प्रदेश में वित्त विहीन शिक्षक व स्टाफ दाने दाने को मोहताज

पूरे प्रदेश में 21,000 से अधिक हैं वित्त विहीन विद्यालय

प्रदेश के साढ़े तीन लाख वित्त विहीन शिक्षक और 80,000 स्टाफ है

प्रत्येक शिक्षक और स्टाफ का औसत परिवार 5 लोगों का है

प्रदेश भर में साढ़े इक्कीस लाख वित्त विहीन शिक्षक और स्टाफ का परिवार भुखमरी के कगार पर

मनरेगा मजदूरों से भी बदतर है हालत

17 सितंबर, 2020 तक अपनी मांगों को लेकर प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालयों में मौन धरना देकर मांगपत्र देंगे

अनिल शर्मा़+संजय श्रीवास्तव़+डा0 राकेश द्विवेदी

लखनऊ। कोरोना महामारी के चलते पिछले 22 मार्च, 2020 से शुरू हुए लाकडाउन के चलते आज लगभग पांच माह से पूरे प्रदेश में वित्त विहीन विद्यालय बंद हैं। विद्यालय बंद होने के कारण छात्र छात्राओं से फीस नहीं आ रही। जिसके कारण अध्यापकों और स्टाफ को पांच माह से वेतन नहीं मिल पाया। इस कारण वित्त विहीन विद्यालयों के शिक्षक और स्टाफ के परिवार को मिलाकर जिनकी संख्या लगभग साढ़े इक्कीस लाख है, ये सभी लोग दाने दाने को मोहताज हो गए हैं।
भुखमरी की कगार पर खड़े इन लोगों की हालत मनरेगा मजदूर से भी बदतर हो गई है। इसको लेकर कोरोना महामारी के दौरान मजबूरी में वित्त विहीन शिक्षक महासंघ के पदाधिकारियों की पिछले दिनों लखनऊ में एक बैठक हुई। जिसकी अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष अशोक राठौर ने की। बैठक में प्रदेश महामंत्री अजय सिंह, प्रदेश महासचिव कृष्ण मोहन यादव, कोषाध्यक्ष शिव करण प्रसाद, तेज कुमार उपाध्याय, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष संजय मिश्रा, अखिलेश सिंह, रितिका द्विवेदी, रामपाल जांगड़ा, उर्मिला राजपूत सहित प्रदेश कार्यकारिणी के तमाम सदस्य मौजूद थे। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि वित्त विहीन शिक्षकों व स्टाफ के सामने जीने मरने का संकट उत्पन्न हो गया है। इसलिए कोरोना महामारी में भी अपनी मांगों को लेकर वे 18 अगस्त से 17 सितंबर, 2020 तक पूरे एक माह प्रदेश के अलग अलग जनपदों में जिला विद्यालय निरीक्षक के कार्यालय में मौन धरना देकर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिला विद्यालय निरीक्षक को देंगे।
इस सिलसिले में 16 सितंबर को जालौन में तथा 17 सितंबर को लखनऊ के जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में मौन धरना देकर मांगपत्र दिया जाएगा। आज वित्त विहीन शिक्षक महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अशोक राठौर ने यंग भारत को बताया कि पिछले पांच माह से कोरोना महामारी के चलते पूरे प्रदेश के इक्कीस हजार से अधिक वित्त विहीन विद्यालय व महाविद्यालय बन्द पड़े हैं। छात्र छात्राओं को आनलाइन शिक्षण दिया जा रहा है। लेकिन वित्त विहीन विद्यालयों में फीस न आने के कारण साढ़े तीन लाख शिक्षकों और अस्सी हजार स्टाफ को पिछले पांच माह से वेतन नहीं मिल पा रहा है। श्री राठौर ने कहा कि वित्त विहीन विद्यालयों के स्टाफ केा वैसे ही कम वेतन मिलता है। शिक्षक किसी तरह ट्यूषन आदि करके घर का खर्च चला लेते हैं। पिछले पांच माह से वेतन न मिलने के कारण शिक्षक और स्टाफ के परिवार में कम से कम पांच सदस्य मान लिए जांय तो करीब साढ़े इक्कीस लाख लोग भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। इनकी हालत मनरेगा के मजदूर से भी बदतर है।
कोरोना के कारण न इन्हें वेतन मिल रहा है और न ही कोई ट्यूषन पढ़वा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष श्री राठौर ने कहा कि जिस तरह से केन्द्र व राज्य सरकार ने गरीबी की सीमा रेखा के नीचे जीने वालों को तथा मनरेगा परिवारों को कोरोना काल में फ्री राशन दे रहे हैं या गरीबों, विधवाओं व वृद्धों को पेंशन दी जा रही है। किसानों को सहायता दी जा रही है। ऐसी ही कोई योजना वित्त विहीन शिक्षकों के लिए भी होना चाहिए, ताकि वित्त विहीन षिक्षकों व स्टाफ के परिवारों का भी भरण पोषण हो सके। श्री राठौर ने कहा कि पिछले पांच माह से इन्तजार करते करते हम लोग थक गए, लेकिन केन्द्र व राज्य सरकारों की ओर से वित्त विहीन विद्यालयों के अध्यापकों तथा स्टाफ के लिए किसी योजना की घोषणा नहीं हुई। तब वित्त विहीन शिक्षक महासंघ ने 17 अगस्त 2020 से 17 सितंबर 2020 तक प्रदेश भर के सभी 75 जिलों में मौन धरना व ज्ञापन देने का निर्णय लिया गया है। इस दौरान कोरोना महामारी को देखते हुए मौन धरने में सोषल डिस्टेसिंग का ध्यान रखते हुए मौन धरना दिया जाएगा।
प्रदेष अध्यक्ष श्री राठौर ने बताया कि आज महासंघ के तत्वावधान में पीलीभीत के जिला विद्यालय निरीक्षक के कार्यालय में मौन धरना देकर ज्ञापन दिया गया। इसी क्रम में 16 सितंबर को जालौन के जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में मौन धरना देकर ज्ञापन दिया जाएगा। जबकि इस आंदोलन का समापन में 17 सितंबर को लखनऊ के जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में मौन धरना देकर मांगपत्र दिया जाएगा।

संजय श्रीवास्तव-प्रधानसम्पादक एवम स्वत्वाधिकारी, अनिल शर्मा- निदेशक, डॉ. राकेश द्विवेदी- सम्पादक, शिवम श्रीवास्तव- जी.एम.

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