्सा ले रहे हैं। क्योंकि उन्हें पता है कि इस सुखी घरार नदी में एक दशक बाद जो पानी आया है। इससे उनकी किस्मत बदलने वाली है। इस बीच बीती 17 जून को जल जन जोड़ो के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. संजय सिंह एवं समाजसेवी राजा भैया ने सभी 53 प्रवासी मजदूरों को खाद्यान किट वितरित किये थे। इस बीच गांव के संपन्न लोगों ने इन प्रवासी श्रमदानी मजदूरों को एक-एक बीघा जमीन एक वर्ष के लिए फ्री में देने और एक-एक बीघा जमीन एक वर्ष के लिए बटाई में देने की घोषणा की। उधर महिला श्रमदानियों ने अब परदेश न जाने की बात कहते हुए कहा कि नदी में पानी है। हमे जमीन मिल गयी है। इसमें हम पहले धान की खेती करेंगे और उसके बाद गेहूं की। हम सब्जियां भी उगाएंगे और बकरी पालन भी करेंगे। तथा सौ क्विन्टल गेहूं का एक अन्न बैंक बनाकर ग़रीब मजदूर, किसानों की मदद करेंगे। इस तरह से हैं अपने को आर्थिक रूप से सम्पन्न करेंगे। ताकि भविष्य में रोजी रोटी के लिए हमे मजदूरी करने को परदेश न जाना पड़े। हैरानी भरी बात ये है कि 8 तरीक से श्रमदान शुरू होने के बाद और 14 तरीक को नदी में जलधारा आ जाने के बाद बांदा जिले का न तो कोई अधिकारी यहां पहुंचा और न ही कोई भी जन प्रतिनिधि। 17 जून को ही अपराह्न करीब 4 बजे घरार नदी पर श्रमदान करते हुए प्रवासी मजदूरों और नदी का फोटो और वीडियो जल जन जोड़ो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. संजय सिंह ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गंजेन्द्र सिंह शेखावत को भेजा था। इस दौरान वरिष्ठ पत्रकार अशोक निगम, ओम तिवारी, द यंग भारत, बांदा जिले के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एवं प्रिंट मीडिया के तमाम कलम के धनी पत्रकार मौजूद थे। इसका परिणाम ये हुआ कि जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने ये फोटो और वीडियो जल शक्ति मंत्रालय में प्रसारित तो कराया ही इसके अलावा उन्होंने उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी भिजवाया। जिसका परिणाम यह हुआ कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अवर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी से घरार नदी और श्रमदानियों पर गंभीर चर्चा की। और इसके बाद मुख्यमंत्री ने इन श्रमदानी प्रवासी मजदूरों को भागीरथ बताते हुए इनका सम्मान शीघ्र लखनऊ में करने की घोषणा की। इसका प्रभाव यह हुआ है कि बुंदेलखंड की तमाम सुखी पड़ी नदियों को पुनर्जीवित करने की चर्चा जोरों पर शुरू हो गई है। इन्हें जिला प्रशासन और स्वयंसेवी संगठन मिलकर शीघ्र शुरू कर रहे हैं। मालूम हो कि घरार नदी भांवरपुर से लगभग 200 किलोमीटर दूर म.प्र. के पन्ना जिले से 30-40 किलोमीटर आगे पहाड़ियों और घाटियों से घरार नदी निकली है। और भांवरपुर होते हुए बांदा जिले के बदौसा कस्बे में ग्राम बागैन नदी में मिलती है। ये खबर सुनने के बाद बुंदेलखंड के प्रसिद्ध प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह घरार नदी में हो रहे श्रमदान को देखने के लिए आये। जहां उन्हें पता चला कि प्रवासी मजदूरों को गांव वालों की ओर से 2-2 बीघा जमीन खेती के लिए दी जा चुकी है। इसपर उन्होंने अपनी ओर से प्रवासी मजदूर से किसान बने 53 किसानों को तथा अन्य 47 किसानों सहित कुल 100 किसानों को धान के बीज और किचन गार्डन के लिए लौकी, तरोई, भिंडी, कद्दू, चचिड़ा के जैविक बीज देने की घोषणा की। जिससे प्रवासी मजदूरों और किसानों में हर्ष की लहर दौड़ गई।
संजय श्रीवास्तव-प्रधानसम्पादक एवम स्वत्वाधिकारी, अनिल शर्मा- निदेशक, डॉ. राकेश द्विवेदी- सम्पादक, शिवम श्रीवास्तव- जी.एम.
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