पंरम्परायें ही नही जीवन का सौर्दय है भाई-बहिन का प्रेम

बाजार में ही भाई को तिलक लगाकर अपने पन का अहसास कराती बहिन और साथ में उसके परिजन

दीवाली की भाईदूज पर दिखी रिश्तों की बेमिशाल तश्वीर
उरई(जालौन)। लंबे समय के लाॅकडाउन और कोविड संक्रमण के बढ़ते प्रभाव के बीच इस बार की दिवाली ने अपने साथ रिश्तों में एक नई स्फूर्ति और उत्साह भर दिया है। किन्हीं कारणों से अपनों से दूर रहने वाले तन से नही तो मन से एक दुसरें के करीब आते दिखे। तो वही वर्षो पुराने रिश्तों की महक और नये बनते रिश्तों की गर्माहट ने दीवाली को खुशियों की सौगात देकर खूबसूरत बना दिया।
लाॅकडाउन के बाद यह पहला मौका रहा जब लोग दीवाली के मौके पर एक दूसरें के साथ खुशिया मनाने के लिये एकत्रित हुये जो पिछले लंबे समय से अपने परिजनों से नही मिल सके थे वह उत्साह के साथ मिलने पहुंचे चूकि कोविड के संक्रमण के चलते लोग लंबे समय से अपनों से दूर रहने को विवश रहे। कोई अपने घर नही पहुंच सका तो कोई घर से बाहर नही निकल सका। लिहाजा बीते कुछ माह लोगो के जीवन के ऐसे अहसास भरें रहे जिन्हें शायद ही कोई भुला सके। लेकिन अच्छी बात यह रही कि जल्दी ही हालातों में बदलाव आया और अनलाक ने लोगो को मौका दिया कि वह फिर से जीवन के रंगो को संवार सके बहरहाल दीवाली के त्योहार की परंपराओं में लोग एक दूसरें से मिलने और उन्हें शुभकामनायें देने में उत्साहित नजर आये इस बार का उत्साह पहले से कहीं अधिक होने की मुख्य वजह यह भी रही कि उन्हें कई माह तक घरों में कैद रहकर अपनों को करीबी से देखने और उनके साथ कुछ पल बिताने का मौका नही मिल सका पर जैसे ही दीवाली आयी लोगो के मेलजेल का सिलसिला तेज हो गया जो कि सभी रश्मों पर बरकरार है आज भाई दूज के दिन बहनों ने अपने भाईयों को तिलक कर उनकी खुशहाली की कांमना की तो वही भाइयों ने भी अपने दायित्व निभाने का अहसास कराया एक तश्वीर ने तो भाई बहिन के प्रेम की बेजोड मिशाल कायम कर दी जब बहिन ने अपने भाई को बाजार में ही तिलक लगाकर अपने प्रेम का अहसास करा दिया। अपनी बहिन और परिवारीजनों के बीच यह मौका भाई बहिन दोनो के लिये जीवन के अनौखे पलों का गवाह बन गया। कुल मिलाकर भाई बहिन के प्रेम की यह परंपरा जीवन के सुनहरें अहसासें की पूजीं बनकर सबके साथ रहे इसके लिये हर भाई बहिन को संकल्प लेना चाहिये ताकि रिश्तों की खूबसूरती जीवन को महकातीं रहे।
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