बसपा प्रदेश में खराब कानून व्यवस्था और ब्राह्मणों एवं अल्पसंख्यकों पर अत्याचार को बनाएगी विधानसभा चुनाव का मुद्दा

भाजपा शासनकाल में अपहरण, हत्या, बलात्कार और मासूमों की हत्या और बलात्कार के मामले बढ़े

सपा शासन में माफियाओं, गुण्डों की दहषत से व्यापारी, आम आदमी, महिलाएं तथा किशोरियां आतंकित रहती थीं

मुख्यमंत्री के हर कार्यकाल को अच्छी कानून व्यवस्था के लिए जाना जाता है और अधिकारी उनसे भयभीत रहते हैं

अनिल शर्मा़+संजय श्रीवास्तव़+डा0 राकेश द्विवेदी

लखनऊ। बसपा सुप्रीमो मायावती ने जिस तरह से उप्र में चार बार मुख्यमंत्री बनने के बाद अपना कार्यकाल चलाया है। उनके विरोधी भी यह बात मानते हैं कि उनके कार्यकाल में कानून व्यवस्था की स्थिति बहुत अच्छी रहती थी। उनके कार्यकाल में अधिकारी उनसे भयभीत रहते थे। उनके आदेश को टालने की हिम्मत नहीं कर पाते थे। इसलिए मायावती ने उप्र में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में अच्छी कानून व्यवस्था, ब्राह्मणों और अल्पसंख्यकों पर होने वाले अत्याचार को प्रमुख मुद्दा बनाकर चुनाव में उतरने की रणनीति बनाई है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने अभी से 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए संगठनात्मक तैयारियां शुरू करदी हैं। जिलों और सेक्टर की कमेटियेां में दलितों ओबीसी और अल्पसंख्यकों को जहां पहले से प्रमुखता मिलती थी। उसमें अब ब्राह्मणों को भी कमेटियों में जोड़ा जा रहा है। यानि मायावती के चारबार मुख्यमंत्री बनने के दौरान जो प्रदेश में हरबार कानून व्यवस्था की अच्छी स्थिति रही है। उससे आमजन, गरीब और दलित, शोषित और पीड़ित व्यक्ति भी अच्छा महसूस करता रहा है। गुण्डा माफियाओं की हालत पस्त रहती रही है। माफिया डान के नाम से मशहूर इलाहाबाद के पूर्व सांसद अतीक अहमद तथा प्रतापगढ़ के कुंडा रियासत के विधायक और पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह राजा भइया और उनके गुर्गों की मायाबती शासनकाल में जिस तरह से कड़ा षिकंजा कसा गया था कि बड़े बड़े माफिया हा हा करते नजर आ रहे थे। इसी तरह दलितों के साथ होने वाले अत्याचार के खिलाफ प्रशासन और पुलिस कड़ी कार्यवाही तत्काल करती थी। अल्पसंख्यक वर्ग भी अपने साथ इंसाफ मिलने की बात कहता है।
मायाबती के 2022 के चुनावी एजेण्डे में सबसे ऊपर उप्र की कानून व्यवस्था रहने वाली है। मंचों और सभाओं में ललकार करके कहेंगी। उनके जैसी अच्छी कानून व्यवस्था किसी भी दल की सरकार और मुख्यमंत्री ने नहीं दी। इसका समर्थन उनकी सभाओं में आने वाली हजारों पुरुष महिलाओं की भीड़ अपने दोनों हाथ उठाकर करेगी। जिस तरह से सपा के शासन में दबंग सपाई लोगों की जमीनों, मकानों, प्लाटों और दुकानों पर जबरिया कब्जा करते थे। खुलेआम अपहरण उद्योग फलफूल रहा था। व्यापारियों के परिजनों का अपहरण और उनसे मोटी फिरौती लेकर छोड़ने का कारोबार चल रहा था। उसे भी बसपा सुप्रीमो मायाबती आगामी विधानसभा चुनाव का मुद्दा बनाएंगी। वे भाजपा की सरकार पर मंचों से ये आरोप लगाएंगीं कि जो भाजपा गुण्डागर्दी माफियागीरी तथा भ्रष्टाचार को समाप्त करने का मुद्दा उठाकर प्रचण्ड बहुमत से उप्र की सत्ता में काबिज हुई थी। उसके मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेष में बढ़ रहे हत्या, लूट, डकैती, अपहरण और सबसे ज्यादा मासूम बच्चियों, किषोरियों, महिलाओं के साथ हो रहे हत्याओं और बलात्कारों के मामलों में बढ़ोत्तरी हुई है।
बसपा सुप्रीमो मायाबती का आरोप है कि योगी के शासन में विरोधी दलों के कार्यकर्ता, पदाधिकारी और जनप्रतिनिधियों की हत्याएं तो हो ही रहीं है। भाजपा और उनके सहयोगी संगठनों, संघ तथा उसके अनुसांगिक संगठनों के पदाधिकारियों की भी सरेआम हत्याएं हो रही हैं। वे यह भी मुद्दा उठाएंगीं कि भाजपा के केन्द्र और राज्य के शासन के दौरान कोरोना काल की महामारी में न बेरोजगार युवाओं को काम मिल रहा है और न ही स्थानीय व प्रवासी मजदूरों को मजदूरी मिल रही है। इसलिए मायाबती की पिछली सरकारों को याद करते हुए मतदाताओं को निर्णय लेना होगा कि वे प्रदेष में अमन और शांति कायम रखना चाहते हैं और माफियागीरी से मुक्ति पाना चाहते हैं तो उन्हें एक बार फिर से बसपा को सत्ता में लाना होगा।
इसी तरह वे पिछले दिनों ब्राह्मणों और अल्पसंख्यकों के साथ हुए अत्याचारों को भी चुनावी मुद्दा बनाएंगी। बसपा के पदाधिकारी बसपा शासन के दौरान अधिकारियों के भयभीत होने के किस्से इस तरह सुनाते हैं कि मायाबती ने आइपीएस अधिकारियों की एक बैठक में एक आइजी स्तर के अधिकारी को भरी मीटिंग में इतनी बुरी तरह डांटा था कि उस बैठक में ही व आइजी बेहोष हो गया था। इसके अलावा कमिष्नर और जिलाधिकारियों को अपनी निरीक्षण बैठकों में सभाओं के दौरान भी आम पब्लिक के सामने डांट देतीं थी। इसलिए अधिकारी उनके शासनकाल में भयभीत रहते हैं तथा कानून व्यवस्था चाकचैबन्द रहती है। बसपा आगामी विधानसभा चुनाव में इन्हें ही चुनावी मुद्दा बनाने वाली है।

संजय श्रीवास्तव-प्रधानसम्पादक एवम स्वत्वाधिकारी, अनिल शर्मा- निदेशक, डॉ. राकेश द्विवेदी- सम्पादक, शिवम श्रीवास्तव- जी.एम.

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