प्रवासी मजदूरों ने बाँदा जिले के भाऊ सिंह का पुरवा में श्रमदान से नहर बनाने का काम शुरू किया

मजदूरों ने अपने श्रमदान को मनरेगा में तब्दील करते देख कर दिया नहर का श्रमदान शुरू
अधिकारियों की जिद से श्रमदानियों ने बन्द किया घरार नदी का काम
आनिल शर्मा+संजय श्रीवास्तव+डॉ. राकेश द्विवेदी
भाऊ सिंह का पुरवा(बाँदा): भाऊ सिंह का पुरवा ग्राम पंचायत नौगंवा का मज़रा है। यह दलित बाहुल्य गांव है। अधिकांश परिवार मजदूरी पर आश्रित है। जिन परिवारों के पास जमीन है सिचाई के अभाव में वो जमीन बंजर पड़ी है। गुढ़ा कैनाल से एक नहर निकली है जो कागजों में गुढ़ा बसरही तिल्हा, गुलाठी, जोगिन का पुरवा, बिज्जू का पुरवा, गहरा, भाऊ सिंह का पुरवा से होते हुए दिवनी तक जाती है। यह नहर कागजों मे आबाद है। परंतु जोगिन पुरवा से आगे इसमे एक बूंद पानी आगे नहीं जाता। जब यह बात ग्राम भांवरपुर के प्रवासी श्रमदानी मजदूरों को पता चली जो ग्राम विकास विभाग की मनमानी से आक्रोशित थे और मनरेगा के कार्य का बहिष्कार कर पिछले कई दिनों से घरार नदी के तट पर धरना दे रहे थे। उन्होंने कहा कि अब हम भाऊ के पुरवा में जाकर श्रमदान करेंगे। इसके बाद वे अपनी कुदाल, फावड़ा, डलिया लेकर महिला और पुरुष श्रमदानी मजदूर आज भाऊ सिंह का पुरवा पहुंच गए। और उन्होंने कागजों पर बनी नहर जो मौके पर बंजर भूमि के रूप में पड़ी है। वहां श्रमदान करना शुरू कर दिया। इस श्रमदान में देव कुमार, जीत राम, भरोसा, राम किशोर, छोटे लाल, विजयी, कमतू, दिनेश, शिव चरण, गौरा, लक्ष्मनिया, प्रेमा, अनारकली सहित 40 प्रवासी श्रमदानी मजदूर शामिल हो गए और नहर खोदने का श्रमदान करने लगे। इन मजदूरों में शामिल 70 वर्षीय श्याम लाल मजदूर ने तकलीफ भरे स्वर में कहा कि हम लोग तो श्रमदान करते हैं। परंतु जब काम पूरा हो जाता है तो ग्राम विकास विभाग के अधिकारी मनरेगा का बोर्ड लगाकर उसे अपना काम बताने लगते हैं। जैसे घरार नदी में हुआ। प्रवासी श्रमदानी 52 मजदूरों ने दिन-रात एक करके श्रमदान किया और घरार नदी पुनर्जीवित हो गई, उसमे पानी आ गया तो ग्राम विकास विभाग के अधिकारी नदी के तट पर जबरियां मनरेगा का बोर्ड लगाकर उसे अपना काम बताने लगे। हद तो यहां तक हो गई कि हमारे पूर्वजों के जमाने से बह रही घरार नदी को जब ग्राम विकास के अधिकारी नाला बताने लगे। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब हम मजदूर महिला पुरुषों को भागीरथ कहकर सम्मान करने की बात कही। तो ग्राम विकास विभाग के अधिकारियों ने साजिश करके हमारे श्रमदान के काम को जबरियां मनरेगा का काम बताने की कोशिश की। हम सभी श्रमदानी मजदूर सरकार या प्रशासन से अपने श्रमदान का पैसा नहीं चाहते हैं। लेकिन ये चाहते हैं कि श्रमदान का सम्मान हो। इसके लिए हम श्रमदान करके ही अपने न्याय का संघर्ष जारी रखेंगे। सामाजिक कार्यकर्ता राजा भैया ने कहा कि वे श्रमदानी मजदूरों के साथ हैं और उन्हें न्याय दिलाने के लिए श्रमदानियों के साथ संघर्ष करते रहेंगे।
मुख्यमंत्री को कठोर कार्यवाही करनी चाहिए ताकि जनता में न्याय का संदेश जाए- अशोक त्रिपाठी जीतू

बाँदा: जिला अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता अशोक त्रिपाठी जीतू ने कहा कि जिस तरह से ग्राम भांवरपुर की घरार नदी को 52 प्रवासी श्रमदानी मजदूरों ने अपने अथक श्रमदान से पुनर्जीवित किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसका संज्ञान लेकर इन श्रमदानियों को भागीरथ का नाम दिया और उनका सम्मान करने की घोषणा की। लेकिन ग्राम विकास विभाग के अधिकारियों ने जिस तरह से खुलेआम हुए श्रमदान के कार्य को मनरेगा का काम बताकर पहले वहां जबरियां बोर्ड गाड़ा। अब उसे मनरेगा का काम बनाने की जिद्द पर अड़े हुए हैं। ये श्रमदान को देखने वाले प्रत्यक्ष दर्शियों और शासन की आंखों में धूल झोंकने जैसा है। ऐसे अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ मुख्यमंत्री को जांच करवाके कठोर कानूनी कार्यवाही करनी चाहिए।

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