पानी के नाम पर पानी में बहाये करोडो

बदहाल अवस्था में सरकारी हैण्डपंप

सैकडो की तादात में सरकारी इंडिया मार्का हैण्डपंपों का पुरसाहाल

उरई(जालौन): अब इसे सरकारी व्यवस्थाओं की उदासीनता कहें या कुछ और कि जिस तरह से जनपद में पेयजल की समस्या के निराकरण के नाम पर करोडो रूपयें खर्च किये गये है उसके सापेक्ष उनकी सार्थकता नही मिल सकी है हैरत की बात तो यह है कि चंद सालों मे ही अधिकां हैडपंप या तो जमींदोज हो गये है या फिर लोगो की प्यास बुझाने की वजाय उन्हें मुंह चिडा रहे है।
बीते डेढ दसक से नगरीय और ग्रामीण श्रेत्रों में पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मंसा से देस और प्रदेस की सरकारों ने करोडों रूपयें के बजट स्वीक्रत किये और बडी तादात में जगह जगह इंडियां मार्का हैण्डपंप लगवायें ऐसे इलाके जहां पीने के पानी की सर्वाधिक जरूरत थी और स्थानीय लोगो ने भी प्रसासन और जनप्रतिनिधियों के जरिये हैण्डपंप लगवाने की मांग की थी उन स्थानों पर भी हैण्डपंपों की जो दसा है वह भी कम दयनीय नही है कुल मिलाकर यह कहा जाये कि पानी के नाम पर सरकारी धन को पानी में बहाया गया है तो कोई अतिस्योक्ति नही। गौरतलब हो कि नगर में जर्जर हालत में पडे हैण्डपंपों की संख्या सैकडों में है सायद ही कोई रिहायसी बस्ती ऐसी अछूती हो जहां इस तरह के सरकारी हैण्डपंप दुर्दसा को बंया न करते हो। यहां यह भी बताना जरूरी है कि इन सरकारी हैण्डपंपो को स्थापित कराये जाने के बाद से अब तक इनकी सुधि लेने वाले जिम्मेदार अमलों ने भी इस दिसा में कोई कारगर कदम उठाना मुनासिब नही समझा नतीजा यह रहा कि धीरें धीरें कुछ ही बरसों में हैण्डपंप दुर्दसा की चरमसीमा पर पहुंच गये।
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