नवाचार की क्षमता से आत्मनिर्भरता का रास्ता सुगम-प्रतीक द्विवेदी

कोंच(जालौन) नगर के युवा और अच्छी सोच रखने वाले होनहार प्रतीक द्विवेदी ने बताया है कि आत्मनिर्भरता की शुरुआत आत्मविश्वास से होती है। हमें आत्मनिर्भ रता के मार्ग पर बढ़ने के लिए पहले अपनी क्षमता और आकांक्षाओं को पहचानना होगा एक ऐसा राष्ट्र और एक ऐसी अर्थ व्यवस्था बनानी होगी जिसमें निरंतरता बनी रहे।
हमें चुनौतियों से निपटने के लिए क्षमता एवं कौशल के साथ आत्म निर्भर अर्थव्यवस्था कैसे बनाते हैं। आयात शुल्क में वृद्धि या आयात पर प्रतिबंध लगाना ऐसी नीतियां हैं जो आत्म निर्भर ताकत करते माहौल तैयार करते हैं। आप को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए आप जो कर सकते हैं उसके संदर्भ में आपको विश्वसनीयता का एक भाव प्राप्त करना होगा। मुझे नहीं लगता कि हमें ऐसा प्रतिबंध लगाकर या अपने कृतिम रूप से एक प्रतिस्पर्धा मुक्त क्षेत्र बना कर करना चाहिए। क्योंकि तब हम अपनी क्षमताओं को घटा रहे होते हैं। भारत को वैश्विक आर्थिक तंत्र पर एक परस्पर जुड़ा हुआ हिस्सा होना चाहिए। यदि आप हमारे फार्मा और बायो फार्मा सेक्टर को देखें तो वैश्विक मूल्य श्रृंखला में केवल 3% पर हमारा कब्जा है। विश्व स्तर पर अधिक आत्मनिर्भर बनने के लिए हमें अपनी नवाचार की क्षमता को बढ़ाना होगा। तभी विकास के मामले में हम सभी से आगे होंगे। हमें ऐसे मार्ग पर चलने की जरूरत है जहां हम अपने नवाचार और वैज्ञानिक क्षमताओं के लिहाज से आत्मनिर्भर हो सकें।

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