पुलिस के हाथ तो बहुत लंबे होते हैं, तो क्या पैर छोटे पड़ रहे हैं?

मरने मारने की जंग में जूझ रही है पुलिस
मुख्य आरोपी विकास दुबे पर 1 लाख एवम अन्य पर 25-25 हजार का इनाम घोषित
डीएसपी का गला काटने की भी कोशिश की थी हत्यारों ने
एफआईआर और वास्तिविकता तथा एसटीएफ की जांच में उभरे विरोधाभास
लंदन में पढ़ता है विकास का पुत्र
संजय श्रीवास्तव-प्रधानसम्पादक
कानपुर: कानपुर के बिकरु गांव में गुरुवार रात्रि पुलिस दल के साथ उनके ही ‘विभीषण’ की गद्दारी के चलते पुलिस के कत्लेआम की जो दास्तान हैवान बन चुके विकास दुबे और उसके गिरोह ने इतिहास में दर्ज कर दी। वह भारत की आजादी के बाद से अबतक प्रदेश पुलिस के साथ घटी सबसे अप्रिय और लोमहर्षक घटना है। जिसमे सीओ सहित आठ पुलिस जन शहीद हो गए। मगर दुखद आश्चर्य है कि अभूतपूर्व घटना के घठित होने के 72 घंटे से अधिक बीत जाने के बावजूद प्रदेश पुलिस के जांबाज अफसरों की टीम और विशाल पुलिस दल अपराधियों को दबोचने के लिए सुरागरसी के आधार पर उनके पीछे भाग रहा है। मगर समय बीतने के साथ अब लोग यह भी कहने लगे हैं कि “पुलिस के हांथ तो बहुत लंबे होते हैं मगर क्या पैर छोटे पड़ रहे हैं”? क्योंकि वांछित अपराधी इस पकड़-धकड़ के मुकाबले में भागने में पुलिस से आगे निकल गए हैं। कहने का आशय यह है कि सरकार द्वारा अपने सारे घोड़े छोड़ देने के बावजूद भी पुलिस के हाथ अभी तक खाली हैं।

दुर्दांत अपराधी विकास दुबे-फ़ाइल फोटो

मालूम हो कि इस घटना की एफआईआर चौबेपुर थानाध्यक्ष(अब निलंबित) ने घटना की जो रिपोर्ट दर्ज कराई है उसके अनुसार विकास दुबे सहित 21 नामजद व 60-70 अज्ञात लोगों पर दर्ज कराई गई है। जो रिपोर्ट दर्ज कराई गई है उसकी तहरीर के मुताबिक तीन हिस्सों में बटी पुलिस टीम के पहुंचते ही तीन तरफ से अंधाधुंध गोलियों की बौछार होने लगी। विकास अपने घर की छत पर खड़ा पुलिस वालों को ललकार रहा था। यह हमला ऐसा था कि मानो आतंवादियों ने हमला किया हो। थानाध्यक्ष विनय तिवारी रात 12:27 बजे अपनी टीम के साथ हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे की गिरफ्तारी के लिए रवाना हुए। टीम में पांच दरोगा, दो हेड कॉन्स्टेबल, सात कॉन्स्टेबल और जीप चालक शामिल था। बेला क्रासिंग पर डीएसपी बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा तीन सिपाहियों के साथ खड़े थे। थानाध्यक्ष बिठूर कौशलेंद्र प्रताप सिंह दो दरोगा, सात कॉन्स्टेबल व एक जीप चालक और थानाध्यक्ष शिवराजपुर महेश यादव एक दरोगा, एक हेड कॉन्स्टेबल, दो कॉन्स्टेबल भी पहुंच चुके थे। यहां किस तरह की दबिश दी जानी है, किस टीम में कौन शामिल रहेगा? इसकी प्लानिंग करने के बाद सभी बिकरु गांव की ओर रवाना हुए। यह तय हुआ कि डीएसपी देवेंद्र कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम तीन हिस्सों में बटेगी। पहले दल का नेतृत्व खुद डीएसपी करेंगे। जिसमे थानाध्यक्ष महेश यादव व अन्य शामिल होंगे। रात के समय दबिश होने के कारण एहतियातन सभी के पास ड्रैगन लाइट थी। द्विवेदी आटा चक्की से टीम बिकरु गांव के अंदर जाने वाले मार्ग पर बढ़ी तो सड़क पर जेसीबी खड़ी दिखी। बायीं दिशा पूर्व की ओर दूसरा दल एसओ बिठूर के नेतृत्व में आगे बढ़ा और दाहिनी ओर से दक्षिण दिशा की ओर तीसरा दल चौबेपुर थानाध्यक्ष विनय कुमार तिवारी की अगुवाई में बढ़ा। मौके पर बिजली की पर्याप्त रोशनी थी कि अचानक विकास दुबे छत से अपने गुर्गों के साथ पुलिस पार्टी पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। जोर जोर से चिल्लाने लगा कि पुलिस वालों यहां दबिश देने की हिम्मत कैसे हो गयी? आज कोई बचकर नहीं जाएगा। विकास दुबे के घर के सामने राजाराम उर्फ प्रेम कुमार पांडेय की छत से भी प्रेमकुमार और उसके साथी श्यामू बाजपेयी, छोटू शुक्ला, जेसीबी चालक मोनू, जहान यादव और विकास दुबे के घर के पश्चिम की तरफ स्थित अतुल के मकान की छत से अतुल दुबे, दयाशंकर अग्निहोत्री, शशिकांत पांडेय, विष्णु पाल यादव, राम सिंह, रामू बाजपेयी ने अन्य साथियों के साथ घात लगाकर पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। तीन दिशाओं से गोलियों की एक साथ की गई बौछार से पहली व दूसरी टीम के अधिकांश सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल पुलिस जनों ने से कुछ ने आड़ व पोजीशन लेने के लिए राजाराम पांडेय के घर की दिशा में बढ़े और कुछ लोग पप्पू मिश्रा की खाली जमीन की ओर बढ़ ही रहे थे कि बदमाश छतों से उतरकर पुलिस जनों पर फायरिंग करना शुरू कर दी। इस बीच अतुल मिश्रा की छत से गोलियों की बौछार हो रही थी। इसलिए एसओ विनय तिवारी की टीम आगे बढ़ नहीं सकी। वे अपनी जगह से बदमाशों पर फायर कर रहे थे। पप्पू मिश्रा ने खाली स्थान पर बने शौचालय के पास दरोगा अनूप कुमार सिंह, कॉन्स्टेबल जितेंद्र पाल, बबलू कुमार, राहुल कुमार, सुल्तान सिंह को गोली मारकर हत्या कर दी। वहीं डीएसपी देवेंद्र को विकास दुबे, प्रेम कुमार पांडेय, अमर दुबे, प्रभात मिश्रा, गोपाल सैनी, हीरू दुबे, बउवन शुक्ला, शिवम दुबे, बाल गोविंद, बउआ दुबे व अन्य ने घसीटकर प्रेम कुमार पांडेय के घर के अंदर ले जाकर गोलियों व धारदार हथियार से हत्या कर दी। इस दौरान एसओ बिठूर कौशलेंद्र सिंह समेत सात पुलिसकर्मी घायल हो गए। बदमाश एसओ कौशलेंद्र की हत्या करने की फिराक में थे। लेकिन पुलिस पार्टी द्वारा कवर किये जाने के कारण उन्हें घायल अवस्था मे छोड़कर बदमाश फरार हो गए। इस दौरान बदमाश पिस्टल, कारतूस, इंसास राइफल लूट ले गए। इस घटना ने 60-70 अज्ञात लोग भी शामिल थे। पुलिसकर्मियों के शव अलग-अलग स्थानों पर बिखरे पड़े थे। इस दौरान पुलिस की तरफ से 52 राउंड फायरिंग की गई। यह घटना रात एक बजे से डेढ़ बजे की है।
एफआईआर में नामजद आरोपियों के नाम क्रमशः विकास दुबे, राजा राम उर्फ प्रेमकुमार, श्यामू बाजपेयी, छोटू शुक्ला, जेसीबी चालक मोनू, जहान यादव, अतुल दुबे, दयाशंकर अग्निहोत्री, शशिकांत पांडेय, शिव तिवारी, विष्णुपाल यादव, राम सिंह, रामू बाजपेयी, अमर दुबे, प्रभात मिश्रा, गोपाल सैनी, हीरू दुबे, बाल गोविंद, बउआ दुबे और 60-70 अज्ञात लोगों पर केस दर्ज किया गया है। प्रेमकुमार व अतुल को पुलिस ने शुक्रवार सुबह एनकाउंटर में मार गिराया था। वहीं दयाशंकर अग्निहोत्री को रविवार सुबह पुलिस ने गोली मारकर घायल किया है। उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

पार्टियों में डांस करने का शौकीन है विकास दुबे

एफआईआर पर खड़े हो रहे सवाल?
एफआईआर लिखवाने वाले एसओ चौबेपुर विनय तिवारी को उनकी संदिग्ध कार्यप्रणाली के चलते ससपेंड कर दिया गया है। एफआईआर में लिखा गया है कि जब पुलिस टीम विकास दुबे के घर पहुंची तो मौके पर बिजली की पर्याप्त रोशनी थी। लेकिन अब एसटीएफ की जांच से यह सामने आया है कि पुलिस के पहुंचने से पहले ही बिकरु गांव की लाइट सब स्टेशन से कटवा दी गयी थी। वहीं यह भी लिखाया गया है कि मृत पुलिस कर्मियों के शव इधर-उधर पड़े थे। लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों के बयान से भी इसमें विरोधाभास देखने को मिला। विकास दुबे के गुर्गों ने मृत पुलिसकर्मियों के शवों का ढेर लगा दिया था। वे लोग शवों को जलाना चाहते थे। और डीएसपी के गले को काटने की भी की गई थी कोशिश।
आईजी अमिताभ ठाकुर की सोशल एक्टिविस्ट पत्नी नूतन ठाकुर ने मकान गिराने को बताया गैर कानूनी
एक टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में आईजी अमिताभ ठाकुर की पत्नी नूतन ने पुलिस द्वारा अपराधियों के विरुद्ध चलाये जा रहे ताबड़तोड़ अभियान के क्रम में मुख्य आरोपी विकास दुबे के विशाल काय मकान को पुलिस द्वारा जेसीबी से ध्वस्त कराए जाने के एक्शन को गैर कानूनी माना है। उनका कहना है कि किसी स्थायी संपत्ति को ध्वस्त करने की इजाजत कानून नहीं देता। अदालत कुड़की का आदेश करके समान सहित दरवाजे और चौखटें तक उखड़वाने का अधिकार देती है।
औरैय्या में मिली संदिग्ध कार
घटनास्थल के निकट वाले जनपद औरैय्या में पुलिस ने एक कार को बरामद किया है। जो सड़क के किनारे लावारिस खड़ी हुई थी। उक्त कार को पुलिस हत्याकांड से जोड़कर देखा जा रहा है। जांच दल फोरेंसिक टीम के साथ अपने काम मे जुटा है। कार फोर्ड कम्पनी की ईकोस्पोर्ट है।
जितने मुह उतनी बातें।
पुलिस दल की हत्या करके फरार हुए विकास दुबे के गिरोह को लेकर क्षेत्र तो क्या पूरे प्रदेश ने चर्चाओं का बाजार गर्म है। अटकलें लगाईं जा रही हैं कोई कहता है कि विकास नेपाल भाग गया है। कोई कहता है कि वो कभी भी किसी अदालत में आत्मसमर्पण कर सकता है। और बहुत सारे लोग यह भी कहते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा अपने जांबाज अधिकारियों को गुप्त आदेश दिया गया है कि वे विकास दुबे सहित उसके साथी हत्यारों की लाशें देखना चाहते हैं। क्योंकि उन्होंने पुलिस दल के साथ अभूतपूर्व कांड करके उनकी नींद उड़ा दी है।
विकास और उसके छोटे भाई दीप प्रकाश दुबे के लखनऊ के कृष्णा नगर में बने मकानों पर चल सकता है बुलडोजर
मालूम हो कि दुर्दांत अपराधी विकास दुबे ने अपने दब-दबे के बल पर अकूत सम्पदा अर्जित की है। पुलिस सारी संपत्ति की खोज कर रही है। सूत्र बताते हैं कि लखनऊ के कृष्णा नगर इलाके में विकास दुबे एवम उसके भाई के आलीशान मकान बने हुए हैं। आज लखनऊ के पुलिस कमिश्नर सुजीत कुमार और एलडीए के आला अधिकारियों के बीच बैठक हुई और दोनों मकानों के रिकॉर्ड के कागजों को खंगाला गया। तथा उन्हें ध्वस्त करने का आधार ढूंढा जा रहा है। तथा पुलिस के उच्च स्तरीय सूत्र बताते हैं कि इन मकानों पर पुलिस कभी भी बुलडोजर चलवाकर ध्वस्त कर सकती है।तथा अपराधियों का मनोबल तोड़ने के लिए पुलिस विकास दुबे की जितनी भी संपत्तियां प्रदेश में पाई जाएंगी उन सभी के विरुद्ध आतंकवाद निरोधक कानून के तहत कार्यवाही करेगी।