“द यंग भारत” के मुद्दे की हुई जीत

चरित्रहीनता के आरोप में विधायक के करीबी दोनों नेता भाजपा से निष्कासित
तीन सदस्यीय जाँच समिति के रिपोर्ट सौंपने के बाद पार्टी का फैसला
पीड़िता, आरोपियों सहित 15 लोगों से कई बार हुई पूछताछ
रामेन्द्र बनाजी ने स्थापित की अपनी निष्पक्षता
अनिल शर्मा+संजय श्रीवास्तव+ डॉ. राकेश द्विवेदी
उरई। भाजपा की जाँच समिति बहुत तेज निकली! सात दिन का काम पाँच दिन में पूरा कर लिया। जो काम किया उसमें उन दो आरोपितों का ‘ काम ‘ लग गया जो विधायक के करीबी माने जाते थे। उरई नगर द्वितीय के कोषाध्यक्ष प्रेम नारायण वर्मा और जालौन के पूर्व नगर मंत्री रामू गुप्ता की सदस्यता खत्म कर दोनों को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। इस कार्रवाई की जानकारी प्रदेश अध्यक्ष व क्षेत्रीय मंत्री के पास भी भेज दी गई है।
‘द यंग भारत’ द्वारा महिला के अस्तित्व के लिए लड़ी गई लड़ाई आज निष्कर्ष तक पहुंच गई। इस प्रकरण को यंग भारत ही सामने लाया था। पार्टी की महिला नेत्री नगर मंत्री दीपमाला के साथ हुए चारित्रिक दुर्व्यवहार को लेकर पूरी भाजपा गहरे दबाव में थी। वरिष्ठ नेता दुःखी और विचलित तो थे पर ज्यादातर सामने आकर कुछ कहने का साहस नहीं बटोर पा रहे थे। कहीं न कहीं उन्हें राजनीतिक नफा- नुकसान और विधायक की नाराजगी का भय सता रहा था।
15 मई को हुए दुराचरण मामले को लेकर जैसे ही महिला नेत्री द्वारा जिलाध्यक्ष को लिखा गया पत्र सोशल मीडिया में वायरल हुआ पार्टी में खलबली मच गई। कारण है कि यह पार्टी की टैग लाइन – चाल-चरित्र- चेहरा पर सीधा प्रहार था। फिर पार्टी के दो ऐसे नेताओं पर आरोप जो विधायक के निकटवर्ती हैं , इससे घबराहट और बढ़ गई। तब जिलाध्यक्ष रामेंद्र सिंह सेंगर ‘बनाजी’ ने 27 मई को तीन सदस्यीय जाँच समिति गठित कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया। ज्वलंत प्रकरण की जाँच करने का अधिकार मिलते ही भाजपा जिला उपाध्यक्ष देवेंद्र यादव, महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष प्रीति बंसल और पूर्व जिलामहा मन्त्री भगवती शुक्ला अपने दायित्वों को अंजाम देने के लिए तेजी से जुट गए। मामला महिला से जुड़ा होने के कारण उसका महत्व समझकर प्रीति बंसल खासतौर पर सजग देखी गईं। जितने लोगों से पूछताछ हुई वह उन्होंने अपने घर पर ही करवाई। महिला नेत्री को इसके लिए कहीं दूसरी जगह किसी अप्रियता के भय से नहीं जाने को कहा गया।
जाँच टीम ने मामले की असलियत परखने को पूछताछ के कई दौर पूरे किए। अपनी बात रखने को सभी को पूरा मौका देने का प्रयास हुआ। सबसे पहले महिला नेत्री को ही बुलाया गया। उन्होंने हर बार वही बातें दोहराई जिनका शिकायती पत्र में जिक्र किया था। जब कि आरोपित प्रेमनारायण वर्मा और रामू गुप्ता ने अपनी सफाई में यह कुबूल तो किया कि उस दिन वह नेत्री के घर गए थे पर यह नहीं स्वीकारा कि उन लोगों ने किसी प्रकार की महिला के साथ कोई अभद्रता की थी। वह लोग सिर्फ 10 मिनट ही रुके थे और पानी पीकर नीचे उतर आये थे। महिला नेत्री से जब दोबारा पूछा गया तो उसने बताया कि- दोनों लोग झूठ बोल रहे हैं। उस दिन मेरा लाइव प्रोग्राम था। प्रेम और रामू दोनों ऊपर पहले ही आ गए थे और प्रोग्राम खत्म होने के कुछ देर बाद गए। यह लोग इस दौरान करीब 30 मिनट रुके। इसी दौरान उनके साथ अश्लील हरकतें की गईं। दोनों के द्वारा फ़ोटो खींचने का भी आरोप है। पूछताछ के लिए पीड़ित महिला के पति को भी बुलाया गया। उससे बंसल ने सवाल दागा कि जब लाइव प्रोग्राम में घर वालों तक को ऊपर जाने की इजाजत नहीं थी तो ये बाहरी लोग कैसे ऊपर पहुँच गए ? इस पर पति का जवाब आया कि- दोनों लोग उसकी पत्नी से काफी मेलजोल था , इसलिए मैंने उनको नहीं रोका। टीम ने उक्त लोगों के अतिरिक्त नगर एवं जिला कार्यकारिणी के 12 उन लोगों से भी जानकारी जानकारी हासिल की जिनका सम्बन्ध किसी न किसी रूप से पीड़िता और आरोपितों से माना गया। इसके बाद महिला नेत्री और दोनों आरोपितों से लिखित रूप में उनका पक्ष लिया गया। रविवार की दोपहर जाँच समिति ने जिलाध्यक्ष को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। टीम ने अपनी ओर से ज्यादा कुछ न लिखकर उसी को आधार बनाया जो सभी ने लिखित रूप में दिया था। सूत्रों के अनुसार जाँच को लेकर टीम भी दबाव में थी। समाज और मीडिया के दबाव का ख्याल रखते हुए महिला के पक्ष को मजबूत रखना था। सूत्रों के अनुसार ऐसा ऊपर से भी संकेत था।यही कारण है कि महिला नेत्री के द्वारा सिर्फ लिखे गए पत्र को ही आधार बनाकर जिलाध्यक्ष रामेंद्र सिंह ने प्रेमनारायण वर्मा और रामू गुप्ता को पार्टी से निष्काषित करने का आदेश जारी कर दिया। जिलाध्यक्ष रामेंद्र सिंह सेंगर ‘बनाजी’ का कहना है कि मुझे अपनी जाँच समिति पर पूरा भरोसा था । फिर भी मैंने निश्चय कर लिया था कि जाँच रिपोर्ट को पढ़कर जब संतुष्ट हो जाऊंगा , तभी इस पर कोई कदम उठाऊंगा। यदि जांच समिति की रिपोर्ट संतुष्ट न कर रही होती तो दूसरी समिति गठित कर दोबारा जाँच करवाई जाती। उन्होंने माना कि प्रथम दृष्टया दोनों आरोपी दोषी पाए गए , इसलिए उन पर तत्काल कार्रवाई की गई। भविष्य में अब कोई भी हो यदि उसने अनुशासन तोड़ा या पार्टी की छवि गिराई उस पर सख्त अनुशासित कार्यवाही होगी। अनुशासन से अब किसी को नहीं खेलने दिया जाएगा। भले ही वह कोई भी क्यों न हो।
उधर पीड़ित महिला नेत्री पार्टी के इस निर्णय से खुश हैं। उनका कहना है कि यह जीत महिला वर्ग के सम्मान की है। जो भी पीड़ित महिलाएं हैं उन्हें बिना किसी भय के लड़ाई को लड़ने के लिए आगे आना चाहिए और बिल्कुल भी डरना नही चाहिए।
संजय श्रीवास्तव- प्रधानसम्पादक एवं स्वत्वाधिकारी, अनिल शर्मा- निदेशक, डॉ. राकेश द्विवेदी- सम्पादक
सुझाव एवम शिकायत-प्रधानसम्पादक 9415055318(W), 8887963126