पार्टी से मिले ऑफर को पुराने कांग्रेसी परिवार ने विनम्रता पूर्वक ठुकराया

अनिल शर्मा + संजय श्रीवास्तव + राकेश द्विवेदी
राष्ट्रीय मीडिया में जालौन प्रकरण के उठने से दबाव में आई पार्टी
प्रियंका- राहुल के ट्विटर को लेकर भाजपा भी हुई हमलावर
उरई(जालौन): राष्ट्रीय मीडिया में कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रकरण को दिखाए जाने के बाद कांग्रेस पार्टी दबाव में है। उस पर भाजपा ने इस प्रकरण में प्रियंका और राहुल के कुछ न लिखने या बोलने पर तीखा प्रहार कर पार्टी को और ज्यादा दबाव में ला दिया है। अब पार्टी इस नुकसान की क्षतिपूर्ति का उपाय सोचने में जुटी हुई है। पांच सदस्यीय जांच समिति को सोमवार को आना था पर जिलाध्यक्ष को जेल भेज दिए जाने से वह नहीं आई। फिर भी उसके आने का इंतजार है !

विश्वस्त सूत्रों के अनुसार जालौन प्रकरण के सामने आने के बाद खुद पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा चिंतित हुई हैं। उनके द्वारा जल्दी से इस मामले का समाधान खोजने का प्रयास है। यही वजह है कि पार्टी की नजर कुछ पुराने कांग्रेसी परिवारों पर डालने की कोशिश हो रही है। बताया जाता है कि राष्ट्रीय कार्यलय से सोमवार को ऐसे ही एक पुराने परिवार से फोन द्वारा संपर्क करने का दावा किया जा रहा है । जिस परिवार से संपर्क हुआ उसने खुद इसे सही बताया। परिवार के सदस्य ने बताया कि ” दोपहर बाद कांग्रेस के एक बड़े नेता का उनके पास फोन आया था। उनके द्वारा परिवार के राजनीतिक और सामाजिक प्रतिष्ठा की बात कहकर जिले की किसी जिम्मेदारी को संभालने की बात कही गई। इसके बाद उन्हीं नेता के द्वारा प्रियंका वाड्रा से भी बात करवाई गई। उन्होंने भी परिवार के संबंध में चर्चा कर कांग्रेस को मजबूत करने की इच्छा जताई.

राष्ट्रीय स्तर से पार्टी की जिम्मेदारी संभालने के ऑफर को हालांकि उस परिवार की ओर से बड़ी विनम्रता के साथ अस्वीकार कर दिया गया। सूत्रों के अनुसार इस प्रकरण में पार्टी बचाव का रास्ता खोज रही है। अनुज मिश्रा अभी जिलाध्यक्ष हैं पर जिस तरह से उनसे संबंधित युवतियों का मामला राष्ट्रीय स्तर पर उछला है और भाजपा ने सीधे राहुल- प्रियंका की चुप्पी पर हमला बोला है , इससे पार्टी बैकफुट में है। क्योंकि अभी तक राहुल – प्रियंका महिलाओं के सम्मान के मुद्दे पर योगी सरकार पर ट्विटर के माध्यम से सरकार के ऊपर हमला बोलते रहे हैं। ऐसे में आसार यही दिख रहे हैं कि पार्टी जिले में नेतृत्व परिवर्तन कर भाजपा को चुप करा दे। इस घटना से अनुज मिश्रा का राजनैतिक मर्डर होता दिखायी दे रहा है।

एक परिवार विशेष के द्वारा जिम्मेदारी संभालने में रुचि न दिखाए जाने के बाद अब दूसरे नाम सामने आए हैं। यदि बदलाव हुआ तो फिर जो विशेष नाम इसके काबिल माने जा रहे हैं उनमें हैं – राजीव नारायण मिश्रा, सुरेश शांडिल्य, राजेश मिश्रा हरदोई, महेश तिवारी पिरौना, रामजी द्विवेदी अमखेड़ा, देवेंद्र पांडेय आटा, आशीष चतुर्वेदी एवं कोंच के अमित रावत। यदि ब्राह्मणों से अलग हटकर सोचा गया तो डॉ. रेहान सिद्दीकी और श्रीप्रकाश सरसेला के नाम पर भी विचार संभव है।

जिलाध्यक्ष के तौर पर अभी तक अनुज मिश्रा अच्छा काम कर रहे थे। पार्टी में तेजी दिखी थी। प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू से भी उनकी अच्छी ट्यूनिंग दिख रही थी पर ताजा प्रकरण ने उनकी राजनीतिक रफ्तार को ब्रेक अवश्य लगाया है। कारण है कि युवतियों ने उनके खिलाफ मैसेज भेजने या फोन करने के जो सबूत पुलिस को सौंपे हैं वह जिलाध्यक्ष की परेशानी भी बढ़ा सकते हैं।

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