निलंबित DIG अरविंद सेन की मुश्किलें बढ़ीं, लखनऊ हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से किया इनकार

लखनऊ: उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग में करोड़ों रुपए के टेंडर घोटाले में फंसे निलंबित डीआईजी अरविंद सेन को हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत देने के इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने गिरफ्तारी पर रोक लगाने से मना किया। सेन के वकील ने मंगलवार को कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी। गिरफ्तारी से बचने के लिए निलंबित डीआईजी फरार चल रहे हैं।
अपर महाधिवक्ता वीके शाही ने सरकार की तरफ से हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखा है। कोर्ट ने इस प्रकरण में अब तक हुई कार्रवाई के बारे में राज्य सरकार से जवाब मांगा है। इसके साथ ही 26 नवंबर को अब अगली सुनवाई होगी। उसी दिन सरकार अपना जवाब दाखिल करेगी।
जस्टिस विवेक ने आज सुनवाई के लिए किया था सूचीबद्ध
जस्टिस विवेक चौधरी की बेंच ने मंगलवार को अरविंद सेन की याचिका पर सुनवाई के बाद अगली सुनवाई बुधवार को करने के निर्देश दिए थे। अरविंद सेन के वकील संतोष कुमार यादव ‘वारसी’ ने बताया कि मंगलवार को याचिका पर सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता मंजीत भाटिया उर्फ रिंकू की ओर से भी अधिवक्ता पेश हुए। जबकि सरकारी वकील ने भी मामले में निर्देश प्राप्त करने के लिए समय की मांग की। जिस पर कोर्ट ने मामले को पुनः बुधवार को सूचीबद्ध करने के आदेश दिए थे।
अरविंद सेन पर पीड़ित को डराने धमकाने का आरोप
टेंडर घोटाले का खुलासा जून महीने में हुआ था। 13 जून को इंदौर के व्यापारी मंजीत सिंह भाटिया उर्फ रिंकू ने लखनऊ के थाना हजरत गंज में एफआईआर की थी। इस मामले में 10 अभियुक्तों को नामजद किया गया था। अभियुक्तों पर कूटरचित दस्तावजों व छद्म नाम से गेहूं, आटा, शक्कर व दाल आदि की सप्लाई का ठेका दिलवाने के नाम पर 9 करोड़ 72 लाख 12 हजार रुपए की ठगी करने का आरोप है। अरविंद सेन पर आरोप है कि उन्होंने सीबीसीआईडी में बतौर एसपी रहते हुए पीड़ित को डराया, धमकाया और सादे पेपर पर हस्ताक्षर करा लिए। इसके बदले ठगों ने उन्हें मोटी रकम दी। मामले की जांच हुई तो आरोप सही पाए गए। जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था। अब पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए उन्हें तलाश कर रही है।
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