प्राण त्यागने पर उतारू लोगों को वैचारिक सम्बल प्रदान करें और उनका आत्मबल बढ़ाएं

प्रधानसम्पादक-संजय श्रीवास्तव

जनपद जालौन में वर्तमान में आत्महत्याओं का दुखद दौर जारी है। आर्थिक, सामाजिक, पारिवारिक, मानसिक, बीमारी एवम पुलिस जनित जैसी अनेक परेशानियों से ग्रस्त जनपद के लोग निराशा की चरमसीमा पे पहुंचकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर रहे हैं। ऐसी घटनाओं में जनपद जालौन में अचानक पिछले दिनों से काफी तेजी आ गयी है। यहां कुछ सुखद उदाहरण भी हैं। जैसे आत्महत्या के लिये तैयार युवक को पुलिस ने बचाया या ईश्वरीय कृपा से प्राण देने को आमादा व्यक्ति फांसी पर झूला, तो रस्सी टूट गयी।

ताजा घटनाओं का विवरण निम्नवत है। इस पर गौर करके जनपद में उत्पन्न हो रहीं आत्मघाती परिस्थितियों की आप भी विवेचना करें। और यदि संभव हो तो मरने प्राण गवाने पर आमादा लोगों को भाई चारे के नाते कोई रास्ता सुझाएँ। ताकि वे ईश्वर द्वारा दिये गए सबसे मूल्यवान जीवन को ऐसे न गवाएं। जैसे वर्तमान में सिलसिला चल रहा है।

दुखद
1. शनिवार की भोर में पुलिस की प्रताड़ना से छुब्ध 21 वर्षीय दलित युवती नीसू ने फांसी लगाकर प्राण त्याग दिए।
2. रविवार को आर्थिक तंगी से डकोर कस्बे में अधेड़ ने फांसी लगाकर दी जान।
3. पिरौना ग्राम में 35 वर्षीय महिला ने फांसी लगाकर प्राण त्यागे।

सुखद
1. कालपी कोतवाली क्षेत्र में बीती रात 1 बजे आत्महत्या करने के इरादे से यमुना नदी में कूदने जा रहे युवक को पुलिस ने बचाया।
2. जालौन नगर के खंडेराव निवासी अठाइस वर्ष के युवक चंद्रपाल की जान उस वक्त बच गयी जब वह आत्महत्या के इरादे से पेड़ ने रस्सी डालकर झूल गए। मगर ईश्वर की कृपा से रस्सी टूट गयी और उनके प्राण बच गए।

अपील

उपरोक्त विवरण जो आप पढ़ रहे हैं। वह तो सिर्फ 1 दिन की रिपोर्टिंग की बानगी मात्र है। मगर आत्महत्याओं का यह सिलसिला जनपद में एकाएक काफी तेज हो गया है। कोरोना की मानव विरोधी महामारी के बीच जहां बहुत बड़ी संख्या में वायरस से जनहानि हो रही है। वहीं विपरीत परिस्थितियों के चलते लोग स्वयं भी अपने प्राण गवां रहे हैं। तथा ऐसी बहुत घटनाएं पूर्व के अल्प काल मे ही घठित हो चुकी हैं। ‘यंग भारत’ का आपसे विनम्र अनुरोध है कि कोरोना के संक्रमण से अपने को बचाते हुए। अपने मोहल्ले और अपने आसपास तथा परिचितों में यदि कोई विपरीत परिस्थितियों के चलते आत्मघाती मानसिकता में पहुंच रहा हो। तो कृपया उसे वैचारिक सम्बल प्रदान करें और हम सब उनका आत्मबल बढ़ाएं तो शायद एक मानव होने के नाते यह मानवता के प्रति एक बड़ा उपकार होगा। ताकि इंसान के रूप में जन्म लेने वाले बेमौत अपने ही हाथों से अपना जीवन समाप्त करने से बच सकें। यह समाज के लिए हम सबका दायित्व है।

संजय श्रीवास्तव-प्रधानसम्पादक एवम स्वत्वाधिकारी, अनिल शर्मा- निदेशक, डॉ. राकेश द्विवेदी- सम्पादक, शिवम श्रीवास्तव- जी.एम.

सुझाव एवम शिकायत- प्रधानसम्पादक 9415055318(W), 8887963126