नए पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह के साथ भी सट्टा उन्मूलन अभियान में पुलिस खेल रही है पुराना खेल

डिप्टीगंज चौकी प्रभारी ने पकड़ा पर्ची छाप सटोरिया

उरई (जालौन)। पुलिस अधीक्षक डा. यशवीर सिंह के निर्देश पर चलाये जा रहे अभियान के तहत आज सोमवार को चौकी प्रभारी डिप्टीगंज उपनिरीक्षक संतराम कुशवाहा व कांस्टेबल निलेश कुमार,कांस्टेबल गौरव यादव ने दबिश देकर सट्टा की पर्ची लगवा रहे पंकज गुप्ता पुत्र दयाराम गुप्ता निवासी तुलसी नगर उरई को सट्टा खेलते हुए सट्टा डायरी, एक आदत पेन, 870 रुपये के साथ गिरफ्तार कर लिया।पुलिस ने पकड़े गये आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

यहां उल्लेखनीय यह है कि एसपी के सट्टा बन्द कराने के कड़े आदेश के अनुपालन में सट्टा तो बन्द नही हो रहा। किन्तु पर्ची छाप आर्थिक स्थिति से टूटे सटोरिये अवश्य पकड़े जा रहे हैं। एसपी का अभियान को सट्टा विहीन जिला बनाने का है। मगर बावजूद इसके जिले में कायम “दरोगा राज” के जारी रहते सट्टा का उन्मूलन तबतक कतई सम्भव नहीं हो सकता। जबतक सट्टा संचाकल अंटच रहते हैं। जबतक सट्टे का माल कमा कमा कर काफी मोटे और हर तरह से सक्षम बन चुके सट्टा संचालकों को पुलिस गैंगस्टर एक्ट में जेल नहीं भेजेगी। सट्टा बदस्तूर जारी रहेगा। ऐसा ही पिछले वर्षों का रिकॉर्ड बताता है। क्योंकि हर सट्टा संचाकल जब जिसकी सत्ता रहती है। उसमें सर परस्त नेताओं को ढूंढ लेते हैं। फिर सारा खेल उन्ही नेताओं के संरक्षण में खेला जाता है। इसमें पुलिस भी कम चतुर नहीं है। खुद सीओ, कोतवाल और दरोगा सट्टे की कमाई खा रहे हैं। नेताओं से उच्च पुलिस अधिकारियों पर दबाव डलवा देते हैं। जिससे सट्टा के नामी गिरामी संचाकल तो बचे रहते हैं। जिसके फलस्वरूप सट्टा भी बराबर जारी रहता है। और पर्ची छाप सटोरियों की गिरफ्तारी भी। सट्टे को यदि पूरी तरह से बन्द करवाने की इच्छा शक्ति रखने वाले जिला पुलिस के आला कमान कठोरतम और सबकनाक कार्यवाही नहीं करवाएंगे। तबतक उनके अधीनस्त पर्ची छाप सटोरियों को पकड़कर अपना गुड़ वर्क दिखाते रहेंगे। और पुलिस अधीक्षक को खुश करते रहेंगे। दूसरी तरफ एक-एक बात की सूचना सट्टा संचालकों तक पहुचाने का काम करने वाले दागी वर्दी धारी मालामाल भी होते रहेंगे। सट्टे के संबंध में यही पुरानी कहानी है।

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