नजूल भूमि को सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की मिली भगत से हड़प गया भूमि हड़पू गिरोह

भूमि हड़पू गिरोह का शिकार उरई का पवित्र रामकुण्ड

कब्रिस्तान की भूमि भी बेचने का आरोप

लहारिया पुरवा एवं रामकुण्ड की नजूल भूमि भी बेच डाली भूमि हड़पू गिरोह ने

दलित वृद्वा एवं उसकी दो पुत्रियों का अपहरण, मारपीट, धमकाने तथा जबरन बसीयत करा लेने की घटना के आरोपों से घिरे है भूमि हड़पू गिरोह के सरगना

पुलिस भूमि हड़पू गिरोह के सभी सरगना और सदस्यों का बना रही क्राइम हिस्ट्री

एकदम गिरेजी गाज इन पर ?

उरई(जालौन)। जिले के मुख्यालय उरई मे कई वर्षों से सर्वाधिक सक्रिय भूमि हड़पू गिरोह के सरगनाओं ने जहां कमजोर वर्ग के तथा शरीफ लोगों की निजी जमीनें हड़पने का काम किया। वहीं तहसील, नगर पालिका, ओडीए सहित कई खाउ कमाउ बड़े अधिकारियों की गुलामी और सांठ गांठ करके सरकारी जमीनों को हड़प लेने और उनकी निरंतर विक्री करने एवं अपने गुर्गों से करवाने के आपराधिक कार्य को अमली जामा पहनाने मे आज भी लगा हुआ है।
उरई की सारी खाली पड़ी जमीनों पर दुष्टता के साथ अपना मालिकाना बताना वाले भूमि हड़पू गिरोह के सरगना उसका पुत्र और मित्र जो सभी इस अवैध धंधे मे साझेदार है। वे उक्त जमीनों को लगातार बेचने मे लगे हुए है। मगर अनेक शिकायतों के बाबजूद जांच की खानापूरी तो हुयी मगर बारीकी से ठोस जांच अभी तक भी नही हो पायी है। क्योंकि इस सबके जिम्मेदार विभागों के कर्मचारी एवं अधिकारी खास तौर पर राजस्व, ओडीए और पुलिस विभाग के दरोगा इस गिरोह के सरगनाओं के साथ आए दिन शराब, कबाब और शबाव की दावतों मे शामिल रहते है। वहीं पुलिस सहित इन सब उपरोक्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों को इनके अवैध कारनामों से कमाई गयी दौलत का हिस्सा भी मिलता है।
कई शिकायतकर्ताओ ने बकायदा लिखित शिकायत मुख्यमंत्री सहित शासन के अधिकारियों एवं मण्डलायुक्त, जिलाधिकारी को भी पूर्व मे भेजी। मगर ये सब शिकायतें चाहें चलें कितने भी बड़े स्तर से, मगर घूम फिर कर आ जाती है लेखपाल, कानून गो, तहसीलदार, एसडीएम और सिटी मजिस्ट्रेट के पास। जहां तक विकास प्राधिकरण के अभियंताओं का सवाल है वे तो इन भूमि हड़पू सरगनाओं के साथ इस कदर एक दिल होकर मिले हुए है कि हर सरकारी और गोपनीय पत्रावलियों का न सिर्फ उन्हें अवलोकन करा देते है बल्कि बकायदा फोटो काॅपी और मोबाइल पर फोटो खीचंने की सुविधा भी देते है और फिर सब मिलकर समस्या को रफा दफा करने पर अपने पूरे कुटिल दिमाग लगाकर दंद फंद मे जुट जाते है। जिसकी इन्हें पर्याप्त फीस भी भूमि हड़पू गिरोह के द्वारा दी जाती है। जिला और पुलिस प्रशासन की नाक के नीचे मुख्यालय उरई मे सरकार के समानान्तर कई विभागों मे उक्त भूमि हड़पू गिरोह की नीतियां चलती है। जिसके चलते इन पर आरोप सिद्व नही हो पाते। क्योंकि ज्यादातर शिकायतों का जबाब उपरोक्त अधिकारी और कर्मचारी ऐसा गोल मोल देते है। जिनका कोई अर्थ ही नही निकलता। ऐसा आरोप शिकायतकर्ताओं ने लिखित रूप से दोबारा शिकायत करके लगाया है।
शिकायत के अनुसार आरोप है कि गाटा संख्या 1052 जो नजूल भूमि है और रामकुण्ड का नंबर है। उसे भी स्वयं और अपने गुर्गों से वर्तमान मे भी बेईमानी करके बेचा जा रहा है। काफी भाग तो पहले ही बेच दिया गया है। शेष जमीनों को उक्त गिरोह आज भी बेचने मे लगा है। पूर्व मे भी इसकी उपर तक शिकायतें पहुंची। लेकिन जिले मे आने के बाद जब ये शिकायतें इनके चहेते कर्मचारियों एवं सन्दिग्ध निष्ठा के अधिकारियों के पास पहुंची तो उन्होने अपने नौकरी के कार्यकाल का पूरा अनुभव इन्हें मिटाने मे लगा दिया। बताया जाता है कि जिम्मेदार जांच अधिकारियों ने अपने स्टाफ के साथ मिलकर ऐसी रिपोर्ट तैयार करवाइं कि जिन पर कोई कार्रवाई अमल मे नही आयीं। यानी की इनके चहेते जो आते तो गैर जनपदों से है मगर इनके हांथो बिक कर और इनकी गुलामी और आवभगत से खुश होकर इन्ही से परोक्ष्य रूप से इस प्रकरण मे भी कुछ ऐसा ही मामला है। इस प्रकरण मे भी भूमि हड़पू गिरोह के काबिल बकीलों और सलाहकारों द्वारा दिये गये मशविरों का समावेश करते हुए अधिकारियों ने जो जांच आख्या तैयार की। उन पर न तो कोई एफआईआर की गयी और न ही कोई ठोस कार्रवाई नजर आयी। इससे क्षुब्ध होकर शिकायतकर्ताओं ने मुख्यमंत्री और शासन के आलाधिकारियों जो साफ सुथरी सरकार का नगाड़ा बजा रहे है। उन्हें पुनः ये सब विवरण जांच अधिकारियों के कारनामे भी लिख कर भेज दिये है। उल्लेखनीय है कि भूमि हड़पू गिरोह के सरगना जहां दलित उत्पीड़न के जटिल केस मे पूरी तरह संदेह के घेरे मे आ चुके है। बस इन पर पुलिस की गाज गिरने भर की देर है। वहीं अन्य लोगों की और सरकारी जमीनों की धूर्तता के साथ बिक्री करने और उससे आने वाले पैसे से अपने खिलाफ जिम्मेदारों के मुंह बंद कर देने तथा ऐश ओ आराम के साधन जुटा कर अययाशी करने के जलील कामों मे विजी है। मगर प्रशासन और पुलिस के आलाधिकारियों का गुस्सा इनकी काफी कुछ सच्चाई जानने, समझने और देखने के बाद बढ़ता जा रहा है। हालांकि ये सरगना बहुत मधुर बोली मे अपने खिलाफ लगने वाले गंभीर आरोपों से अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश करते है। लेकिन अपराध किसी के छुपाने से कब छुपते है। इनके विरूद्व अतिशीघ्र कठोर कार्रवाई होगी। अन्यथा इनके द्वारा किये गये अवैध, आपराधिक और गैर कानूनी कार्यों के विरूद्व शिकायतकर्ता जिले की सीमा से बाहर निकल कर हाई कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाने का मन बना रहे है।
संजय श्रीवास्तव-प्रधानसम्पादक एवम स्वत्वाधिकारी, अनिल शर्मा- निदेशक, डॉ. राकेश द्विवेदी- सम्पादक, शिवम श्रीवास्तव- जी.एम.
सुझाव एवम शिकायत- प्रधानसम्पादक 9415055318(W), 8887963126