पानी के लिये पानी में बहाया सरकारी धन, विभागीय कार्यालयों में भी जमींदोज हो गये हैण्डपंप

कलेक्ट्रेट में खराब पड़ा हैंडपंप

उरई(जालौन)। पीने का पानी मुहैया कराने की सरकारी योजनायें किस कदर बर्बादी की कगार पर पहुंच गयी है इसकी जीती जागती मिशाल नगर सहित जनपद के ग्रामीण अंचलों में करोडो रूपये खर्च कर स्थापित कराये गये इंडिया मार्का सरकारी हैण्डपंपों की बदहाली को देखकर मिल जाती है जो अपनी सार्थकता पर खरे उतरना तो दूर अपने वजूद को भी बचा कर नही रख पायें चैकाने वाली बात तो यह है कि हैण्डपंपों की दुर्दशा का यह आलम न सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों में ही है वल्कि नगरीय क्षेत्र यहां तक की जिला मुख्यालय स्थित सरकारी महकमों तक में अपनी कहानी बयां कर रहे है।
बीते लगभग दो दशक समूचे बुदेल खंड में पेयजल व्यवस्थाओं को दुरूस्त बनाये जाने की मंशा से केन्द्र और राज्य सरकारो ने व्यापक स्तर पर कार्ययोजनाये बनाई ताकि लोगो को पीने के पानी की किल्लत का सामना न करना पडे । बताते चले कि ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में इस मंशा को पूरा करने के लिये जनप्रतिनिधि विधायक और सांसद निधि से भी धन आवंटित करने का भी प्राविधान बनाया गया। जिन स्थानों में पीने के पानी की जरूरत है वहां लोगो की मांग को देखते हुये इंडिया मार्का हैण्डपंप स्वीक्रत किये गये बहरहाल यह स्थिति रही कि कुछ ही वर्षो के दौरान हर गांव और नगर के हर मुहल्लें तथा सार्वजनिक स्थानों पर बडी संख्या में हैण्डपंप बडी बडी कार्ययोजनायें बनाई जा रही है वहां पहले से ही संचालित योजना का यह हश्र है । लगा दिये गये लेकिन बाद के कुछ वर्षो में स्थिति यह देखने को मिली इनमें से अधिकांश हैण्डपंप किसी न किसी कारण वश ठप पड गये जिन्हें बीच बीच में दुरूस्त भी कराया जाता रहा किन्तु कुछ वर्षो के बाद तो यह सिलसिला भी बंद हो गया नतीजतन जो जिस हालत में था वह उसी हालत में पडा अपनी सार्थकता से महरूम हो गया मौजूदा स्थिति यह है कि कहीं भी नजर उठा के देख लिया जाये हैण्डपंप दुर्दशा के शिकार मिल जायेगे। अब इससे बडी विडंबना क्या होगी कि जहां पीने के पानी के लिये बडी बडी कार्ययोजनायें बनाई जा रही है वहां पहले से ही संचालित योजना का यह हश्र है।
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